Bookmark and Share डिजिटल भुगतान से वैश्यावृत्ति के व्यापार में कमी के आंकड़ों से बौखलाये ,मोदी के दूत रविशंकर प्रसाद                मंत्री है या भ्रष्टाचारियों के दलाल                 मोदी के राज में पत्रकारों की आवाज की जा रही बंद, फिर भी चाटुकार बजा रहे बीन                एस्सार समूह ने केंद्रीय मंत्रियों और अंबानी बंधुओं के फोन टैप कराए                1500 करोड़ का घोटाला, राजभवन ने नहीं की कार्यवाही                फर्जी डाक्टरों का सरगना डॉ.अभिमन्यु सिंह                मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं भ्रष्टाचारियों के सरगना कहिए !                पद़माकर त्रिपाठी को डॉ. नही सफेद एप्रिन का गिद्ध कहिए !                    
गबन,घोटाले,और अपराध में विकास की ओरनिर्विघ्न सफल होते शिवराज


गबन,घोटाले,और अपराध में विकास की ओर

    निर्विघ्न सफल होते शिवराज

     चहुं ओर हवा प्रचारतंत्र की,  नहीं कोई  व्यवधान।

प्रदेश की जनता मनमुग्ध है,  जिनकी छाप कमल निशान।                                       भ्रष्टतंत्र की ठसक बहुत है,  

                   ता ऊपर दिल्ली में बैठे मोदी सुल्तान।                      

          यश,धन, चाहे जितना बटोर ले,  मत चूके चौहान।।

भोपाल। जमीन घोटाला, नोट गिनने की मशीन खरीदने का मामला, डम्पर घोटाला, खनिज घोटाला, व्यापमं में परिवहन आरक्षक भर्ती घोटाला, शिक्षक भर्ती घोटाला, पीएमटी प्रवेश, डीमेट प्रवेश घोटाला जिसकी वजह से प्रदेश का सिर नीचा कर दिया इस प्रकरण में कई जजों उच्च अधिकारियों सहित संवैधानिक दायित्व पर बैठे राज्यपाल तक को लपेटे में लिया यह शिवराज सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल की उपलब्धियों में शुमार किये जाने वाले मामले है। इन्हें भारत का संविधान पाल-पोस रहा है।जबकि प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम भी अनेकों आरोप-अपराध दर्ज है। फर्क सिर्फ इतना है कि भारत का संविधान मुख्यमंत्री शिवराज के लिये कवच का काम कर रहा है। उनके मुख्यमंत्रित्व काल इतने घपले-घोटाले हुए पर उनके द्वारा घोषित उच्च पदों पर बैठे लम्बरदारों ने हर दम मुख्यमंत्री का बचाव संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए की। तब भी मामला दब नहीं पाया और मामला सी.बी.आई. जांच तक पहुंच गया आखिर इस सब के लिये जिम्मेदार कौन है? क्या मुख्यमंत्री की नैतिक जिम्मेदारी नही बनती, कुल मिलाकर शिवराज सिंह के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से आज दिनांक तक प्रदेश में संवैधानिक संकट का दौर लगातार बना हुआ है। इनके कैबिनेट में शायद ही ऐसा कोई हो जिस पर कोई दाग न हो। लगभग डेढ़ दर्जन मंत्रियों पर तो लोकायुक्त की जांच लंबित थी पर धीरे-धीरे एक-एक कर समाप्त करा दिया गया और चालान की अनुमति को लंबित रखा गया। हजारों की तादाद में लाभ के पदों पर कार्यरत अधिकारियों पर कार्यवाहीकी अनुमति सरकार से अपेक्षित है पर कमाऊ अधिकारियों को सरकार का खुला संरक्षण है। मुख्यमंत्री नोटशीट पर सीधे नियुक्तियों का आदेश जारी करते हैं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय एवं मध्यप्रदेश माध्यम ,म.प्र.भोज मुक्त विश्वविद्यालय जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं में ऐसी नियुक्तियों की भरमार से देखा जा सकता है। प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार देखा गया है कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों में स्व. रविशंकर शुक्ल से लेकर शिवराज सिंह चौहान तक के पूर्व तक के मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर तक के कार्यकाल में उनकी पत्नियों और सालों के नाम बीच में कभी भी सार्वजनिक रूप से सामने नही आये। पर वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की पत्नी साधना सिंह का नाम हर घपले-घोटाले में चर्चाओं में रहा है, इनके साले का नाम अवैध कारोबार के मामले में कई बार सुर्खियां पा चुका है। कुल मिलाकर जब से शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है तब से आज दिनांक तक अपने पापों को छिपाने साथ-साथ भ्रष्टों को पोषित कर प्रदेश को कुख्यातों की श्रेणी में करते रहें हैं। मुख्य सचिव की कुर्सी संभालने वाले श्री डिसूज़ा पर उनके हाउसिंग बोर्ड के कमिश्रर पद पर पदस्थी के दौरान आर्थिक गंभीर आरोप है पर शिवराज ने उनके मुख्य सचिव बना रखा है, इसी प्रकार मुख्यमंत्री के चहेते अफसरों में शुमार प्रमुख सचिव, मनोज श्रीवास्तव, एस.के.मिश्रा आबकारी आयुक्त अवैध आई.ए.एस. राकेश श्रीवास्तव के साथ ही संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने वाले राज्यपाल-लोकायुक्त, मुख्य सूचना आयुक्त, श्री केडी खान तक पर कई तरह के अनियमितताओं के गंभीर आरोप हैं। यही सब मिलकर मुख्यमंत्री को और मुख्यमंत्री इन्हें बचाने में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। वहीं पिछले दस अपने दल के राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को प्रदेश से बाहर भगाने का ही काम किया है, अथवा उन्हें कहीं न कहीं उलझाकर अपनी राजनीतिक सीढिय़ों को मजबूत किया है। जिनमें सुश्री उमा भारती, नरेन्द्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, कप्तान सिंह सोलंकी, कैलाश विजयवर्गीय, बाबूलाल गौर, लक्ष्मीकांत शर्मा, प्रभात झा, जैसे दर्जनों उदाहरण इतिहास में दर्ज हो गए हैं। वहीं विपक्ष में सेंध लगाकर एक कांग्रेसी के रिश्तेदार को अपना प्रमुख सचिव बनाकर बहुत ही चतुराई से काम किया है। वह भी भ्रष्टाचार का पंजीकृत आरोपी। जन सरोकार का ढकोसला दिखाकर सिर्फ और सिर्फ अपना रसूख एवं दबदबा बनाये रखने का हर संभव जतन में जुटे हैं। गत दिनों अपने दस साल पूरा करने के आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सगर्व कहा कि उन्होंने ऐसा कोई काम नही किया जिससे पार्टी को शर्म महसूस हो। मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज सरकार के कार्यकाल में व्यापमं मामले से जुड़े कई निरपराध लोगों की हत्या हुई यह पार्टी के लिये गर्व की बात हो सकती है। कई अधिकारियों कर्मचारियों की हत्यायें माफियाओ द्वारा की गई जिन्हें सरकार का संरक्षण रहा, तथा कई निर्दोष पत्रकारों जो इन माफियाओं के खिलाफ कलम चलाते थे की हत्यायें मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी के लिये गर्व की बात हो सकती है। सैकड़ों किसानों की आत्महत्यायें गर्व करने लायक बात हो सकती है। पर प्रदेश की जनता इन घटनाओं से अवश्य शर्मिंदगी महसूस करती है। प्रदेश में बाहर से पढऩे आने वाले छात्रों की संख्या में आई भारी गिरावट से इनके कार्यकाल की शैक्षणिक गुणवत्ता की पोल खोलने के लिये पर्याप्त कारण है। आरोपों के घेरे में, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मुख्यसचिव तथा पूर्व मुख्यसचिव राकेश शाहनी, आर.परशुराम के अलावा लगभग आधा सैकड़ा आईएएस, ,आईपीएस तथा एक सैकड़ा से अधिक पीसीएस अधिकारियों के खिलाफ गंंभीर शिकायतें है इनमें से अधिकांश मुख्यमंत्री के सलाहकार और पसंदीदा अफसर ही हैं। लोकायुक्त पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी गौर करने लायक है जिसमें कहा है कि म.प्र. के लोकायुक्त मुख्यमंत्री के प्रभाव में हैं। वही वहीं चर्चा यहां तक भी है कि भ्रष्टाचार को छुपाने और न्यायाधीशों तथा शासकीय अधिवक्तताओं को अपने प्रभाव में रखने के लिए के लिये भोपाल में लगभग 46 एकड़ जमीन कॉलोनी के नाम पर एक सहकारी समिति बनाकर कौडिय़ों के भाव में भोपाल के प्राइम लोकेशन में दे दी गई है। दूसरी ओर जहां हजारों लोग यहॉ खुले आसमान में गुजारा कर रहे हैं। शहरी क्षेत्र में सार्वजनिक उपयोग सड़क,पार्क,नाले नदी,तालाब और ग्रामीण क्षेत्र में निस्तारी एवं चरनोई भूमियों पर सत्ता सुख भोगी माफि याओं का अवैध कब्जा है,तो वही सरकारी योजनाओं में खर्च की जाने वाली राशियों पर शासन पोषित भ्रष्टाचारियों और वर्ग विशेष का कब्जा है। इन सारे कुकर्मो को छिपाने और गागरौनी गान सुनाने मुख्यमंत्री ने अपने अधीन व व्ययं की अध्यक्षता में संचालित चिटफंड रूपी संस्था मध्यप्रदेश माध्यम की चाबी अवैध /कूटरचित डिग्रीधारी मंगला प्रसाद मिश्रा और धोखा धड़ी के पंजीकृत आरोपी प्रमोटी आई.ए.एस. कांग्रेस रिश्तेदार एस.के.मिश्रा को सशर्त चौकीदार बना कर बिठा दिया है। ताकि अपने कुकर्म और पापों को छिपाने में सहयोगी मीडिया घरानों को निरन्तर विज्ञापन और अय्याशी का साजो सामान मुहैया कराकर गुलाम बनाकर रखा जा सके, ऐसे प्रदेश के दिलेर मुख्यमंत्री के लिये यह गर्व करने की बात नहीं तो और क्या है? वे डंके की चोट पर जोर से कहते है हम किसी भ्रष्टाचारी को नही छोड़ेगें भ्रष्ट मंडली के बीच बैठ कहते है सबको साथ रखेंगें। 


Email (With coma separated ) :
You can Advertisment here
संपर्क करें      मेम्बेर्स      आपके सुझाव      हमारे बारे मे     अन्य प्रकाशन
Copyright © 2009-14 Swarajya News, Bhopal. Service and Private Policy