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केंद्र सरकार कीमतें कम कर रही है, प्रदेश सरकार घटाने के बजाय बढ़ा रही है।

भोपाल -विश्व बाजार में कच्चे तेल की गिरती कीमतों के चलते पेट़ोल-डीजल के साथ रसोई गैस की कीमतों में कमी प्रदेश की भाजपा सरकार के लिए सिरदर्द साबित हो रही है।इसके चलते एक ओर एनडीए शासित केंद्र सरकार कीमतें कम कर रही है, वहीं प्रदेश सरकार टैक्स की भरपाई की पूर्ति के लिए कीमतें घटाने के बजाय बढ़ा रही है। ऐसे में एक बार फिर नए साल में उपभोक्ताओं को तोहफा देकर केंद्र की भाजपा सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 43 रुपए से अधिक की कमी की है। अब प्रदेश सरकार को एक बार फिर वैट में बढ़ोतरी कर यह भरपाई करने की चुनौती से गुजरना पड़ सकता है।

उल्लेखनीय है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार कमी के बाद केंद्र सरकार पेट़ोलियम उत्पादों की कीमतों में कटौती करती जा रही है। इसका असर सबसे अधिक प्रदेश की भाजपा सरकार की सेहत पर पड़ रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, मप्र में पेट़ोलियम पदार्थों पर सबसे अधिक वैट है। इससे मप्र सरकार को करीब 500 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त होती है। ऐसे में कीमतों में कमी से सरकार को बड़ा फटका लग रहा है। ऐसे में प्रदेश सरकार केंद्र के समान इन उत्पादों की कीमतों में कटौती के बजाय वैट बढ़ाकर राजस्व हानि की भरपाई कर रही है।

अब जब केंद्र सरकार एक बार फिर घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कटौती की है, उससे एक बार फिर मप्र सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। हालांकि, वैट में बढ़ोतरी से कीमतों में केंद्र की मंशानुसार कटौती नहीं होने से प्रदेश सरकार को जनता के साथ विपक्ष की नाराजगी का सामना भी करना पड़ रहा है, लेकिन प्रदेश सरकार राजस्व घाटे की भरपाई के लिए इसका सामना कर रही है।

इसके पीछे प्रदेश सरकार का तर्क है कि प्रदेश सरकार की योजनाओं के लिए काफी राशि की जरूरत होती है। इतनी बढ़ी राशि की भरपाई के लिए टैक्स बढ़ोतरी जायज है।

सूत्रों के मुताबिक, केंद्र द्वारा अब तक की गई कीमतों में कटौती से प्रदेश सरकार को करीब 500 करोड़ रुपए से अधिक की चपत लग चुकी है। आगे भी कीमतों में यही कटौती जारी रही तो प्रदेश सरकार को इससे भी अधिक राजस्व की हानि होगी। ऐसे में प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही विकास योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।


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