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भ्रष्टाचारियों को होगी सात साल तक कैद=कैबिनेट का फैसला

कैबिनेट का फैसला: भ्रष्टाचारियों को होगी सात साल तक कैद

नई दिल्ली । भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए सरकार भ्रष्टाचार निरोधक कानून 1988 में बड़े बदलाव करने जा रही है। अब भ्रष्टाचार के दोषियों को भी जघन्य अपराध के दोषियों की तरह सात साल के कारावास की सजा होगी। इसमें न्यूनतम सजा भी छह माह से बढ़ाकर तीन साल हो जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इसके साथ ही कई बड़े फैसले लिए गए।
कैबिनेट ने बुधवार को भ्रष्टाचार निरोधक संशोधन विधेयक 2013 में आधिकारिक संशोधनों को मंजूरी दी। यह विधेयक फिलहाल राज्यसभा में लंबित है। प्रस्तावित बदलावों के बाद भारत का भ्रष्टाचार निरोधक कानून भी भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र की संधि के अनुरूप हो जाएगा। मौजूदा कानून में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब भ्रष्टाचार के मामले फैसले आने के इंतजार में लंबे समय तक अदालतों में लंबित नहीं रहेंगे।
न्यूनतम पेंशन का प्रावधान :
कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस), 1995 के पेंशनभोगियों को कम से कम एक हजार रुपये की मासिक पेंशन आगे भी मिलती रहेगी। अभी तक न्यूनतम एक हजार रुपये की पेंशन का प्रावधान केवल वित्तीय वर्ष 2014-15 तक के लिए था। फलहाल इस पर बजटीय खर्च 850 करोड़ रुपये सालाना होगा।
स्मार्ट सिटी के सपने  :
सरकार ने सौ स्मार्ट सिटी बनाने की महत्वाकांक्षी योजना के मसौदे को मंजूरी प्रदान कर दी। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पीएम मोदी के डिजिटल इंडिया मिशन का अहम हिस्सा है। इस पर लगभग एक लाख करोड़ रुपये की खर्च होने का अनुमान है।
सौ स्मार्ट सिटी विकसित करने और 500 अन्य शहरों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और संवारने की योजना के तहत कई चुनिंदा पुराने शहरों और कुछ नए बने शहरों को आधुनिक संसाधनों से लैस किया जाएगा।
भ्रष्ट तरीके से अर्जित मानी जाएगी अघोषित संपत्ति
केंद्र सरकार ने कहा है कि नए लोकपाल कानून के तहत सरकारी कर्मी का किसी संपत्ति का रिटर्न दाखिल करने में नाकाम रहने पर माना जाएगा वह संपत्ति भ्रष्ट तरीके से अर्जित की गई है। यह भी कहा गया है कि संपत्ति के बारे में सरकारी कर्मचारियों का दिया गया ब्योरा सार्वजनिक किया जाएगा।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने लोकपाल कानून के संबंध में बार-बार पूछे जाने वाले सवालों पर एक मसविदा जारी किया है। विभाग ने कहा है कि कर्मचारियों को दो रिर्टन दाखिल करना होगा।
पहला 1 अगस्त 2014 तक जो संपत्ति और देनदारी है उसके लिए और दूसरा 31 मार्च 2015 तक की संपत्ति और देनदारी के लिए। इसके लिए समय सीमा बढ़ा दी गई है और इस वर्ष 15 अक्टूबर से पहले यह ब्योरा जमा करना है।
इसमें कहा गया है कि यदि कोई सरकारी कर्मी जानबूझ कर या अनुचित वजह से अपनी संपत्ति घोषित करने में नाकाम रहा या भ्रामक सूचना दी और जांच में ऐसा पाया गया तो माना जाएगा वह संपत्ति उसने गलत तरीके से अर्जित है। ऐसा तबतक माना जाएगा जब तक यह गलत साबित नहीं हो जाए।
कार्मिक विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारी की पत्नी निजी कंपनी की कर्मचारी है तो रिटर्न में उसका भी जिक्र किया जाएगा। इस बारे में भी लोकपाल कानून में प्रावधान है। यदि पति-पत्नी दोनों सरकारी कर्मचारी हैं तो दोनों को अलग-अलग रिटर्न दाखिल कराना होगा। लोकपाल एवं लोकायुक्त कानून- 2013 गत वर्ष 1 जनवरी से लागू है।


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