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सीएम के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव

विधानमंडल के बजट सत्र के आखिरी दिन शिवसेना के विधायक गुलाबराव पाटील ने राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे और एनसीपी के विधायक जितेंद्र अव्हाड ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव रखा है।

विधायक गुलाबराव पाटील ने विधानसभा में कहा कि रेती खनन के मामले में सावनेर तहसील के उपविभागीय तहसीलदार को दोषी पाया था। नागपुर अधिवेशन में राजस्व मंत्री एकनाथ खड़से ने दोषी अधिकारी को निलंबित करने की घोषणा सदन में की थी, लेकिन अब तक उस अधिकारी को निलंबित नहीं किया गया है। यह सदन की अवमानना है कि सदन में घोषणा करने के बाद भी मंत्री करप्ट अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे। इसके खिलाफ उन्होंने राजस्व मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव रखा है। सत्ता में शामिल शिवसेना के विधायक द्वारा सरकार के मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किए जाने को लेकर सदन में दिन भर चर्चा गर्म रही।

वहीं एनसीपी के विधायक जितेंद्र अव्हाड ने मुख्यमंत्री फडणवीस के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव रखा। अव्हाड ने कहा कि नारपार योजना के अंतर्गत गुजरात को पानी देने के मामले में मुख्यमंत्री ने सदन को गलत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा था कि सन 2010 में तत्कालीन आघाडी सरकार के मुख्यमंत्री ने गुजरात को पानी देने का समझौता दिया था जबकि सच यह है कि 16 जनवरी को वर्तमान मुख्यमंत्री फडणवीस ने पार-पापी-नर्मदा नदी जोड़ योजना का 600 एमएलडी पानी गुजरात सरकार को देने का समझौता किया। मुख्यमंत्री ने सदन को गुमराह किया है इसलिए उन पर विशेषाधिकार हनन के तहत कार्यवाही होनी चाहिए।


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