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प्रधानमंत्री मोदी के दावों की हवा निकालते भाजपा नेता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब मुसलिमों के लिए धार्मिक आस्था के प्रतीक देश सऊदी अरब में अपनी सरकार के 'सबका साथ सबका विकास' मंत्र का गुणगान कर रहे थे और दुनिया के मुसलमानों का दिल जीतने के मिशन पर थे उसी समय देश में उनकी पार्टी के कुछ नेता और समर्थक प्रधानमंत्री के दावों और नारों की हवा निकालने में लगे थे। भाजपा की ओर से यह अकसर कहा जाता है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री को उस समय शर्मसार कर दिया था जब मनमोहन सिंह विदेश में थे और राहुल ने दागियों संबंधी अध्यादेश की प्रतियाँ फाड़ दी थीं। कमोबेश वैसी ही स्थिति नरेंद्र मोदी के साथ भी रही इसलिए उन्हें कार्रवाई करने में हिचकना नहीं चाहिए और एक सख्त संदेश देना चाहिए।

        दरअसल विवाद तब शुरू हुआ जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कथित रूप से कहा कि जो लोग भारत माता की जय नहीं बोल सकते उन्हें देश में रहने का अधिकार नहीं है। उनके इस बयान पर विवाद हुआ तो वह बात संभालते हुए बोले कि ऐसा नहीं कहा था। फडणवीस को यह सोचना चाहिए कि वह भाजपा के मुख्यमंत्री नहीं बल्कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने संविधान की शपथ ली है और संविधान सभी धर्मों को बराबर का अधिकार देता है यदि किसी धर्म विशेष के लोग अपनी धार्मिक बाध्यताओं का हवाला देते हुए कोई एक नारा नहीं लगाना चाहते तो उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। कहा जा रहा है कि राज्य भाजपा कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करते हुए फडणवीस शायद मुख्यमंत्री के रूप में कम पार्टी नेता के रूप में ज्यादा बोल रहे थे, यदि ऐसा है तो भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे व्यक्ति को यह शोभा नहीं देता।
        इधर योग गुरु रामदेव ने भी विवादित बयान देते हुए कहा है कि वह देश के कानून और संविधान का सम्मान करते हैं नहीं तो ‘‘भारत माता की जय’’ का विरोध करने वाले लाखों लोगों के सिर काट सकते हैं। उन्होंने कहा है कि भारत माता की जय बोलना देश और मातृभूमि के प्रति नागरिकों की निष्ठा की पुष्टि करता है और जो मजहब इसके खिलाफ कहता है, वह देश के हित में नहीं है। दरअसल रामदेव एक कार्यक्रम में असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधते हुए कह रहे थे, ''कोई आदमी टोपी पहनकर खड़ा हो जाता है, बोलता है भारत माता की जय नहीं बोलूंगा, चाहे मेरी गर्दन काट दो। इस देश में कानून है, नहीं तो तेरी एक की क्या, हम तो लाखों की गर्दन काट सकते हैं।'' खुद को संत और योगी कहने वाले लोगों के मुंह से निकली ऐसी बातों से वाकई आश्चर्य होता है। हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने रामदेव के बयान का समर्थन करते हुए कहा, ''बाबा रामदेव ने जो हिंदुस्तान का जन मानस है उस जन मानस की भावनाओं को व्यक्त किया है। ये तो हमारी सभ्यता है, कानून है देश का कि इनको बर्दाशत किया जाता है। अगर दूसरे देश में लोग ऐसा करें तो कोई भी उन्हें बर्दाशत नहीं करेगा।’’ विज इससे पहले भी विवादित बयान देने के लिए जाने जाते रहे हैं।
       राज्यों में ही ऐसी घटनाएँ सामने आ रही हों ऐसा नहीं है। केंद्रीय शहरी विकास और संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा है कि भारत माता हिंदू, मुस्लिम, इसाई, पिछड़ा आदि नहीं है। इसका मतलब भूमि है और इस भूमि में रहने वाले सभी लोग भी। आरएसएस के नेता भी विवादित बयान देने में पीछे नहीं हैं। संघ के एक वरिष्ठ नेता ने तो यहां तक कह दिया है कि वंदे मातरम ही असली राष्ट्रगान है। जब उनके इस बयान पर विवाद हुआ तो वह भी सफाई देते नजर आये। आरएसएस समर्थित पत्रिकाओं ने ‘‘भारत माता की जय’’ को भारतीय राष्ट्रवाद के केन्द्र में बताया है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय को समर्पित ‘ऑर्गनाइजर’ और ‘पांचजन्य’ के मुख्य लेखों में भाजपा नेता मुरलीधर राव ने देश को धरती मां बताने के लिए वाल्मीकि की रामायण का जिक्र किया और यह नारा लगाने का समर्थन किया। राव ने ‘भारत माता की जय’ के नारे का समर्थन करते हुए उस घटना का जिक्र किया जब भगवान श्रीराम को रावण को हराने के बाद लंका में रूकने का विकल्प दिया गया लेकिन उन्होंने स्वदेश आने का फैसला किया।
      'सबका साथ सबका विकास' के चुनावी नारे के साथ केंद्र की सत्ता में भाजपा पहुंच तो गयी लेकिन पार्टी और उससे जुड़े विभिन्न संगठनों के नेता जिस प्रकार विवादास्पद बयानबाजी कर रहे हैं उससे भाजपा कथित 'साम्प्रदायिक' दल की छवि से उबर नहीं पा रही है। विपक्ष मोदी सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार का एक भी मामला नहीं ला पाया लेकिन कथित असहिष्णुता के अनेकों आरोप सरकार पर लग चुके हैं। प्रधानमंत्री पर अकसर आरोप लगते रहे हैं कि सभी मुद्दों पर अति सक्रिय रहने के बावजूद वह ऐसे मामलों पर चुप्पी साध लेते हैं। हालांकि प्रधानमंत्री कई बार यह साफ कर चुके हैं कि हमें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा दिखाये गये मार्ग पर चलना चाहिए जिसमें उन्होंने विविधता भरे भारतीय समाज से अपने सामाजिक मूल्यों को बरकरार रखने को कहा था। पूर्व में ऐसी खबरें आई भीं कि भाजपा अध्यक्ष और प्रधानमंत्री ने विवादित बयान देने वाले पार्टी नेताओं को झिड़का है लेकिन जिस तरह से बयानबाजी जारी है उससे लगता नहीं कि कोई फर्क पड़ा है।
    बहरहाल, सरकार की छवि प्रभावित नहीं होने पाये और सरकार का ध्यान विकास पर ही रहे, इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी के लिए यह जरूरी है कि वह विवादास्पद बयानों पर अपना रुख पार्टी के भीतर नहीं बल्कि बाहर भी जाहिर करें। मोदी को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से सीखना चाहिए कि किस तरह उनकी सरकार के दौरान कट्टरवादी ताकतें सिर नहीं उठा सकी थीं। कट्टरता पर रोक लगाकर ही 'सबका साथ सबका विकास' नारा सार्थक होगा।



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