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ये IPS अफसर,डॉक्टर है नक्सलियों के बीच करता है कुछ ऐसा कि होती है चर्चा

 ये IPS अफसर,डॉक्टर है

नक्सलियों के बीच करता है कुछ ऐसा कि होती है चर्चा
कोंडागांव।धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र कोंडागांव के एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव फिर एक बार चर्चा में हैं। इस बार इन्होंने किसी नक्सली का नहीं बल्कि उसकी फैमिली का इलाज किया है। 3 लाख के कुख्यात इनामी माओवादी को पकड़ने गए अभिषेक पल्लव ने उसकी फैमिली की हालत देखी तो उनका दिल पसीज गया। 
रविवार को कोंडागांव के एसपी अभिषेक पल्लव अपनी टीम के साथ नेलनाड़ इलाके के 3 लाख के इनामी माओवादी व भानपुरी एलओएस मेंबर पोहडू के घर दबिश दी। पोहडू तो नहीं मिला, लेकिन उसका परिवार में मिला जिसमें उसकी बीवी और बच्चे बीमार हालत में कराह रहे थे। चूंकि अभिषेक पहले डॉक्टर रह चुके हैं। ऐसे में उन्होंने तुरंत अपना धर्म निभाया और उनका इलाज कर मानवता की मिसाल पेश की। ध्यान देने वाली बात है कि अभिषेक अपने साथ अपना मेडिकल बॉक्स भी लेकर चलते हैं। उन्होंने माओवादी की फैमिली को दवाएं दी और दवाएं कब और कैसे लेनी है ये भी समझाया। उन्होंने पोहडू के परिवार को समझाया कि वे उससे आत्मसमर्पण कर मुख्य धारा में जीने की बात कहें। मुख्य धारा में आकर पूरे परिवार के साथ हेल्दी और खुशहाल जिंदगी जिए।
घायल नक्सली को यूं बचाया था पल्लव ने
अभिषेक पल्लव तब चर्चा में आए थे जब इन्होंने माओवादी कमांडर को गोली लगने के बाद उसे बचा लिया था। घटना 18 मार्च की है जब बस्तर के जंगलों में पुलिस और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। 7 घंटे तक चले इस एनकाउंटर में 5 माओवादी मारे गए थे। पुलिस के दो जवान भी शहीद हो गए थे। इसी माओवादी कमांडर सोमारु को गोली लग गई थी। उसके घाव से तेजी से खून बह रहा था। अभिषेक पल्लव उसका इलाज करने लगे। तब उनके साथियों ने इसका विरोध भी किया था। फिर भी वे नहीं माने और उसकी जान बचा ली। इस घटना के बाद पुलिस अभिरक्षा में इलाज करा रहे सोमारु ने कहा कि यदि साहेब ने जान न बचाई होती तो वो मर जाता। इस घटना के बाद सोमारु की सोच बदल गई और उसने पुलिस के प्रति कृतज्ञता जाहिर की।
इस घटना से अभिषेक पल्लव काफी चर्चा में आए थे और उनको बड़े अधिकारियों की ओर से भी तारीफ मिली थी। बिहार के बेगूसराय के पल्लव 2013 में आईपीएस बनने से पहले एक डॉक्टर थे। उन्होंने 2009 में एम्स से डॉक्टरी की पढ़ाई की थी।


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