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शिवराज का व्यापम संकट , विधायकों की उपेक्षा पड़ रही भारी !

शिवराज का व्यापम संकट           

विधायकों की उपेक्षा पड़ रही भारी !

भोपाल। (पं.एस.के.भारद्वाज)प्रदेश के वातावरण में इन दिनों व्यापम महाघोटाला सुर्खियां बटोर रहा है। चाहे सत्तारुढ़ विधायक दल की बैठक हो या कि विपक्ष विधायक दल की बैठक। राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापम व्यापक सुर्खियां बटोर रहा है। सड़क से लेकर सदन तक व्यापम ही व्यापम छाया हुआ है। इसका व्यापक प्रसार-प्रचार सत्तारुढ़ पार्टी द्वारा ही किया जा रहा है। जाने अनजाने में सत्तारुढ़ पार्टी खासतौर से प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा ही किया जा रहा है। विधायक दल की बैठक में जिस तरह व्यापम पर बचाव के टिप दिए, काबिले गौर है। भारी भरकम विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री के साथ एक भी विधायक खड़ा हुआ दिखाई नहीं दिया। 10 साल तक विधायकों की उपेक्षा करने वाले मुख्यमंत्री को आखिर विधायकों की मदद की आवश्यकता क्यों पड़ी। विधायक भी चुप्पी साधे सारा तमाशा देख रहे हैं। पार्टी अनुशासन के चाबुक के डर से सत्तारुढ़ दल के विधायक व्यापम मामले में बोलने से बच रहे हैं पर अंदरखाने वे खुश हैं। कई विधायकों ने नाम न छापने की शर्त पर इस प्रतिनिधि से कहा कि इतने व्यापक पैमाने पर व्यावसायिक परीक्षा मंडल में गड़बडिय़ां होती रही है। और मुख्यमंत्री को पता न हो यह संभव ही नही है। व्यापम के काले कारनामे से प्रदेश की राष्ट्रीय ही नहीं अंतराष्ट्रीय स्तर पर छवि प्रभावित हुई है। ऐसा सत्तारुढ़ भाजपा के कई वरिष्ठ सांसदों विधायकों का भी मानना है। इसका ताजा उदाहरण पूर्व मुख्यमंत्री सांसद शांता कुमार की लिखी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को चिठ्ठी है। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस मामले में जो भी दांव चल रहे हैं उन पर तथा पार्टी पर उल्टा पड़ रहा है, विपक्ष स्तीफे की मांग पर अड़ा है। इससे बौखलाए मुख्यमंत्री व्यापम को लेकर खुद अनर्गल प्रलाप करने लगे हैं हर कहीं व्यापम का राग अलापने लगते हैं, विधायकों के सामने गिड़गिड़ाने लगते हैं कि जनता को व्यापम का सच बताए इसके लिए उन्होनें बकायदा एक पुस्तक छपवाई और उसे विधायक दल की बैठक में विधायकों को वितरित कराया। आखिर व्यापम में ऐसा क्या है जिसने मुख्यमंत्री को परेशान कर रखा है। खबर यह भी है कि इस मामले में भाजपा आला कमान का रूख भी सख्त हो गया है। दिल्ली दरवार में भी उन्हें हर नेता के समक्ष सफाई पेश करना पड़ रही है। अभी दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री को दिल्ली दरवार में हाजिर होना था संयोग से उनका विमान उड़ान नहीं भर सका लिहाजा मुख्यमंत्री जी नियमित उड़ान से दिल्ली गए मामले की गंभीरता को स्पस्ट करता है। डेमेज कंट्रोल में जुटाए गए मंत्रियों के मार्फत भी पार्टी के  वरिष्ठ पार्टी नेताओं को संतुष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है।


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