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आपस में सहयोगी एक जुट रहो तभी बचोगे नहीं तो.......-शाह,चौहान

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भोपाल। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एवं व्यापम घोटाले की जांच हेतु सीबीाआई टीम के प्रभारी श्री आर.पी.अग्रवाल आई.पी.एस. का भोपाल प्रवास एक ही दिन होना कुछ अजब संयोग ही कहा जाएगा। अमित शााह और सीबीआई केे श्री आर.पी.अग्रवाल आई.पी.एस. में पूर्व में छत्तीस का आंकड़ा रहा है। श्री अमित शाह को श्री अग्रवाल सलाखों के पीछे भेज चुके है। हालांकि बाद में विशेष जांच में श्री अमित शाह को क्लीन चिट मिल गई थी । वर्तमान में हालात,स्थिति..............है! अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए एकजुटता का पाठ पढ़ाया शायद उनका इशारा-गुजरात में हुए गोधरा काण्ड के बाद बने हालात से गुजरात भाजपा ने जिस एकजुटता का परिचय देते हुए पूरे मामले को रफा-दफा करने में सफलता पाई थी, शायद उस ओर उनका इशारा था कि  घर के बच्चे से यदि गलती हो जाती है तो उसे न तो घर से निकाला जाता है और न ही उसका ढिंढोरा ही पीटा जाता है। यहां गलती का आशय शायद प्रदेश में हो रहे भ्रष्टाचार गबन और संगठित हत्याओं की ओर था! उन्होंनेे असंन्तुष्ट पदाधिकारी नेताओं, कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संकेत दे दिए कि आप एक दूसरे के खिलाफ अनर्गल आरोप प्रत्यारोप न करते हुए एकजुटता के साथ रहें।इसी कड़ी में व्यापम घोटाले को लेकर भाजपा के प्रदेशअध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान भी कुछ टी.वी चैनलों पर मुखर हो गये। उनकी नजर में यह कोई भाजपा की सरकार के कार्यकाल का घोटाला ही नहीं है। श्री सिंह इसे नकारते हुए यह भी बोल गए कि मुख्यमंत्री हमारे नेता हैं और वे गंगाजल की तरह पवित्र हैं। वे तो गंदगी साफ कर रहे हैं। बदबू आने लगी थी व्यवस्था में सड़ान्ध मार रही थी। श्री चौहान यह नहीं बता सके कि गंदगी और बदबू फैलाने वाले कौन है क्या उनका भी सफाया करेंगे या नहीं?  इस सडांध में आप वर्षो से कैसे बैठ तमाशा देखते  रहे। गुजरात के गोधरा कांड की तर्ज पर यह भविष्य की जांच की लकीरे खींच रहे है यदि उसी तर्ज पर व्यापम महाघोटाले की जांच की गई तो इस घोटाले से असहमति जताने वाले कई प्रभावशाली नौकरशाहों को जेल जाना पड़ सकता है जैसा कि गुजरात के कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को ऊल-जुलूल आरोपों के तहत जेल भिजवा दिया गया था। शाह की कार्यशैली तो गुजरात कांड के समय देखने को मिली थी लगता है अब प्रदेश वासियों को भी उनकी यह अनुभवी  कार्यशैली देखने को मिल सकती है। 


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