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उपचुनाव नतीजों से ढपोरशंखी छलनी टोपी छाप ,शिवराज सिंह चौहान के मुगालते दूर


        उपचुनाव नतीजों से ढपोरशंखी छलनी टोपी छाप            

         शिवराज सिंह चौहान के मुगालते दूर

भोपाल। (पं.एस.के.भारद्वाज)प्रदेश में एक लोकसभा तथा एक विधानसभा उपचुनाव परिणाम ने भाजपा खासकर शिवराज सिंह चौहान के मुगालते को चकनाचूर करते हुए स्पष्ट चेता दिया है कि प्रदेश आपकी बापौती नहीं है जो इसे आप अपनी मनमर्जी से चलायेंगे। जीरो टॉरलेंस भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का बढ़-चढ़कर दावा करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस कार्यकाल में भ्रष्टाचार के ताण्डव से आम जनता कराह रही है। बगैर रिश्वत के आम जनता का कोई काम नहीं हो रहा है। भाजपा के अनुशांगिक संगठनों ने चंदे उगाहने के नये-नये तरीके ईजाद कर लिये है जिससे अधिकारी व व्यापारी वर्ग भी काफी नाराज. दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री भाषण पर भाषण, घोषणाएँ दर घोषणाएँ करने से बाज नहीं आ रहे है प्रदेश पर लाखों करोड़ रुपये का कर्ज लद गया है भला इस सबकी कीमत कौन चुकायेगा? किसी न किसी रूप में जनता को भुगतान होंगे। मुख्यमंत्री ढपोरशंखी बकवास सुन-सुनकर जनता तंग आ चुकी है। महंगाई, भ्रष्टाचार, अपराध दिन दुगनी रात चौगुनी की तर्ज पर बढ़ रहे है इस तरफ मुख्यमंत्री का ध्यान बिल्कुल नही है सिर्फ  झूठे आश्वासन वायदे के सहारे अपनी कुर्सी सलामत रखने को आतुर प्रतीत होते हैं। जन सरोकार से कोई लेना देना नहीं है आखिर उनके झूठे आश्वासन, वायदों पर जनता जनार्दन कब तक भरोसा करती।       जनता जनार्दन को अपनी बात कहने को मौका इस उपचुनाव ने दिया और उसने दिखा दिया कि असली ताकत मुख्यमंत्री के पास नहीं जनता के पास होती है। रतलाम-झाबुआ संसदीय चुनाव में वहाँ के मतदाताओं ने भाजपा सरकार की नीतियों को एक तरह से खारिज करते हुए कांग्रेस पर पुन: भरोसा जता यह साबित कर दिया कि यहां कि जनता तिकड़म नहीं विकास चाहती है। जो मतदाता डेढ़ साल पूर्व भाजपा प्रत्यासियों को सर आंखों बैठाया था उनका भ्रम इतनी जल्दी टूट जायेगा इसकी कल्पना भी नहीं थी। भाजपा संगठन तथा पूरी सरकार के साथ ही पूरा प्रशासन एड़ी चोटी का जोर लगाकर भी भाजपा प्रत्याशी की हार को नहीं टाल सका। सारे टोने-टोटके, धर्म-कर्म, जाति-सम्प्रदाय का घाल-मेल करने के बावजूद भाजपा की शर्मनाक हार के लिये सिर्फ और सिर्फ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जिम्मेदारी लेनी चाहिए,क्योंकि प्रत्याशी चयन से लेकर प्रचार -प्रसार,केम्पैन,मतदाताओं को लोभन-प्रलोभन से लेकर प्रशासनिक जमावट उन्ही की थी। अपराधिक पृष्ठ भूमि के भाजपा पदाधिकारियों की वजह भी एक कारण माना जा सकता झाबुआ भाजपा अध्यक्ष अपराधिक मामले में फरार चल रहा  है ,पर जनता की नजर में तो वह अपराधी है सरकारी संरक्षण भले ही उसे आजाद किये हुए है। दूसरी तरफ पेटलावद विस्फोट काण्ड के आरोपी को अब तक न पकड़े जाने से भी मतदाताओं में नाराजगी थी। जहां तक देवास विधानसभा उपचुनाव परिणाम की बात है यहां भले ही भाजपा प्रत्याशी विजयी हुआ है पर गत विधानसभा चुनाव की अपेक्षा जीत का अंतर काफी कम हो गया है। यहां 20,000 मतों की कमी स्पष्ट तौर पर हुई है। भाजपा सरकार एवं संगठन इसे किस रूप में परिभाषित करता है यह तो वही गाने पर राजनैतिक पंडितों का साफ मानना है कि भाजपा के दिन लदने वाले आ रहे है। आम जनता पर नित नये बोझ डालकर कभी सेस तो कभी वेट तो कभी उपकार के नाम पर जनता को बेवकूफ बनाकर आखिर कितने दिन सरकार चलेगी? एक राजनीतिक चिंतक के अनुसार भाजपा के कथनी-करनी अंतर अब मतदाताओं के समक्ष में आ गया है और भाजपा की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। भाजपा के पास अब भी काफी वक्त है ढपोरशंखी घोषणायों के बजाय जनता के सुख सुविधाओं तथा विकास पर फोकस कर जनता का विश्वास हासिल कर सकती है।


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