Bookmark and Share डिजिटल भुगतान से वैश्यावृत्ति के व्यापार में कमी के आंकड़ों से बौखलाये ,मोदी के दूत रविशंकर प्रसाद                मंत्री है या भ्रष्टाचारियों के दलाल                 मोदी के राज में पत्रकारों की आवाज की जा रही बंद, फिर भी चाटुकार बजा रहे बीन                एस्सार समूह ने केंद्रीय मंत्रियों और अंबानी बंधुओं के फोन टैप कराए                1500 करोड़ का घोटाला, राजभवन ने नहीं की कार्यवाही                फर्जी डाक्टरों का सरगना डॉ.अभिमन्यु सिंह                मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं भ्रष्टाचारियों के सरगना कहिए !                पद़माकर त्रिपाठी को डॉ. नही सफेद एप्रिन का गिद्ध कहिए !                    
मोदी सरकार की जीत के पीछे था फॉरेन सीक्रेट एजेंसीज का हाथ

मोदी सरकार की जीत के पीछे था फॉरेन सीक्रेट एजेंसीज का हाथ

खोजी पत्रकार नवनीत चतुर्वेदी ने प्रेस कांफ्रेंस में जमकर लगाए गंभीर आरोप

जयपुर। एक तरफ देश की मोदी सरकार ने कालेधन के खिलाफ जमकर जंग छेड़ रखी है वहीं दूसरी, ओर काले धन पर मोदी सरकार कटघरे में खड़ी दिखाई पड़ रही है। काले धन के बल पर 2014 का चुनाव जीतने वाली देश की मोदी सरकार पर देश की राजधानी दिल्ली के स्वतंत्र खोजी पत्रकार नवनीत चतुर्वेदी ने यहां जयपुर में गुरुवार को पिंकसिटी प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में मोदी सरकार की पॉलिसी एवं प्रोपेगेंडा वार पर जमकर निशाना साधते हुए एवं देश की एकता, अखंडता और सम्प्रभुता पर खतरा बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।

खोजी पत्रकार नवतीन चतुर्वेदी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘हम सब देश के काफी नामचीन पॉलिटिकल स्ट्रैटेजिस्ट प्रशांत किशोर को जानते ही हैं, बहुत कुछ सुना है उनके बारे में, पढ़ा भी है, आप मीडिया के मित्रों ने भी उन पर कई खबरें लिखी ही होंगी। अभी 5-7 दिन पहले ही उन्होंने अपना एक सर्वे घोषित किया है जिसमें 2019 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी को 48 % लोगों की पसंद बता कर उन्होंने टॉप फर्स्ट पर रखा है। इस अभियान को उन्होंने नेशनल एजेंडा फोरम नाम दिया और उसमें यह बताया गया था कि यह नेशनल एजेंडा महात्मा गांधी के 18 सिद्धांतों को आधार रख कर करीब 55 लाख लोगों ने देश भर से वोटिंग किया, उसके रुझान अनुसार मोदी सर्वाधिक पसंद किए गए।’

नवनीत चतुर्वेदी ने कहा कि यह ठीक है, उनका बिजनेस है, जिसके लिए काम करते हैं जो पैसे देगा उसके फेवर की रिपोर्ट तो बनानी ही चाहिए, इसमें गलत कुछ भी नहीं है। हमारे देश में देखा-देखी बहुत से काम धंधे चलते हैं, राजनीति में आज प्रशांत किशोर का नाम व कद इतना बड़ा है कि अब आपको पचासों लोग इधर-उधर नेताओं के पास अपना-अपना प्रपोजल लिए घूमते मिल जाएंगे, जो खुद को मिनी प्रशांत किशोर टाइप होने का दावा भी कर देते हैं।’

 

प्रेस वार्ता में खोजी पत्रकार चतुर्वेदी ने कहा कि ‘कई लोगों ने जो पत्रकार थे या पीआर एडवरटाइजिंग सेक्टर से थे उन्होंने इन दिनों कई विधायकों-सांसदों का सोशल मीडिया हैंडलिंग का काम संभाला हुआ है और क्षेत्रवार इमेज ब्रांडिंग वगैरह की सलाह वो लोग अपने हिसाब से नेताओं को दे भी रहे हैं। इसी बहाने राजनीति में सोशल मीडिया का महत्व बढ़ा भी है, कई नए लोगों को रोजगार भी मिला है और अब तो कई पार्टियां टिकट भी यह देख कर तय करती हैं कि आपके सोशल मीडिया पेज पर कितने फॉलोवर्स हैं। यह सब ठीक है, एक तरह से इमेज बिल्डिंग, परसेप्शन क्रिएशन का काम है, सब लोग कर रहे हैं। भारत में इसकी शुरुआत का श्रेय हमारे पीएम नरेंद्र मोदी को जाता है, उन्हीं के बाद शेष सब लोगों ने भी यह प्रयास किए लेकिन आज भी बिना शक मोदी टॉप पर हैं।’

खोजी पत्रकार नवनीत ने आगे कहा कि ‘आज की इस पत्रकार वार्ता का उद्देश्य मुख्य रूप से यह बताना है कि उक्त सब के पीछे पर्दे की हकीकत क्या है, अब तक जो मैंने ऊपर लिखा या बोला है वो देश का हर पढ़ा लिखा आदमी जानता समझता है, लेकिन कुछ ऐसा भी है जो परदे के पीछे है और जिसको हम नहीं देख पाते या सामने होते हुए भी नहीं समझ पाते। मेरा उद्देश्य उन तथ्यों को सामने लाना है यही मेरी हॉबी है, शौक है, जूनून है खोजी पत्रकारिता का।’

आज इस पत्रकार वार्ता में मैं यह बताना चाहता हूं कि ‘नरेंद्र मोदी की 2014 रिकॉर्ड जीत कहीं से भी प्रशांत किशोर का करिश्मा जादू कुछ नहीं था बल्कि परिस्थिति जनक मौके का फायदा उठाते हुए प्रशांत किशोर रातों-रात स्टार बन गए जबकि सब मेहनत फॉरेन इंटेलिजेंस सर्विसेज जैसे सीआईए, ब्रिटिश सीक्रेट सर्विसेज एंड मोसाद की थी। चूंकि वो इंटेलिजेंस एजेंसीज खुद को सामने रख कर क्रेडिट तो ले नहीं सकती और न ही उनको कोई क्रेडिट मोदी देने वाले थे। इसलिए जीत का सेहरा प्रशांत किशोर के सर पर बांध दिया गया और वो फॉरेन इंटेलिजेंस सर्विसेज के एक एजेंट की हैसियत से इस देश में अपना बिजनेस कर रहे हैं। 2014 की जीत के बाद प्रशांत किशोर ने सफलता पूर्वक बिहार चुनाव में जीत हासिल करवाई, पंजाब में जीत हासिल हुई, सिर्फ यूपी में वो मात खा गए।’

खोजी पत्रकार ने पत्रकारों से सवाल करते हुए आगे कहा कि ‘मेरा आप मीडिया के मित्रों से सीधा साफ सवाल है कि प्रशांत किशोर को कितना पैसा इन एक्टिविटीज के लिए मिलता होगा। यदि हम इधर-उधर की मीडिया रिपोर्ट्स को देखें तो सामने आएगा कि एक सौ करोड़ मिले, कोई पांच सौ से हजार करोड़ तक भी लेने-देने का दावा करते हैं। एक छोटे से असेंबली चुनाव में भी आज कल 2-4 करोड़ रुपया फुंक जाता है। ऐसे में यदि कोई दावा करे कि प्रशांत किशोर को दो-पांच सौ करोड़ कुछ मिले होंगे तो कोई अचरज नहीं हो सकता है। इन दिनों प्रशांत किशोर आंध्रप्रदेश में विपक्षी नेता जगन मोहन रेड्डी के लिए काम कर रहे हैं और अभी तक सिवा उनके और कोई डील उनकी किसी अन्य पार्टी-नेता से नहीं हुई है।

इन सवालों के जबाव देश की जनता को दें प्रशांत किशोर

1. क्या यह सत्य नहीं है कि आपकी कंपनी आईपैक जिसका गठन 15 अप्रैल 2015 को हुआ जिसके बैनर पर बिहार, यूपी, पंजाब के चुनाव हुए उस कंपनी का घोषित टर्नओवर बहुत ही मामूली करीब 95 लाख रुपए वित्तीय वर्ष 2015-16 में और करीब 37 लाख रुपए वित्तीय वर्ष 2016-17 में है?

2. आपकी कंपनी घाटे में चल रही है, उसकी नेट वर्थ भी निगेटिव स्केल में है, कंपनी की कुल जमा शेयर कैपिटल मात्र एक लाख रुपए की है। क्या यह सत्य नहीं है ?

3. आपकी कंपनी के तीनों निदेशक मिल कर 45 लाख रुपए सालाना वेतन उठाते हैं और उसके अलावा आपकी कंपनी के वेतन भत्तों के मद में सिर्फ 55 -60 लाख रुपए का खर्च सालाना दिखाया गया है जबकि हमने सुना है आपके यहां पचासों आईआईटी-आईआईएम के स्नातक जॉब पर हैं तो क्या आपके भारी-भरकम स्टाफ की सैलेरी लागत सिर्फ 55 -60 लाख रुपए सालाना है?

4. हालिया हुए नेशनल एजेंडा फोरम 2019 जिसके नतीजे में आपने नरेंद्र मोदी को टॉप पसंद की लिस्ट में रखा है, इस सर्वे की लागत व आपके फीस का भुगतान किसने किया था बीजेपी ने या आंध्रप्रदेश के जगन मोहन रेड्डी ने या 2014 की तरह किसी फॉरेन सीक्रेट सर्विस की एजेंसी ने? कृपया यह मत कहिएगा कि यह आपने खुद ने किया क्योंकि आपकी कंपनी की वित्तीय जानकारी है हमको वहां से यह संभव नहीं है।

प्रेस कांफ्रेंस के बाद पत्रकारों के साथ चाय पर चर्चा करते हुए नवनीत चतुर्वेदी।

5. 2014 में आपने मोदी जी को जितवा कर पीएम बनवाया, उस वक्त आपकी यह कंपनी आई-पैक अस्तित्व में नहीं थी, ठीक है बीजेपी ने आपको किसी और अकाउंट में फीस दी होगी वो कहां किस मद में दिया था आपको? मैंने बीजेपी का ऑडिट रिपोर्ट व एक्सपेंडिचर अकाउंट भी हासिल कर के पढ़ समझ लिया है वहां आपके नाम पर कोई पैसा दिया हुआ नहीं दिखाता। ऐसे में लाख टके का सवाल यह है कि क्या आपको मोदी ने कोई काला धन दिया था आपके मेहनताने फीस के एवज में? 2014 कैंपेन का फंडिंग सोर्स क्या था? क्या आपको पैसा मैडिसन एडवरटाइजिंग, WPP, ओगिल्वी और MATHER के जरिए दिया गया था?

6. प्रशांत किशोर आप राजनीतिक नहीं हैं, पत्रकार भी नहीं हैं, आपकी प्रोफाइल कहती है आप शुरू से पढ़ाकू किस्म के एग्जीक्यूटिव टाइप क्लास के थे, वर्ल्ड बैंक यूएनओ वगैरह में आप कंसलटेंट हुआ करते थे। फिर अचानक से ही ऐसा क्या टर्न आया कि आप 2014 में यकायक राजनीति में चाणक्य बन कर उभर आए? आपको चाणक्य बना कर किसने प्लांट किया मोसाद ने, ब्रिटिश सीक्रेट सर्विस ने या सीआईए ने?

7. क्या यह सत्य नहीं है कि फॉरेन इंटेलिजेंस सर्विसेज जिसमें अमरीका इंग्लैंड इजराइल सब की खुफिया एजेंसियां शामिल थी। उन्होंने आपको मुखौटा बना कर यहां प्लांट किया। असल में 2014 में मोदी जी की जीत के असली नायक वो फॉरेन एजेंसीज ही है लेकिन क्रेडिट जीत का सेहरा आपके सर ही बांधा गया क्योंकि आप उनके एजेंट हैं?

8. क्या यह सत्य है कि इन दिनों आप आंध्र प्रदेश में एक्टिव हैं उसके पीछे भी इन्हीं फॉरेन इंटेलिजेंस एजेंसीज का हाथ है और वो एजेंसीज आपकी मदद से जगन मोहन रेड्डी को सीएम बनवा कर तिरुपति मंदिर के अथाह खजाने पर हाथ फेरने की कोशिश में है?

9. क्या 2014 से ले कर आज तक की आपकी फंडिंग का सोर्स ये फॉरेन इंटेलिजेंस एजेंसीज नहीं हैं? यदि ये नहीं है तो फिर आपका यह सब पॉलिटिकल एक्टिविटी और भारी भरकम स्टाफ क्या 95 लाख और 37 लाख रुपए के टर्नओवर पर चल जाता है?

10. मैं अच्छे से जानता हूं कि मैं बहुत गंभीर आरोप लगा रहा हूं लेकिन यह सब हवा में नहीं है। ये सब सवाल मेरी पुख्ता जानकारी और उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित हैं। यदि आप मेरे सवालों के जवाब से मुझे संतुष्ट कर देते हैं और यदि मैं गलत हुआ तो मुझे आपसे सार्वजनिक माफी मांगने में कोई संकोच भी नहीं होगा।

11. क्या यह सत्य नहीं है कि आप OGILIVY & MATHER, APCO, मैडिसन एडवरटाइजिंग,ASERO, WPP जैसे संगठनों से जुड़े हैं? आपका इन संस्थाओँ से अनभिज्ञ होना या उनसे न जुड़े होने का दावा करना बिलकुल गलत होगा क्योंकि ये संस्थाएं मोदी 2014 मिशन 272+ में आप के साथ जुटी हुई थी जिसके प्रमाण हैं मेरे पास। क्या आप यह नहीं जानते थे कि इन सब संस्थाओं को फॉरेन इंटेलिजेंस एजेंसीज द्वारा चलाया जाता है? हम आपको इन सीक्रेट सर्विस एजेंसीज का भारतीय एजेंट होना क्यों न मानें? क्या आप इस पर अपना पक्ष रखेंगे?

12. बहुचर्चित पीएनबी घोटाले वाले नीरव मोदी का संबंध ब्रिटिश क्राउन कंपनीज क्रिस्टीज और सोथबी के साथ है, जिनके जरिए नीरव मोदी के पास तस्करी किया हुआ डायमंड आया था। क्या OGILIVY & MATHER , WPP आदि कंपनियों के मालिकान क्रिस्टीज व सोथबी से संबंध नहीं रखते? इन सब का आपस में संबंध है। इसका मतलब आप इन एजेंसीज की मदद से आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी को सीएम बनवा कर डायमंड तस्करी वाले गिरोह की मदद क्या नहीं कर रहे हैं?

 APCO से कर रहा हूं शुरुआत!

प्रेस वार्ता के अंत में खोजी पत्रकार नवनीत चतुर्वेदी ने पत्रकारों से कहा कि ‘आज की इस कांफ्रेंस में उदाहरण के लिए मैं APCO से शुरुआत कर रहा हूं। जल्द ही आगामी प्रेस कांफ्रेंस में ऊपर जो नाम लिखे हैं उन सब के बारे में विस्तार से बताऊंगा। मोदी के विजय रथ को हांकने की शुरुआत सबसे पहले इजराइली एजेंसी मोसाद के ही एक संगठन APCO ने किया था वर्ष 2007 में, तब जब प्रशांत किशोर को कोई जानता तक नहीं था। इस संदर्भ में टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक लेख 18 नवंबर 2007 को प्रकशित किया था। बकौल टाइम्स ऑफ इंडिया रिपोर्ट तत्कालीन गुजरात सरकार APCO को 25000 डॉलर प्रतिमाह फीस दिया करती थी जिसका काम वाइब्रेंट गुजरात के जरिए मोदी की इमेज बिल्डिंग का था।’


Email (With coma separated ) :
You can Advertisment here
संपर्क करें      मेम्बेर्स      आपके सुझाव      हमारे बारे मे     अन्य प्रकाशन
Copyright © 2009-14 Swarajya News, Bhopal. Service and Private Policy