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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेशों में इंटरव्यू देते हैं लेकिन अपने देश में क्यों नहीं?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेशों में इंटरव्यू देते हैं लेकिन अपने देश में क्यों नहीं?

सरकार के तीन साल पूरे होने पर देश के सभी बड़े अखबारों और न्यूज चैनलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वक्त मांगा था. लेकिन सभी की अर्जियां खारिज कर दी गईं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह दिनों में चार देशों की विदेश यात्रा करके लौटे हैं. यह पहला मौका है जब उन्होंने एक हफ्ते के अंदर तीन साक्षात्कार दिए. जब नरेंद्र मोदी जर्मनी में थे तो जर्मनी के एक अखबार में उनका इंटरव्यू छपा. इसके बाद वे स्पेन पहुंचे तो वहां भी ऐसा ही हुआ. इसके बाद मोदी रूस गए तो सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल फोरम में अमेरिका के एनबीसी नेटवर्क की पत्रकार मेगन केली ने व्लादीमीर पुतिन के साथ उनसे सवाल जवाब किये.

यह टेलीविजन इंटरव्यू भारत सहित कई देशों में लाइव दिखाया गया. इस साक्षात्कार में पहली बार प्रधानमंत्री से इतने सख्त सवाल पूछे गए जो भारत में अब तक किसी पत्रकार ने पूछने की हिम्मत नहीं की. ज्यादातर यह देखा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगर एक सवाल का जवाब दे देते हैं तो फिर उसी सवाल को घुमाकर पूछने पर भी अपना जवाब नहीं बदलते. लेकिन रूस में मेगन ने जब डोनाल्ड ट्रंप के बारे में उनसे साफ पूछा कि आप ट्रंप के साथ हैं या ट्रंप के खिलाफ तो वे थोड़े से असहज दिखे. आखिरकार उन्होंने संभलकर जवाब दे दिया.

 इसी तरह जब चीन पर सवाल आया तो फिर मोदी ने थोड़ा सोचकर जवाब दिया. एक तरह से कहें तो सेंट पीटर्सबर्ग में सवाल-जवाब का सिलसिला मोदी की विदेश नीति और कूटनीति दोनों की परीक्षा थी जिसमें जानकारों का मानना है कि वे पास रहे. लेकिन सवाल यह है कि भारत में प्रधानमंत्री से ऐसे सवाल क्यों नहीं पूछे जाते. सुनी-सुनाई है कि प्रधानमंत्री मोदी से पिछले तीन साल में अखबार के किसी भी पत्रकार ने आमने-सामने बैठकर सवाल जवाब नहीं किये. अखबार में जितने भी इंटरव्यू छापे गए उसके ज्यादातर सवाल पीएमओ को भेजे जाते हैं. इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से उन सवालों का लिखित जवाब भेजा जाता है. आखिर में उस अखबार के प्रतिनिधि प्रधानमंत्री से मिलते हैं, साथ में फोटो खिंचाई जाती है और इंटरव्यू पूरा हो जाता है.

टेलीविजन के सामने दिए इंटरव्यू में भी प्रधानमंत्री कार्यालय पहले से कुछ सवाल मांग लेता है, लेकिन यह सवाल पूछने वाले पत्रकारों पर निर्भर करता है कि वे सवाल वही रखते हैं या फिर कुछ अलग से पूछते हैं. प्रधानमंत्री का इंटरव्यू ले चुके एक वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं कि अगर पूछने वाले ने बहुत ज्यादा सवाल बदले या फिर किसी मुद्दे पर उन्हें जबरन घेरने की कोशिश की तो उनका मिज़ाज बिगड़ सकता है.

मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री कार्यालय के पास देश के कई बड़े अखबारों और टेलीविजन चैनल्स से साक्षात्कार के लिए वक्त मांगा गया था. लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय ने सभी अर्जियां खारिज़ कर दीं. प्रधानमंत्री के अलावा सभी मंत्रियों और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जमकर इंटरव्यू दिए. अब कहने वाले कह रहे हैं कि भारत में नरेंद्र मोदी का अगला बड़ा इंटरव्यू 2018 से 2019 के बीच आएगा. उस वक्त मोदी सरकार अपने पांचवें साल में प्रवेश कर रही होगी और चुनाव नजदीक आ रहे होंगे.


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