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नारीवाद की बलि चढ़ता भारत का सैनिक

       नारीवाद की बलि चढ़ता भारत का सैनिक

दिन रात देश के लिए खून और पसीना बराबर मात्रा में बहाने वाले सैनिक भी "नारीवाद" के कीटाणु से संक्रमित है। जो सैनिक भारत के लिए रोज ही खून पसीना बहाते है जो सैनिक -40℃ में भी देश की रक्षा करते है उन सैनिको को झूठे स्त्री सम्मान की बलि चढ़ाया जा रहा है।।।

सवाल उठता है कैसे??

सेना में मंथरा समान औरतो का एक समूह बना हुआ है जिसका नाम है AWA यानी Army Woman Association....इस समूह की औरते सेना के सैनिको की पत्नियो का brain wash करती है। उन्हें ये सिखाती है की परिवार कैसे तोडना है , किसी भी सैनिक पर अगर उसकी पत्नी झूठा केस लगा दे तो सड़कछाप औरतो का समूह AWA ये मानकर चलता है कि गलती सैनिक की ही है।। इस तरह कई सैनिको का शोषण आये दिन सेना में होता है।। कितने शर्म की बात है।

सवाल ये है की जब देश में न्यायपालिका और महिला आयोग और महिला थाने नाम की संस्था पहले से ही बनी है तो ये AWA बनाने की क्या जरूरत थी???? दूसरी बात ये की जो सैनिक देश के लिए दिन रात कोल्हू के बैल की तरह मेहनत करता है अपने परिवार घर सबको त्याग देता है और अंत में अपने प्राण भी त्याग देता है ..क्या उस सैनिक को महत्त्व नहीं दिया जाना चाहिए??? और सबसे महत्वपूर्ण बात ये कि कई सैनिक ऐसे है जो कश्मीर जम्मू या अन्य संवेदनशील क्षेत्रो में कार्यरत है और उनके ऊपर झूठे केस भी चल रहे है।। शर्म आना चाहिए इस देश की स्त्रियों को.... वो सैनिक तनावपूर्ण जीवन जीते हुए दो तरह की जंग लड़ रहे है ,एक तरफ तो पडोसी देशो से जैसे चीन पाकिस्तान इत्यादि और दूसरी तरफ अपनी चरित्रहीन पत्नी और AWA नाम के पुरुष विरोधी समूह से.....

इस देश में किसान और जवान का इतना शोषण होता है की धीरे धीरे देश के लड़के किसान और जवान दोनों ही क्षेत्रो का त्याग करते जा रहे है।

पहली बात ये की AWA नाम की सस्था बनी ही क्यों?? क्या सैनिको के अपमान के लिए?? एक ऐसी संस्था जिसमे सिर्फ औरते होती है जो पुरुषो का मूल्यांकन करती है। वो औरते जो हमारे वीर सैनिको के चरणों की धुल भी नहीं है वो हमारे सैनिको का मूल्यांकन करेगी??? भारत के सैनिको और भावी सैनिको को इस बात के लिए आंदोलन करना चाहिए की AWA नाम की संस्था को ख़त्म किया जाये और हो सके तो सेना में पुरुषो के लिए संस्था बनायीं जाये।।

धिक्कार है इस देश की व्यवस्था और पुरुष विरोधी स्त्रियों को . जिस देश के सैनिक दिन रात भूंखे प्यासे रहकर अपना खून बहाते है उनका इतना शोषण??? कई पुरुषो ने तो हमें बताया की वो राजस्थान की सीमा में तेज धुप में 50℃ तापमान में देश की रक्षा भी करते है और उनकी पत्नी किसी की रखैल बनकर मौज मस्ती करती है और भरण पोषण बेचारे सैनिक देते है..... क्या ये इंसाफ है????

यही हाल रहा तो इस देश के लड़के धीरे धीरे भारतीय सेना का बहिष्कार करेंगे...उसके बाद मेरा भारतीय सेना को सुझाव होगा की चूड़ी पहनने वाली औरत जमात से देश की रक्षा कराये...हम भी देखते है कितने दिन सुरक्षित रहेगा ये देश.....

नारीवाद से सावधान रहिये,जहां जहाँ स्त्री प्रधानता या नारीवाद मौजूद होता है वहां वहां मनुष्य जाति का पतन होता है । क्योंकी स्त्रियां भेदभाव की मानसिकता से ग्रस्त होती है उनमे इतनी बुद्धि होती ही नहीं की वो इंसाफ कर सके।। जितना त्याग एक सैनिक करता है उतना त्याग इस संसार की कोई स्त्री नहीं करती


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