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इस बार एक मंच पर दिखेंगी प्रियंका गांधी और डिंपल यादव?

नई दिल्‍ली: कांग्रेस और सपा में अखिलेश खेमे के बीच चल रही गठबंधन की चर्चाओं के बीच प्रियंका गांधी और डिंपल यादव के एक मंच पर आने और स्‍टार प्रचारक के रूप में साथ चुनाव प्रचार की अटकलें लगाई जाने लगी हैं. इन पार्टियों ने इसके संकेत भी दिए हैं. यूपी में कांग्रेस के प्रदेश अध्‍यक्ष राज बब्‍बर ने भी एक इंटरव्‍यू में सवाल के जवाब में कहा कि सब चाह रहे हैं कि राहुल गांधी, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी और डिंपल यादव सभी एक मंच पर दिखें लेकिन उन्‍होंने यह भी कहा कि पहले सपा के भीतर पिता-पुत्र में सुलह तो जाए.
वैसे कांग्रेस के भीतर लंबे समय से मांग उठ रही है कि प्रियंका गांधी को बड़े रोल में आते हुए रायबरेली और अमेठी से बाहर स्‍टार प्रचारक की भूमिका आनी चाहिए. इस बार यह मांग फिर से जोर-शोर से उठ रही है कि प्रियंका गांधी को गांधी परिवार की पारंपरिक सीटों से बाहर भी कांग्रेस के प्रचार के लिए आना चाहि.
इसी तरह अबकी बार डिंपल यादव के बारे में भी अखिलेश टीम की तरफ से मांग उठ रही है कि उनको अपने संसदीय क्षेत्र कन्‍नौज से बाहर भी अबकी बार चुनाव प्रचार में उतरना चाहिए.
इसकी एक बड़ी वजह यह है कि अखिलेश के टीवी के विज्ञापनों में भी वह अखिलेश के साथ दिखती है. पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अखिलेश और डिंपल आदर्श दंपति के रूप में दिखते हैं. उनके साथ कहीं कोई विवाद नहीं जुड़ा है. ऐसे में अबकी बार डिंपल को लोग अखिलेश के साथ बड़े स्‍टार प्रचारक के रूप में देखना चाहते हैं.

डिंपल यादव(39) यदि स्‍टार प्रचारक के रूप में उभरती हैं तो यह उनके लिए सियासत में एक कदम आगे बढ़ने की बात होगी. उल्‍लेखनीय है कि 2009 में जब डिंपल यादव पहली बार चुनावी मैदान में उतरी थीं तब उनको बेहद गंभीरता से नहीं लिया गया था और वह उस उपचुनाव में फीरोजाबाद सीट से राज बब्‍बर से हार गई थीं. उसके बाद 2012 में अखिलेश यादव ने मुख्‍यमंत्री बनने के बाद जब कन्‍नौज संसदीय सीट छोड़ी तो उपचुनाव में डिंपल को कोई चुनौती देने वाला नहीं था. 2014 के लोकसभा चुनाव में वह बीजेपी की लहर के बावजूद अपनी कन्‍नौज सीट को बचाने में कामयाब रहीं और निकट मुकाबले में जीतीं.सूत्रों के मुताबिक प्रियंका और डिंपल के बीच मधुर संबंध हैं और संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान भी इन दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई है. अब यूपी में पल-प्रतिपल बदलते सियासी माहौल में सूत्रों के मुताबिक इस बात की प्रबल संभावना बन रही है कि कांग्रेस और सपा के अखिलेश गुट के बीच गठबंधन होने पर ये दोनों स्‍टारक प्रचारक के रूप में एक मंच पर प्रचार करती हुई दिख सकती हैं.


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