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मध्यप्रदेश में हो रहे पाप में जनसंपर्क मंत्री राजेन्द्र शुक्ल की भूमिका भी संदेहास्पद व रहस्यमयी !

 मध्यप्रदेश में हो रहे पाप में जनसंपर्क मंत्री राजेन्द्र शुक्ल की भूमिका भी

      संदेहास्पद व रहस्यमयी !

 भोपाल। (पं.एस.के.भारद्वाज)मध्यप्रदेश सरकार के जनसंपर्क  एवं खनिज संसाधन मंत्री राजेन्द्र शुक्ला की कार्यशैली से प्रदेशवासी स्तब्घ है। इसके कार्यकाल में खनिज माफियाओं द्वारा कई अधिकारियों पत्रकारों की हत्याएं हो चुकी है कई पर हमले हो चुके पर मंत्री महोदय चुप्पी तोडऩे को तैयार नहीं है। मंत्री जी इतने संवेदनहीन हो चुके है कि मृतकोंं के संवेदना हेतु उनके पास एक फूटा शब्द भी नहीं है।     प्रदेश में कई पत्रकारों की हत्यायें हो चुकी है और हजारों पत्रकारों पर फर्जी मुकद्दमे दर्ज हो चुके है परन्तु मंत्री जी चैन की बंसी बजाते हुए सत्ता स्वाद में मदमस्त हंै। यही नहीं अपने इर्द-गिर्द भ्रष्ट अधिकारियों का हुजूम लगाये है। प्रदेश का भ्रष्टतम् अधिकारी जिसके खिलाफ म.प्र.हाई कोर्ट  एफ. आई.आर.दर्ज करने का आदेश दे चुकी है एस. के. मिश्रा  को जनसंपर्क विभाग का प्रमुख सचिव तथा मंगला प्रसाद  मिश्रा जैसे भ्रष्ट अधिकारी को संचालक बनाकर इसे प्रमाणित कर दिया है। इनके खिलाफ पत्रकारों के कल्याण और सुविधाओं के नाम पर करोड़ों डकारने का आरोप है। मंगला मिश्रा को पत्रकारों के कल्याण संबंधी जिम्मेदारी देकर पत्रकारों का मुंह बंद करने की रणनीति पर चल रहे है। शिवराज के प्रिय पात्रों में शुमार श्री राजेन्द्र शुक्ल सुनियोजित तरीके  से खनन माफियाओं को संरक्षण प्रदान किए हुए है। खनन माफिया और खनिज मंत्री के साजिश का शिकार पत्रकार और खनिज विभाग के कर्मचारी अधिकारी हो रहे है,और जान से हाथ धो रहे है। मंत्री जी अपने विभाग द्वारा प्रदेश में खनन माफियाओं द्वारा पत्रकारों अधिकारियो की हुई हत्याओं की जांच कराने का साहस क्यों नही जुटा पाए?क्या पत्रकारों की सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं है? क्या मात्र मीडिया कर्मियों की उपयोगिता प्रदेश में राजनीतिक बाजार सजाने के लिए ही है,जनसंपर्क विभाग के प्रमुख सचिव एस. के.मिश्रा और राजेन्द्र शुक्ला के मधुर संबंध जगजाहिर है। पूर्व में  मिश्रा को अपने गृह जिला रीवा का कलेक्टर मंत्री की कृपा पर ही बनाया गया था,जहां हनुमना तहसील में लगभग ढाई सौ एकड़ सरकारी जमीन की हेराफरी इन्होंने की थी। इसकी शिकायत पर ही हाईकार्ट ने एस.के. मिश्रा को दोषी मानते हुए ही एफ.आई.आर.दर्ज करने का आदेश दिया था। वह कार्यवाही आज तक क्या हुई? पूरा प्रदेश जानता है। इसके विपरीत मंत्री जी के पास जैसे ही खनिज संसाधन विभाग आया,मंत्रीजी ने इन्हें खनिज विभाग का सचिव बना लिया। जैसे ही राजेन्द्र शुक्ल के पास जनसंपर्क विभाग मिला,वैसे ही एस ़के मिश्रा को इन्होंने जनसंपर्क विभाग का आयुक्त एवं प्रमुख सचिव बना दिया। काफी शिकवा शिकायतों के बावजूद इन्हें जनसंपर्क विभाग के आयुक्त पद से तो दूर कर दिया परन्तु विभाग का प्रमुख सचिव एवं मध्यप्रदेश माध्यम का प्रबंन्ध संचालक का पद यथावत रखा,ताकि परोक्ष रूप से कमान इन्हीं के हाथ मे रहे। एस.़के .मिश्रा मुख्यमंत्री के भी प्रमुख सचिव है,लिहाजा खनिज मंत्री और मुख्यमंत्री के मध्य समन्वय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे है।  एस. के .मिश्रा और राजेन्द्र शुक्ल मिलकर पत्रकारों को बुरी तरह मानसिक रूप से प्रभावित किये हुए है। यही कारण है कि कोई भी खनन संबंधी समाचार जिसका संबंध सरकार ,मंत्री,किसी प्रभावशाली व्यक्ति से होता है प्रकाशित ही नहीं होता और पत्रकारों के ऊपर हो रहे सुनियोजित  हमलों पर एक फूटा,शब्द भी इनके मॅुह से संवेदना के लिए नहीं निकलता। दूसरी ओर यदि कोई भाजपा समर्थित बॉलीबुड की नेत्री किसी आयोजन के लिए आ जाय अथवा वो किसी फिल्म को टैक्स फ्री कराने की सिफारिश लेकर आ जाये तो उसके पीछे दिल दर्शन की भावना से पूरी सरकार पलकपावड़े बिछाकर तन्मयता से लग जाती है कि कहीं उसकी चिकनी काया पर कोई दुश्प्रभाव न हो जाये। इसके प्रमाण के लिए इनके अधीन सरकारी समाचार एजेन्सी,जनसंपर्क विभाग अथवा स्वयं प्रभारी अधिकारी जनसंपर्क श्री सुरेश गुप्ता जी से मालूम किया जा सकता है। समाचार समय और कार्यकाल अवलोकन के उपरान्त देश की जनता जान सकती है कि प्रदेश में हो रहे पाप में इनकी भी भूमिका संदेहास्पद व रहस्यमयी है। 
                                                                          
                                                                               
                                                                                                                                                                     
                                



                                                                               


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