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प्रदेश के उपचुनाव भाजपा-कांग्रेस पराक्रम को मापेंगें

            प्रदेश के उपचुनाव भाजपा-कांग्रेस पराक्रम को मापेंगें 

भोपाल। (पं.एस.के.भारद्वाज)मध्यप्रदेश में झाबुआ-रतलाम संसदीय क्षेत्र तथा देवास विधानसभा उपचुनाव को लेकर प्रदेश की सत्तारुढ़ पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का पराक्रम फिर प्रदेश की जनता को परखने का मौका देगा। झाबुआ-रतलाम संसदीय क्षेत्र जहां कांग्रेस का दबदबा रहा है हालांकि गत लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के चलते भाजपा के दिलीप सिंह भूरिया विजयी हुए थे। उनके निधन के कारण यहां उपचुनाव हो रहा है। भाजपा ने यहां से स्वं. दिलीप सिंह भूरिया की विधायक बेटी निर्मला भूरिया को प्रत्याशी बनाकर सहानुभूति मत बटोरने की चाल चली है वही कांग्रेस ने दिग्गज आदिवासी नेता कान्तिलाल भूरिया को मैदान में उतारा है जो लम्बे समय से इस क्षेत्र की सेवा कभी विधायक और प्रदेश की कबीना में रहकर करते रहे है तो कभी सांसद और केंद्र में मंत्री रहकर इस क्षेत्र की सेवा की है। पूरे संसदीय क्षेत्र में उनकी पकड़ एवं पहचान है। वही भाजपा उम्मीदवार निर्मला भूरिया को आरएसएस और मुख्यमंत्री की जमावट और कलाकारी का सहारा है। वैसे उनके दिवंगत पिता दिलीप सिंह भूरिया कांग्रेसी पृष्ठभूमि के थे और कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर भी वे उस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। राजनीतिक उठा पटक के चलते उन्हें कांग्रेस को अलविदा कह भाजपा का दामन थामना पड़ा था।       यह उपचुनाव भाजपा के लिये नाक की बात बन चुकी है। अभी कुछ समय पहले ही पेटलावद ब्लास्ट कांड में कई लोग अपनी जान गवां चुके है। उसका कत्र्ताधत्र्ता प्रदेश कबीना मंत्री लाल सिंह आर्य का करीबी बताया जाता है। तथा भाजपा प्रत्याशी निर्मला भूरिया नजदीकी तथा इन्ही की विधान सभा क्षेत्र का निवासी भी है। हादसे के इतनों दिनों बाद भी आरोपी का पकड़ में न आना सरकार की सरपरस्ती माना जा रहा है। राजनीतिक प्रेक्षक इसे भाजपा के लिये घाटे का सौदा माना जा रहा है। वहीं रतलाम जिला पंचायत के उपाध्यक्ष निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के हको के लिये सरकार को बगावती तेवर दिखाकर भाजपा की मुश्किलों को बढ़ा दी है। इन सबसे भाजपा कैसे निपटती है यह कुछ समय बाद ही साफ हो सकेगा। जहां तक देवास विधानसभा उपचुनाव का सवाल है यहां भाजपा को अधिक मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। हालांकि यहां भी भाजपा का सत्तारुढ़ होना उसके पक्ष में जा सकता है।


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