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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के सानिध्य में संचालित,शासकीय उपक्रम है अथवा निजी चिटफंड कंपनी

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के सानिध्य में संचालित 
शासकीय उपक्रम है अथवा निजी चिटफंड कंपनी

भोपाल। (पं.एस.के.भारद्वाज)मध्यप्रदेश में संचालित तथाकथित शासकीय उपक्रम मध्यप्रदेश माध्यम विगत 15 वर्षों से भ्रष्टाचारी संस्थान के नाम से सुर्खियों में है। वैसे तो इस संस्थान का काम राज्य सरकार की योजनाओं के मद्दे नजर बनने वाले कार्टून, डाक्यूमेंट्री फिल्म, विज्ञापनों की डिजाईन आदि करने का मुख्य काम है। परंतु परोक्ष रूप से यह संस्थान सरकारी धन को नीतिगत तरीके से गबन करने का एक प्रभावशाली और मुख्य अड्डा बन गया है। इसके माध्यम से राज्य के छोटे से छोटे मीडिया संस्थान से लेकर देश और दुनिया के नामचीन मीडिया घरानों को परोक्ष रूप से आर्थिक लाभ पहुंंचानेवाला  संस्थान है। तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भाग लेने वाले राजनीतिक दलों के आकाओं और चुनाव में प्रत्याशी अथवा चुने हुए प्रतिनिधि हों सभी के लिए यह मानव शरीर में रक्त संचार जैसे कार्य को अंजाम देने वाला संस्थान के नाम से जाना जाता है। राज्य शासन अथवा केन्द्र शासन की लगभग हर योजनाओं के प्रचार-प्रसार के बजट और उनके लिए तैयार किए जाने वाले प्रचार-प्रसार के लिए वाहन, बैनर, झण्डे, पम्प्लेट, विभागीय प्रतिवेदन, निगम मंडलों के वार्षिक प्रतिवेदन इत्यादि सहित अन्य प्रसार-प्रचार सामाग्री और संचार से संबंधित कार्यों के नाम पर सरकार के मूल बजट का प्रसार-प्रचार का जनसंपर्क संचालनालय एवं उसके अधीन मध्य प्रदेश माध्यम के द्वारा ही किया जाता है। आम तौर पर प्रदेश में और देश में हर व्यवसायिक और शासकीय उपक्रमों के लिए एक व्यवस्था लागू है कि पूरे वर्ष का लेखा-जोखा और उसका पंजीयन क्रमांक नवीनीकरण, कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों का विवरण जनता के सामने सार्वजनिक किए जाने का नियम लागू है। परंतु मध्य प्रदेश माध्यम में ऐसा कोई नियम लागू नहीं होता है। प्रदेश का कोई भी पत्रकार अथवा नागरिक, अथवा विधायक यहां तक की सांसद भी नहीं जानते कि यहां कंपनी है, फर्म है, निजी कंपनी है, अथवा कोई निजी चिटफंड कंपनी इस कंपनी ने हर विभाग से सरकार के निगम मंडलों से कोई भी काम करने के लिए अग्रिम भुगतान प्राप्त किया जाता है। तथा प्रचार-प्रसार अथवा प्रिंटिंग सेवा प्रदाता कंपनी, पत्र, पत्रिका, संस्था आदि को 15 प्रतिशत अपना कमीशन तय करने के वाद काम कराती है। तथा उसका भुगतान कब किया जाएगा इसकी कोई गारंटी नहीं है। जिस प्रकार चिटफंड कंपनियां सरकार द्वारा पंजीकृत होने तथा बैंकिंग प्रणाली अपनाई जाने के लिए वैध बताकर जनता से करोड़ों रूपए पहले वसूल लेती हैं। बाद में उस पैसे का क्या करती हैं, कहां निवेश करती हैं, क्या उत्पादन करती हैं आम जनता नहीं जानती कि उसका भुगतान लाभ सहित कब होगा, अथवा कभी नहीं होगा उसी तर्ज पर मुख्यमंत्री के सानिध्य में संचालित मध्यप्रदेश माध्यम का भी काम है। बताते हैं मध्यप्रदेश माध्यम के पास न छपाई की मशीनें है, न इसके पास कोई किसी मीडिया हाऊस जैसा स्टूडियो और न ही कोई अपनी निजी संचार व्यवस्था। सिवाए एक समाचार पत्र रोजगार निर्माण और समाचार पत्रिका पंचायिका आदि जैसी कुछ और प्रकाशन मात्र हैं वह भी विभागों के सरकारी विज्ञापन की राशि को हड़पने की नियत से प्रकाशित होते हैं। वहीं इसके विपरीत मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम, शासकीय मुद्रणालय आदि जैसे संस्थानों को व्यवसाय में कमीशन के लिए प्रतिस्पर्धा में शून्य कर रखा है इसका मुख्य कारण है बड़े-बड़े मीडिया हाऊस और बड़ी-बड़ी प्रसार-प्रचार कंपनियां, विधायक, सांसद आदि को सीधा अघोषित लाभ पहुंंचना तथा मुख्यमंत्री के स्वयं के चैयरमैनशिप में संस्थान का संचालन वहीं प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री एस.के.मिश्रा एवं भ्रष्ट कार्यपालन संचालक श्री मंगला मिश्रा जैसे लोगों को एक दलाल के रूप में प्रतिस्थापित कर रखा है ताकि इस संस्थान के माध्यम से प्रभावशाली मीडिया घरानों को उनके मुंहू में दलाली का निवाला ठूॅसकर उन्हें चुप किया जा सके तथा प्रभाव में न आने वाले लोगों को अघोषित रूप से अपराधियों को नियुक्त करके उन्हें पुलिस और अदालत के दलालों के माध्यम से सलाखों के पीछे भेजा जा सके अथवा यमराज को ही सीधा ठेका दिया जा सके। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि यह संस्थान सरकार की कोई लोकहितकारी संस्था नहीं है बल्कि अघोषित रूप से एक चिटफंड कंपनी है जो भ्रष्ट लाभ के लिए और सरकार के भ्रष्टाचार को बचाने के लिए कृत संकल्पित है। यही कारण है कि किसी मीडिया कर्मी के ऊपर हमला हो या सरकार के विरूद्ध समाचार चलाये उसका विरोध कोई भी मीडिया संस्थान अथवा विधायक या सांसद नही कर पाता। और प्रकरण दफऩ करा दिया जाता है। लेखक वरिष्ठ पत्रकार तथा त्वरित टिप्पणीकार है।


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