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उपचुनाव में: भाजपा पदाधिकारियों के आपराधिक रिकार्ड और भ्रष्टपति मुख्यमंत्री की झूठी घोषणाओं से पार्टी की किरकिरी !


    उपचुनाव में: भाजपा पदाधिकारियों के आपराधिक रिकार्ड    

और भ्रष्टपति मुख्यमंत्री की झूठी घोषणाओं से पार्टी की किरकिरी !

भोपाल। (पं.एस.के.भारद्वाज)प्रदेश में सम्पन्न होने जा रहे रतलाम झाबुआ संसदीय क्षेत्र एवं देवास विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की मुश्किले कम होने की बजाय बढ़ती चली जा रही हैं। आपराधिक रिकार्ड वाले पदाधिकारियों के भरमार के कारण चुनावी क्षेत्रों में भाजपा की हालत पतली दिखाई दे रही है। झाबुआ जिला भाजपा अध्यक्ष शैलेश दुबे पुलिस रिकार्ड में वर्षांे से फरार चल रहे हैं। वहीं उसी संसदीय क्षेत्र के बारुद विस्फोट कांड का आरोपी राजेन्द्र कासवा जो कि भाजपा का कार्यकत्र्ता ही नहीं बल्कि कई मंत्रियों का राजदार भी है ,वह भी पुलिस रिकार्ड में फरार है तथा उस पर 5 लाख रुपये का इनाम भी घोषित है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की यह घोषणा बेअसर साबित हुई कि आरोपी को बक्सा नही जायेगा और आरोपी कही भी छुपा हो एक सप्ताह के भीतर उसे ढूँढ निकाला जायेगा।यहां यह भी बता दें कि पुलिस अधीक्ष भी स्वयं एक महिला भाजपा  विधायक के पतिदेव है। तो कानून के पालन की तो बात करना ही बेमानी है। वैसे भी इस भ्रष्टपति मुख्यमंत्री को घोषणा करने व आम जनता को मूर्ख बनाने में महारत हासिल है। यही सब कुछ करते हुए अपनी कुर्सी को बचाये हुए हैं। भाजपा की मुश्किलों का अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि रतलाम झाबुआ संसदीय क्षेत्र में प्रदेश के कोने-कोने से नेताओं कार्यकत्र्ताओं और पदाधिकारियों को वहां जुटा दिया है और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं भी आधा सैकड़ा से भी अधिक चुनावी सभाओं को संबोधित करने पर मजबूर हो गये। इस उपचुनाव को मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा है। यदि यहां भाजपा चुनाव हारती है तो शिवराज की भी मुश्किले बढ़ सकती है।         

    देवास विधानसभा उपचुनाव में भी भाजपा प्रत्याशी गायत्री राजे पवार के सुपुत्र विक्रम पवार की आपराधिक पृष्ठ भूमि तथा राज-रजवाड़े घराने से आम कार्यकत्र्ताओं की बेरुखी से पार्टी चिंतित है। बाहरी कार्यकत्र्ताओं की फौज के साथ नेताओं संगठन पदाधिकारियों की फौज अभी तो पूरे विधानसभा क्षेत्र में मुस्तैद है पर स्थानीय कार्यकत्र्ताओं का अभाव/बेरुखी साफ तौर पर दृष्टि गोचर हो रही है। मतदान के 24 घंटे पूर्व बाहर व्यक्तियों को विधानसभा क्षेत्र से बाहर कर दिया जायेगा तब वहां की स्थिति क्या होगी? हलांकि शासन-प्रशासन सत्तारुढ़ पार्टी के जयकारे लगाता दिखाई पड़ रहा है और वह इसका कितना प्रतिफल सत्ता पक्ष को दिला पायेगा यह तो मतगणना के बाद ही साफ हो सकेगा। जहां तक प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस का सवाल है वह अपने प्रत्याशियों की छवि और उनकी सुव्यवस्थित रणनीति के तहत संगठित रूप से चुनाव अभियान चला रहा है, उसका कार्यकत्र्ता पहली बार पूरी दिलचस्पी एवं तन्मयता से जुटा हुआ है। भाजपाईयों पदाधिकारियों का इस हथियार का प्रयोग कर कांग्रेस आम मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बनाने में कामयाब दिखायी देती है।


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