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विंध्या हर्बल के कर्मचारियों ने मेला में खड़ा किया बखेड़ा

विंध्या हर्बल के कर्मचारियों ने मेला में खड़ा किया बखेड़ा
मेहमानों को भगाया, डराया, धमकाया, 
चेयरमैन ने पुचकारा, मनाया और बाद में सम्मान से बैठाया
भोपाल, (पं.एस.के भारद्वाज) भोपाल में चल रहे 11 दिसंबर 2015 से पांच दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय हर्बल मेले के नाम पर जो व्यवस्था की गई हैं वह पूर्णत: दूषित हैं। इसके संबंध में हमारे द्वारा जो समाचार के माध्यम से जो शंकाएं जाहिर की गई थीं वह आज समाज और प्रशासन के सामने साक्षात प्रमाण हैं। भारत सरकार और मध्य प्रदेश सरकार के वित्तीय सहयोग से आयोजित होने वाले इस हर्बल मेले की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश राज्य लघु उपज संघ के पास हैं। एक तरह से यह संस्थान अर्धशासकीय संस्थान है। कितना दुर्भाग्य है कि फेडरेशन के सक्षम अधिकारी अनुभवी और परंपरागत वैद्यों को, जड़ी बुटियों के जानकारों को जिलों में बुलाने के लिए अधिकारियों को आदेशित करके ससम्मान भेजने का फरमान जारी करते हैं और जब दूरस्थ अंचलों से विभिन्न राज्यों से पीढ़ी दर पीढ़ी अनुभव रखने वाले तथा परंपरागत वैद्यो का व्यवसाय करने वाले,जिनमें कई तो मठ मंदिरों के संत महात्मा लोग भी हैं,भोपाल मेला स्थल पर पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं,तो पहले तो उन लोगों को पहले दिन रख लिया जाता है। विभागीय मंत्री सहित अन्य राजनेताओं के भाषणों से शुरुआत करके उन्हें मनमोहक प्रवचन सुनाकर मनमुग्ध करा दिया जाता है। तथा दूसरे दिन उन्हें धक्के देकर बाहर भगा दिया जाता है। और यह काम भी न कोई वरिष्ठ प्रशासन अधिकारी करता है और न ही कोई मंत्री अथवा कोई वोर्ड का चेयरमैन/ प्रबंधक संचालक करता है बल्कि एक अदना सा चापलूस भ्रष्ट नौकरों का जोड़ा जिनमें डॉक्टर विजय सिंह और डॉक्टर संजय शर्मा जो दोनों ही बी.ए.एम.एस डिग्री धारक हैं तथा मध्यप्रदेश के उत्पादन केन्द्र विंध्या हर्बल के कर्मचारी हैं, के द्वारा यह कहकर परंपरागत वैद्यों को बाहर खदेड़ दिया जाता है कि तुम्हारे पास कोई डिग्री नहीं है और न ही किसी कॉलेज से कोई पढ़ाई लिखाई का प्रमाण है। ज्ञात हो कि इन दोनों कर्मचारियों में से एक डॉक्टर संजय शर्मा का स्वयं का निजी व्यवसाय ही नहीं बल्कि औषधि उत्पादन केन्द्र भी है जिसका नाम चमन हर्बल है। इस हर्बल मेले में जहां विंध्या हर्बल का स्टाल लगा है उसके ठीक पीछे इसने अपना चमन हर्बल का स्टाल भी समानान्तर रूप से लगा रखा है। इसके अतिरिक्त इनके व्यवसाय केन्द्र एक साकेत नगर तथा कोलार रोड बीमा कुंज में भी संचालित हैं। दूसरा कर्मचारी डॉ विजय भी अन्य लोगों के साथ मिलकर अपना निजी व्यवसाय मध्यप्रदेश आयुर्वेद संजीवनी की आड़ में चला रहा है। जब यह खबर मीडिया जगत में फैली तो आनन फानन में नवनियुक्त चेयरमैन श्री कोरी ने मौके को भांपकर आनन फानन में अधिकारियों के साथ मेला प्रांगण में ही मीटिंग आयोजित की तथा निराकरण करने के आदेश दिए। अंतत: सायं 6 बजे विवाद का पटाक्षेप हुआ तथा अतिथि वैद्यों को बिठाने के लिए समुचित व्यवस्था की गई उनके रहने एवं भोजन की व्यवस्था करने हेतु आदेश दिए गए। एक तरह से कहा जाए नवनियुक्त चेयरमैन श्री कोरी मौके पर उपस्थित नहीं होते तो अंतरर्राष्ट्रीय हर्बल मेले की उपयोगिता तथा सकारात्मक खबरें तो कम ही मिलती बल्कि इसके विपरीत बदनामी का ठीकरा पूरी दुनिया में फूटता ज्ञात हो कि आयोजन मंडल ने अंतर्रराष्ट्रीय स्तर पर अपनी ख्याती बनाने हेतु भारत के अन्य राज्य ही नहीं कई विदेशी मेहमानों को भी इस आयोजन में आमंत्रित किया है। इसके लिए हिन्दी की कुर्बानी भी दी गई है और अधिकांश प्रचार सामग्री अंग्रेजी में भी छपवाई गई है। पांच दिवसीय मेले में दो दिन व्यतीत हो चुके हैं। एक दिन उद्घाटन और भाषण में निकल गया, दूसरा दिन वैद्यों को डराने, धमकाने, भगाने और फिर पुचकारने में निकल गया, अब तीन दिनों में क्या होगा यह भी मध्यप्रदेश लघुवनोपज संघ की रणनीति पर निर्भर है कि उन्हें अपने परंपरागत कर्मचारी द्वय के द्वारा अपनी छवि धूमिल कराना है अथवा इस संबंध में कोई सकारात्मक परिणाम मूलक जनहित में राज्य सरकार की भलाई के लिए निर्णय लेकर कुछ कार्रवाई करना है अथवा फिर कोई नया बखेड़ा खड़ा करके निरंतर अपवाद को बनाए रखना है।


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