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विश्व हिन्दी सम्मेलन -हिन्दी पीछे मोदी आगे

 विश्व हिन्दी सम्मेलन    -हिन्दी पीछे मोदी आगे

भोपाल/ (पं.एस.के भारद्वाज )कल से शुरू हो रहे तीन दिवसीय विश्व हिन्दी सम्मेलन की तैयारियॉ लगभग पूर्ण हो चुकी है। हिन्दी भाषी राष्ट्र के लिए यह गौरव की बात है उससे भी बढ़कर म.प्र. के लिए अति गौरव की बात है। प्रदेश को विश्व के हिन्दी प्रेमीयों की मेजवानी का सौभाग्य प्राप्त होना प्रदेश के नागरिकों को गौरवान्वित करने वाला है। सत्र की शुरूआत देश के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे श्री मोदी के लिए राजधानी को दुल्हन की तरह सजाया संवारा गया है शासन,प्रशासन प्रधान मंत्री के स्वागत सत्कार की दिशा में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखना चाहता है। पिछले दो माह से सारा सरकारी अमला तैयारी में जुटा है,आमजन के सभी काम बन्द है कहीं भी जाओ एक ही जवाब सुनने को मिल रहा है साहब मीटिंग में है। मोदी जी आने वाले है। मुख्य सचिव से लेकर डिप्टी कलेक्टर स्तर तक के अधिकारी मीटिग ही मीटिग खेल रहे है। जनता जनार्दन की सुधबुध भूल पूरा अमला यात्रा को सफल बनाने में जुटा है। मोदी जी के आगमन ने विश्वहिन्दी सम्मेलन को और हिन्दी प्रेमियों को उपेक्षित कर दिया है। पूरे म.प्र. के वायुमंडल में मोंदी ही मोदी छाये हुए है। राजधानी इनदिनों मोदीमय है हिन्दी प्रेमी एक वरिष्ठ साहित्यकार जोकि पड़ोसी राज्य उ.प्र. से है हिन्दी के वारे में अधिक से अधिक जानने की उनमें जिज्ञासा थी । उन्होंने नियमानुसार विश्व हिन्दी सम्मेलन में भाग लेने के लिए वाकायदा पंजीयन कराकर निर्धारित मापदण्ड पूरे कर आवेदन किया चूंकि सम्मेलन में मोदी जी पधार रहे है अत: पुलिस प्रशासन कुछ अधिक ही सतर्क नजर आया, और साहित्यकार के निवास पर 6-7 बार पुलिस वाले उनके निवास पर जा धमके और भोपाल से लेकर दिल्ली तक के टेलीफोन से जानकारी लेने के लिए अनेकों वार काल किये जाने लगे। इससे अपमानित महसूस कर साहित्यकार महोदय ने इस आयोजन में सम्म्ििल्लत होने से तोबा करते हुए क्षमा मांगते फिर रहे है। यह घटनाक्रम ऐसे घटित हुआ मानों किसी आतंकवादी मुखिया की खोजबीन हो रही हो। आखिर इस प्रकार की जॉच पड़ताल का क्या औचित्य है। इन वेचारे साहित्यकार महोदय का कसूर इतना था कि जनाब अल्प संख्यक वर्ग से आते है। इसप्रकार शासन प्रशासन की बद इन्तजामी और ना समझी की वजह से कई मूर्धन्यहिन्दी प्रेमी इस आयोजन से कटते नजऱ आ रहे है। यदि शासन प्रशासन समझादारी से कार्य करता तो ऐसी स्थिति कदापि निर्मित नही होती। किसी भी व्यक्ति के संबंध में जानकारी करने के और भरी कई सुगम और सुलभ तरीके हो सकते थे। और संबंधित व्यक्ति के संबंध में जानकारी जुटा सकते थे। परन्तु ऐसा ना करते हुए सीधे संबंधितों के दरवाते खटखटा दिये गये और भय का वातावरण र्नििमत कर दिया गया। इससे अपमानित महसूस कर कई हिन्दी प्रेमियों साहित्यकारों ने कार्यक्रम मे भाग लेने से तौबा करने में ही भलाई समझी। यह कार्यक्रम सरकारी तामझाम वाले साहित्यकारों तथा पत्रकारों से अपने नाम से आलेख लिखवाने वाले सरकारी हिन्दी प्रेमियों का वर्चस्व वाला बन गया है। इसमें भाग लेने के लिए जो माप दण्ड तय किया गया है उसमें वास्तविक हिन्दी प्रेमी और साहित्यकारों को प्रवेश मिलना ही बहुत कठिन है। यदि आज के समय में प्रदेश के स्व.मूर्धन्य साहित्यकार मुंशी प्रेम चन्द ,हरीशंकर परसाई ,सुभद्रा कुमार चौहान,हुकुमपाल सिंह विकल जैसे महान साहित्यकारों यदि जीवित होते तो उन्हें भी इस जटिल प्रक्रिया और भारी भरकम प्रवेश शुल्क के कारण कार्य क्रम में प्रवेश मिलपाना संभव नही हो पाता ?कुल मिला कर इस कार्यक्रम में हिन्दी पीछे छूटती नजर आ रही है और मोदी जी आगे निकल रहे है।


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