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तानाशाही,वंशवाद की गिरफ्त में भाजपा कार्यकत्र्ताओं को बरगलाने,और मतदाताओं को गुलाम बनाने की नीति में अव्वल !



            तानाशाही,वंशवाद की गिरफ्त में भाजपा    

 कार्यकत्र्ताओं को बरगलाने,और मतदाताओं को गुलाम बनाने की नीति में अव्वल !

भोपाल। (पं.एस.के.भारद्वाज)प्रदेश की राजनीति में भाजपा, आरएसएस कांग्रेस पार्टी पर परिवारवाद का आरोप लगाकर तीखा हमला करते रहे हैं। वहीं यह पार्टी अब पूरी तरह से परिवारवाद की गिरफ्त में आ चुकी है। प्रदेश के नेताओं के पत्नियों-पुत्रों को पार्टी ने गले लगाने की परंपरा बना ली है और इस परम्परा का तेजी से विस्तार भाजपा में होता जा रहा है। उदाहरण स्वरुप पूर्व मुख्यमंत्री, सुंदरलाल पटवा, कैलाश जोशी, पार्टी के वरिष्ठ नेता कैलाश सारंग, लक्ष्मी नारायण पाण्डे, लक्ष्मण सिंह गौड़ आदि के पुत्रों-पुत्रियों के हाथ इनके विधानसभा क्षेत्रों की कमान है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पार्टी ने राज्य में हो रहे एवं संसदीय तथा एक विधानसभा उपचुनाव में दिवंगत नेताओं के पुत्री एवं पत्नी को उम्मीदवार बनाकर पार्टी के लिये वर्षो से कार्य कर रहे कार्यकर्ताओं में निराशा का भाव पैदा कर दिया है।       

   यही वजह है कि उपचुनाव वाले क्षेत्रों में भाजपा को बाहरी कार्यकर्ताओं की फौज उतारना पड़ रही है। जिसमें संगठन के कत्र्ताधर्ताओं के अलावा पार्टी के दर्जनों सांसदो तथा आधा सैकड़ा विधायकों के साथ ही हजारों की संख्या में बाहरी कार्यकत्र्ताओं को जुटाना पड़ रहा है और महाबली मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की आज दिनांक तक झाबुआ-रतलाम संसदीय क्षेत्र में 58 सभाएं सुनिश्चित की जा चुकी है। आगे क्या कार्यक्रम बनेगा यह भविष्य के गर्भ में है। वही कांग्रेस प्रत्याशी रतलाम झाबुआ संसदीय क्षेत्र में स्वयं के नेटवर्क के आधार पर और कार्यकत्र्ताओं की जमावट जमा कर सत्तारुढ़ पार्टी के सारे-तामझाम एवं लाव-लश्कर पर भारी प्रतीत हो रहे है। महाबली मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के माथे पर चिंता की लकीरे साफ दिखाई देती है। उन्हें अपने स्थानीय कार्यकत्ताओं तनिक भी भरोसा नही है क्योंकि स्वयं भी उन्होंने न तो कार्यकत्र्ताओं के लिये और नही क्षेत्र के विकास कि लिये कोई ठोस पहल की। सिर्फ राजनीतिक शिगुफेबाजी और कार्यकत्र्ताओं को बरगलाने में ही समय लगाया। सारे वायदे आश्वासन जनता के समक्ष झूठे साबित होने के कारण स्थानीय कार्यकत्र्ताओं को मतदाताओं के सामने जाने में हिचक महसूस हो रही है। वही पूरी संसदीय क्षेत्र में ढोंग-ढकोसलों का दौर चल पड़ा है कही दिवाली मिलन का आयोजन हो रहा है तो कही सुंदरकाण्ड पाठ के बहाने मतदाताओं के नजदीक पहुंचने की कोशिश भाजपा के अनुवांशिक संगठनों द्वारा की जा रही है, परन्तु जागरूक मतदाता इनके भ्रम जाल में नहीं आ रहा है। झाबुआ जिले का प्रभार श्रममंत्र अंतर सिंह आर्य के पास है उन्होंने पूरे क्षेत्र में एक ऐसा काकस तैयार किया है जो पूरे जिले में आतंक पैदा कर लूट खसोट में लगा है, जिससे वहां कार्यरत कर्मचारियों, व्यापारियों एवं किसानों में व्याप्त भयंकर नाराजगी चुनाव परिणाम में अपना असर दिखा दें तो कोई अश्चर्य नहीं।         

  देवास विधानसभा उपचुनाव तो और ही रोचक है यहां से पूर्व विधायक मंत्री स्वर्गीय तुकोजी राव पवार की पत्नी गायत्री पवार को भाजपा ने प्रत्याशी बनाकर परिवारवाद को ही बढ़ावा दिया है। राजा-महाराजाओं के वंशजो को साधकर भाजपा चुनावी माहौल के अपने पक्ष में मान कर चल रही है। परन्तु अन्दर खाने स्थिति ठीक-ठीक नहीं कही जा सकती कांग्रेस ने जय प्रकाश शास्त्री को चुनाव मैदान में उतारकर मध्यम वर्ग के मतदाताओं को अपनी तरफ मोडऩे की कोशिश की है जिसमें वह सफल होती दिखाई पड़ रही है। भाजपा प्रत्याशी गायत्री राजे पवार के पुत्र विक्रम पवार पर हत्या का आरोप है वे पुलिस रिकॉर्ड में फरार है। परदे के पीछे चुनाव की पूरी कमान उनके ही हाथ है ऐसी भाजपा के पोस्टर-बैनरों में उनके स्व. पति एवं पुत्र को महिमा मंडित करने से  भी मतदाताओं में खासी नाराजगी देखी जा रही है। जो भाजपा प्रत्याशी को भारी पड़ सकती है।


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