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धूर्त मुख्यमंत्री,भ्रष्ट सरकार

                                          धूर्त मुख्यमंत्री भ्रष्ट सरकार 

भोपाल। (पं.एस.के.भारद्वाज)मध्यप्रदेश में भाजपा शासन के मुखिया जालीदार टोपी पहनने वाले धूर्त मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की भ्रष्ट सरकार से अति वृष्टि तथा अल्प वृष्टि से हुई राज्य के किसानों के फसल की छति को लेकर घडिय़ाली आँसू बहा रही है। जबकि जमींनी हकीकत से उसका कोई वास्ता ही नहीं है। यह फसल तो चौपट हो ही चुकी है अब आने वाली फसल की तैयारी किसानों को करनी है उसकी तैयारी के लिये किसानों के पास कुछ बचा नहीं है चार साल से लगातार किसानों की फसले बरबाद हो रही है,और किसान कर्ज में गले तक डूब चुका है। मुख्यमंत्री जी किसानों को गुमराह करने का हर वह जतन करने में मशमुल है जिसमें वह भ्रमित रहे और उनकी सरकार का गुणगान करते रहें है। जीरो प्रतिशत ब्याज पर किसानों को सोसाइटियों एवं बैंकों के माध्यम से किसानों को कर्ज देने का वायदा कर तथा समय पर सोसाइटियों और बैंकों के ब्याज का पैसा न देकर सोसाइटियों और बैंकों को भी कंगाली की राह पर ला खड़ा कर दिया है। पैसे के अभाव में ये संस्थायें चाहते हुए भी किसानों को कर्ज नहीं दे पा रही है। ऐसे में किसानों पास कोई रास्ता ही नहीं बचा खाद, बीज, पानी, बिजली की कमी के चलते किसान परेशान है, यहां तक कि कई किसानों ने इस बदतर स्थिति से बेहतर अपनी जान देकर धूर्त मुख्यमंत्री और भ्रष्ट सरकार के मुंह पर करारा तमाचा मारा है।

          जिस तरह से अखाड़े में पटखनी खाया पहलवान झाड़ पोछकर खड़ा हो जाता है और कहता है कि एक दांव और फिर पटखनी खाता है उसी तर्ज पर यह सरकार सारी बेशर्मी की हदें पार करते हुए किसानों के साथ बार-बार छलावा कर रही है। किसानों की मृत्यु पर उनके परिवारजनों के आंसू पोंछने की बजाय इन मौतों को दूसरे रंग में रंगने में मशगुल है किसी की मौत को बीमारी तथा किसी की पारिवारिक वजह बताकर अपने दामन उजला रखने का प्रयास करती दिखायी देती है। जीरो टालरेंस की बात करने वाले धूर्त मुख्यमंत्री की भ्रष्ट सरकार का मैदानी अमला महाभ्रष्ट हो चुका है। किसानों की फसलों के छति आंकलन में जुटा मैदानी अमला लुटे-पिटे किसानों कि दर्द को और बढ़ा दिया है। सर्वे के दौरान किसानों की जेब हल्की करने से यह अमला बाज नहीं है, अधिक कम नुकसान का भय किसानों को दिखाकर जेबें भर रहे हैं। इस प्रदेश की जनता को याद होगा यह नौटंकीबाज धूर्त मुख्यमंत्री केन्द्र में कांग्रेस शासन के कार्यकाल के दौरान बार-बार पैसों की मांग को लेकर दल-बल सहित धरना देने पहुँच जाता था और अनर्गल प्रलाप करने नहीं थकता था, अब जब प्रदेश में सूखे कारण इतना बड़ा संकट सामने खड़ा है और किसान आत्महत्यायें करने को मजबूर है, तब इसकी तथा इस भ्रष्ट सरकार की बोलती बंद क्यों है। प्रदेश में संचालित कई केन्द्र पोषित योजनाओं में मोदी सरकार के भारी भरकम कटौती कर दी है तथा किसानों के राहत वास्ते फंूटी कौड़ी भी उपलब्ध नहीं करायी फिर भी मुख्यमंत्री की चुप्पी प्रदेशवासियों को हैरान करने वाली है!                  

    बात बात में किसान पुत्र होने का दंभ भरनेवाला यह नौटंकीबाज प्रदेश की जनता से खिलवाड़ करते हुए धन कुबेरों की गिनती में आ चुका है। जनता जनार्दन को कर्ज के तले ऐसे दबाये दे रहा है कि जिससे कई पीढिय़ां भी नहीं उबर सकेगी। सिर्फ  कर्ज लेकर सरकार चलाना इस धूर्त से कोई पूछे आखिर इस कर्ज का बोझ किसके सर पड़ेगा । महंगाई सातवें आसमान पर 
है ऐसे में आम आदमी का जीना दूभर हो गया है। सूखे के हालात इतने विकराल है कि प्रदेश के क ई अंचलों में अक्टूबर-नवंबर में ही नलकूपों में पानी उगलना बंद कर दिया है पीने के पानी के लिये कई क्षेत्रों में तो कोहराम मचा है पर भ्रष्ट सरकार के नुमांइदों का ध्यान उस तरफ नहीं है वह तो टकटकी लगाये बैठे है कि कब किसानों के नाम पर लिये जाने वाला कर्ज आये और वे बहती गंगा में हाथ धोये।     

       किसानों को राहत देने के नाम पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया, जिसमें 8407 करोड़ का राहत बजट मंजूर किया गया। प्रदेश की जनता ने बड़ी उम्मीदों के साथ भाजपा को बहुमत के साथ सत्ता सौंपी थी। बीजेपी के नाम पर कैसे भी उम्मीदवार को उतारा गया हो जनता ने उत्साह के साथ उसका समर्थन किया और विजयी बनाया। आश्चर्य की बात तो यह है कि प्रदेश में 70 प्रतिशत से भी अधिक जुड़े लोग खेती- किसानों के काम में लगे है। उनकी पीड़ा को किसी भी विधायक ने सदन में व्यक्त नही किया। विधानसभा के अंदर ऐसा वातावरण निर्मित किया गया है कि कोई भी सत्तारूढ़ी दल का विधायक मुंह ही न खोल सके। विधायकों के बेचाएगी का क्या कारण है यह तो वेद ही जानें या  धूर्त मुख्यमंत्री ही जाने पर यह विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर किसानों को क्या बतायेंगे कि हमने आपके लिये क्या किया है। इस धूर्त मुख्यमंत्री ने सत्ता का पूरी तरह केन्द्रीयकरण कर रखा है तथा जन प्रतिनिधियों को भी कोई विशेष तबज्जेंा नही मिल रही। सिर्फ भ्रष्ट अफसरों ने इसे घेर रखा है और प्रदेश को कर्ज में डुवो कर बंटाढार करने में कोई कसर बाकी नहीं रख रहें है। घपले-घोटालों में आकंठ डूबी धूर्त मुख्यमंत्री की भ्रष्ट सरकार से इससे अधिक उम्मीद भी क्या की जा सकती है!        


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