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मुख्यमंत्री और जनसंपर्क मंत्री की जुगलबन्दी से चांदी काट रहे ,एस.के.मिश्रा और मंगला मिश्रा


मुख्यमंत्री और जनसंपर्क मंत्री की जुगलबन्दी से चांदी काट रहे    

            एस.के.मिश्रा और मंगला मिश्रा 

भोपाल। (पं.एस.के.भारद्वाज)प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री राजेन्द्र शुक्ला की पत्रकारों से दूरी जगजाहिर है। श्री शुक्ला जानबूझकर पत्रकारों को नजर अंदाज कर रहे है। विभाग के प्रमुख सचिव एस.के. मिश्रा तथा भ्रष्टों के सरताज अपर संचालक मंगला मिश्रा जो कि पत्रकारों को मिलने वाले लाभ/सुविधाओं को दीमक की तरह चट कर जाता है, के रहमोकरम पर छोड़ दिया है। एक प्रकार से जनसंपर्क संचालनालय एस.के. मिश्रा, मंगला मिश्रा की माफियागिरी अंदाज में चल रहा है। श्री शुक्ला का पीए एस.के. मिश्रा,मंगल मिश्रा की माफियागिरी अदाज में चल रही है। श्री शुक्ल का पी.ए. एस. के. मिश्रा प्रेम जगजाहिर है। श्री शुक्ल के पास कैबिनेट में जब जो विभाग रहा है उसके कत्र्ता धत्र्ता एस.के. मिश्रा ही रहे हे। उल्लेखनीय है कि एस.के. मिश्रा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भी प्रमुख सचिव तथा अतिनजदीकी है। श्री मिश्रा के खिलाफ अनेक आर्थिक एवं अपराधिक संगीन आरोप है इसके बावजूद जीरो टारसेस की बात करने तथा जनता को मूर्ख समझ कर उपदेश देने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, तथा जनसंपर्क, खनिज एवं नवकरणीय उर्जा मंत्री राजेन्द्र शुक्ल के बीच श्री मिश्रा सेतु का काम कर रहे है।          

      रीवा जिले के मूलनिवासी राजेन्द्र शुक्ल की पारिवारिक पृष्ठ भूमि आर्थिक रूप से सम्पन्न मानी जाती है। सरकारी ठेकेदारी उनका पैतृक धंधा है वह शुरू से ही फल फूल रहा है। शुक्ल विशुद्ध रूप से व्यवसायिक हितों को ध्यान में रखकर ही हर कदम उठाते है। पूर्व कांग्रेस के मुख्यमंत्री स्व.अर्जुन सिंह मुख्यमंत्रित्व काल में इनको उनके अति-करीबियों में गिना जाता था और इन्होनें श्री सिंह के संबंधो का भरपूर लाभ अपने व्यवसाय को चमकाने में उठाया। जब श्री सिंह कांग्रेस की नरसिंहराव सरकार से बगावत  कर तिवारी कांगेस का गठन किया और प्रदेश व देश की राजनीति पर उनकी पकड़ थोड़ी ढीली हुई। तो मौका परस्त श्री शुक्ल फौरन भाजपा में चले गये। अवसर वादिता उनके खून में रची बसी है। ठकेदारी के धंधें में ही श्री शुक्ल की कमाई करोड़ों रुपये महीने की है, उन्हें खुद भी पता नहीं होगा कि वे आज कितने अरब की संपत्ति स्वामी है। लिहाजा लंपट मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भला ऐसा भलामानुष कैबिनेट के लिये और कौन मिलता,उन्होंने फौरन राजेन्द्र शुक्ल को बेहद कमाऊ विभाग का प्रभार सौंप कर अवैध उगाही के लिये नौकरशाह एस.के. मिश्रा को चुना। मिश्रा को इस मामले में विशेषज्ञता हासिल है।

  एस.के. मिश्रा ने इस काम को गति देने के लिये जनसंपर्क विभाग में अपर संचालक मंगला मिश्रा को चुना यह वही मंगला मिश्रा है जिसके ऊपर फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी हथियाने का आरोप है। कई पत्रकार संगठन ने मंत्री राजेन्द्र शुक्ला से मंगला मिश्रा के कार्यकलापों की जांच कर कार्यवाही की मांग की है परन्तु मंत्री जी एस.के. मिश्रा और मंगला मिश्रा के खिलाफ कार्यवाही तो दूर कुछ सुनने के पक्ष में भी नहीं है।  कुल मिलाकर इन धूर्त विप्रो की त्रिमूर्ति जिनमें मंत्री राजेन्द्र शुक्ल, नौकरशाह एस.क. मिश्रा, मंगला मिश्रा, खनिजमाफियों को खुला संरक्षण देते हुए जोर-शोर से अवैध वसूली में जुटे 

है। मंत्री राजेन्द्र शुक्ला के विभागों द्वारा की जाने वाली अवैध वसूलियाँ सीधे एस.के. मिश्रा के े माध्यम से शीर्ष तक आसानी से पहुँच जाती है। हद तो तब हो गई जब पत्रकारों के लिये  क्रियान्वित की जाने वाली लाभकारी योजनाएं भी इन गिद्धों की दृष्टि से नही बच सकी इस तिकड़ी ने इन्हें भी दीमक की तरह चट कर लिया। कुछ चाटुकार पत्रकारों को उपकृत कर वाहवाही बटोर भले ही रहे है, पर वास्तविकता यह है कि मीडिया से जुड़ा 80 प्रति तबका इस तिमड़ी से त्रस्त नजर आयेगा। मुख्यमंत्री और मंत्री का संरक्षण प्राप्त नौकरशाह का भला कौन बाल बॉका कर सकता है।

  मंत्री राजेद्र शुक्ल के जनसंपर्क विभाग का आलम यह है कि लूट सके तो लूट की तर्ज पर हर कोई सरकारी धन के बूते हर तरह का ऐशो आराम कर रहा है। अभी हाल ही एक अधिकारी ने एक एन.जी.ओ. की महिला संचालक को काम देने के बहाने एक सुनसान स्थान पर ले गया और उसकी अस्मत से खिलवाड़ करने की कोशिश की शिकायत पर मामला बड़ी मशक्कत के बाद दर्ज तो कर लिया परन्तु मामले को विवेचना के नाम पर कब तक लटकाये रखा जायेगा और कब रफा-दफा कर दिया जायेगा यह कोई जान भी नहीं पायेगा। थाना जहॉगीराबाद भोपाल और सरकारी अपराधिओं के पोषण की सैकड़ों कहानियॉ रिकार्डो में दफन है। अपराधियों का संरक्षण पत्रकारों को मिलने वाली वाहन सुविधा के नाम पर अधिकारियों के बीवी-बच्चे सैर सपाटा करते कहीं भी मिल जायेंगे। अथवा तथाकथित दलालनुमा व्यक्ति विशेष पूरे देश भर में दौड़ लगा रही गाडिय़ों के भुगतान किये गये बिलों से देखा जा सकता है। वहीं डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाने के नाम,नुक्कड़ नाटकों,विशेष प्रसारण,विशेष प्रकाशनों के नाम पर जारी  पर जमकर कूट रचित तरीके से दलाली खाई जा रही है यहां तक जनसंपर्क विभाग द्वारा चालू आलेख सेवा भी विवादों मे बनी रही। इसमें चाटुकर पत्रकारों को तथा जनसंपर्क विभाग के कई सेवा निवृत्त हो चुके अधिकारियों को उपकृत करने का माध्यम बना लिया गया है। प्रदेश में हजारों ऐसे पत्रकार जनसंपर्क संचालनालय द्वारा अधिमान्य मिल जायेंगे, जिनका पत्रकारिता के पेशे से दूर दूर तक वास्ता ही नहीं है यहॉ तक कि ऑटो चालक और कबाड़ी का धन्धा करने वाले,फुटपाथ पर व्यवसाय करने वाले भी अधिमान्य पत्रकार रिश्वत के दम पर बनाये गये है। विज्ञापनों के आवंटन में भारी गड़बड़ झाला किये जाने की शिकायते आ रही है यहां खुलकर कमीशनबाजी का खेल-खेला जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के कई शुभचिंतकों ने इस बात को स्वीकारा कि जनसंपर्क विभाग में बगैर कमीशन कुछ भी नहीं होता। बस आपकी संबंधित से सैटिंग होनी चाहिए। क्या बड़बोले मुख्यमंत्री या विभागीय मंत्री जांच कराने का साहस जुटा पायेंगे अथवा चिटफंड कंपनी की तर्ज पर जनसंपर्क संचालनालय और मध्यप्रदेश माध्यम में बैठी चंडाल चौकड़ी की चाटुकारिता में ही अपना पूरा कार्यकाल गुजारेंगें? और अन्त समय भ्रष्टतंत्र के ये सेवक ,डकारें ले ऊचे-ऊचे मंचों से बोलेंगें भारत माता की जय............।                                                                                             


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