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मंत्री है या माफिया सेवक

मंत्री है या माफिया सेवक

 भोपाल।(पं.एस.के. भारद्वाज)शिवराज सरकार में कबीना मंत्री बनाए गए श्री राजेन्द्र शुक्ल मंत्री पद का दायित्व निभाने में तो सक्षम नहीं हो सके, बल्कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज के लिए अच्छे लाइजेनर साबित हो रहे हैं। शायद इसी मकसद से उन्हें महत्वपूर्ण विभाग जनसंपर्क एवं खनिज संसाधन,ऊर्जा जैसे की जिम्मेदारी सौंपी है। श्री शुक्ल उस बघेलखण्ड का नेतृत्व करते हैं। जहां से कभी पूर्व में स्वर्गीय श्री अर्जुन सिंह, श्रीनिवास तिवारी, स्वर्गीय पं. जमुना प्रसाद शास्त्री जैसे राज्य के प्रभावशाली नेता प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इन नेताओं की तूती देश की राजधानी दिल्ली तक बोलती थी। तथा क्षेत्र के हर नागरिक के जवान पर इनके नाम सम्मान से लिए जाते थे। वहीं आज बघेल खण्डी जनता अपने आप को असुरक्षित मानती है और कोई भी नागरिक उनका नाम लेना भी पसंन्द नही कर रहा है सिवाय भाजपा चुनिन्दा कार्यकर्ताओं के । मध्यप्रदेश में खनन माफिया शासन तथा प्रशासन पर हावी हैं। इनके हौंसले इतने बुलंद हो गए हैं कि यदि इसके काम में कोई शासकीय अधिकारी,कर्मचारी अथवा मीडिया ने मीन-मेख निकालने का प्रयास किया तो उन्हें अपनी जान की कुर्बानी देनी पड़ती है। प्रदेश में अब तक अनेक पुलिस वाले तथा खनिज विभााग के अधिकारी कर्मचारी मारे जा चुके हैं। लगभग आधा दर्जन पत्रकार भी खनिज माफिया कारोबारियों के हाथोंं अपनी जान गंवा चुके हैं। रसूखदार नेताओं ने मध्यप्रदेश को कई हिस्सों में बांट लिए हैं। किसी क्षेत्र का नेतृत्व कोई रसूखदार कर रहा है तो किसी क्षेत्र का दूसरा रसूखदार। अधिकारियों, कर्मचारियों की क्या विसात की रसूखदारों की तरफ उंगली भी उठा सके। विभाग का जिम्मा ऐसे मंत्री को सौंपा गया है जो देश के पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह जैसा है। खनिज माफियाओं ने मंत्री राजेन्द्र शुक्ला से मन मुताबिक काम करवा रहे हैं शासन को मिलने वाले राजस्व को भारी चूना लगाया जा रहा है। मंत्री-माफिया गठजोड़ हावी है शासन को नुकसान होता है तो होता रहे, मानो मंत्री तो सिर्फ माफियाओं के हित संरक्षण के लिए ही हैं।   मंत्री न बनने तक राजेन्द्र शुक्ला की छवि बेदाग थी उनके क्षेत्र की जनता उन्हें साफ सुथरे नेता के रूप में देखती थीै, परन्तु मंत्री बनते ही श्री शुक्ल को रंग बदलते देर नहीं लगी। एक बड़े कान्टेक्टर की संतान,श्री शुक्ल के रूख में आए इस भारी बदलाव को देखकर इनके विधान सभा क्षेत्रवासी ही नही पुराने मित्र मंडली के साथी भी हैरान है।


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