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अग्रि में दफन होती भ्रष्टाचार की निशानियां

                     अग्रि में दफन होती भ्रष्टाचार की निशानियां 

भोपाल। (पं.एस.के.भारद्वाज) मध्यप्रदेश के शासकीय कार्यालयों में आये दिन शार्ट सर्किट से आग लगने की घटनाये तेजी से घट रही है, खासतौर से जहां भारत सरकार का धन प्रदेश के विकास के लिए आया है। विधान सभा चुनाव के कुछ दिन पूर्व एवं ग्रामीण विकास विभाग के मुख्यालय जहां पर महत्वपूर्ण फाइलें जल कर नष्ट हो गई ये वह फाइलें थी जिनमें भारत सरकार द्वारा दिये गये बजट से संबंधित लेखा-जोखा संधारित होना बताया जा रही है। इस संबंध में मुख्यमंत्री की चुप्पी विभागीय मंत्री की खामोशी तथा संबंधित प्रमुख सचिव की गैर जिम्मेदाराना कार्यवाही से प्रबुद्धजन आश्चर्यचकित है। आखिर ऐसे कौन से कारण है कि आये दिन सिर्फ महत्वपूर्ण विभागों में सिर्फ रिकॉर्ड रूम में ही आग लगती है। क्या भ्रष्टाचार के सबूत नष्ट करने के लिये इस तरह के हथकंडे जान-बूझकर अपनाये जा रहे है।     

       अभी हाल ही में कृषि विभाग के मुख्यालय मे रिकॉर्ड रूम में आग लगने की घटना हुई है। इसमें भी भारत सरकार द्वारा दिये गये 2500 करोड़ के बजट का घालमेल बेतश्तीव तरीके से किया गया है। प्रदेश के जिलों के लिये बजट आवंटन में आये कमीशन खोरी की शिकायत मिली है, कहां तो यहां तक जा रहा है कि 25-40 प्रतिशत कमीशन लेकर जिलों को बजट आवंटित किया जा रहा है। मुख्यालय में कुंडली जमायें बैठी चंडाल चौकड़ी को मंत्री का खुला संरक्षण मिला हुआ है। कृषि विभाग द्वारा प्रदेश के किसानों के लिये आवंटित धन राशि को भारी पैमाने पर भ्रष्टाचार की बहती गंगा मे गोते लगाने में महारत हासिल किये हुए है। भ्रष्टाचार को छुपाने के लिये सुनियोजित तरीके से महत्वपूर्ण फाइलों को जानबूझकर नष्ट कराने हेतु सरल तरीका निकाला है। कुल मिलाकर भ्रष्टाचार के सबूत नष्ट करने हेतु जान-बूझकर इस काम को अंजाम दिया जा रहा है। यहां यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि इस विभागीय प्रमुखों एवं मंत्रियों की मिलीभगत को नकारा नहीं जा सकता।इस मामले में सत्तापक्ष एवं विपक्ष का मूकदर्शन बना रहना कई संदेहों को जन्म देता है। महज खानापूर्ति कर ऐसी घटनाओं को शार्ट सर्किट से होना बताकर अपने कत्र्तव्यों की इतिश्री कर ली जाती है जबकि भ्रष्टाचार की चांसनी में डूबे भ्रष्टाचार के अलंबरदार मुस्कराते हुए मूँछें पर तांव देकर व्यवस्था को मुंह चिढ़ाते खुलेआम घूमते दिखाई दे जाते है। कृषि विभाग का जो मामला सामने आया है उसमें जिम्मेंदार अधिकारियों में से एक महा भ्रष्ट महत्वपूर्ण अधिकारी गत माह की आखरी तारीख को रिटायर हो गया है, सूत्रों के मुताबिक यह अग्रिकांड उन्ही की दिमाग की उपज हो सकती है उन्होंने अपने परस्थ रहते हुए महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जिसमें अरबों रुपये की योजनाएँ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा चुके है इसी कारण से उन्हें नष्ट कराने में उनके योगदान से इंकार नहीं किया जा सकता इसमें उनके साथ भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे कुछ उनके प्रमुख सहयोगियों की भी भूमिका को नजर अंदाज नही किया जा सकता। आग के हवाले हुई महत्वपूर्ण फाइलों में ऐसा क्याराज़ छुपा था कि जो यह अब राज़ ही रह जायेगा। एक विभागीय अधिकारी ने इस संबंध में 
मुंह खोलना चाहा था, परन्तु मुख्यमंत्री निवास पर बुलाकर उन्हें ऐसी घुट्टी पिलाई गई कि वह अधिकारी अब चुप रहने में ही अपनी भलाई समझता है। आखिर ऐसा क्या था कि मुख्यमंत्री सचिवालय को हस्तक्षेप कर मामले को रफा-दफा कराने के लिये आगे आना पड़ा। किसानों के नाम पर घडिय़ाली आंसू बहाने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह आखिर इस मामले में मौन क्यों हैं। आखिर माजरा क्या है जनता को बताते क्यूॅ नही? 


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