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मध्य प्रदेश में सवा सात करोड़ की आबादी में ,लगभग पांच करोड़ गरीब

         मध्य प्रदेश गरीबों की श्रेणी में निरन्तर विकास करने वाला राज्य         

            सवा सात करोड़ की आबादी में ,लगभग पांच करोड़ गरीब             

              मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना के तहत बचता है उनका जीवन
भोपाल। (पं.एस.के.भारद्वाज980्610्63े68में गरीब परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से अप्रैल 2008 से शुरू की गई थी। मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना को जून 2013 से लागू नये स्वरूप में गेहूँ और चावल की रियायती दर को और कम कर दिया है तथा आयोडीनयुक्त नमक और शक्कर को इसमें शामिल किया गया है। सरकार के एक अधिकृत समाचार के अनुसार प्रदेश में मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना के अंतर्गत लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली की नई व्यवस्था के दायरे में अब तक 4 करोड़ 90 लाख व्यक्ति को लाया जा चुका है। अर्थात प्रदेश में ऐसे परिवारों का तेजी से विस्तार हुआ है जो अपनी आमनदनी से अनाज और नमक तक नहीं खरीद सकते। जिनकी आय औसत दर से काफी पीछे है। सरकारी योजना में पात्र व्यक्तियों को  एक रुपये की दर पर प्रति किलोग्राम गेहूँ और चावल उपलब्ध करवाया जाता है। प्रदेश में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के प्रावधान के अनुरूप मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना एक मार्च, 2014 से लागू की गई। प्रदेश में पात्र व्यक्तियों को रियायती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध करवाने के लिये इस योजना का विस्तार हुआ है।      सरक ारी खबर अनुसार मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना मध्यप्रदेश में अप्रैल, 2008 से लागू है। तत्कालीन समय में  इस योजना में बीपीएल परिवार को 5 रुपये किलो गेहूँ के स्थान पर 3 रुपये किलो गेहूँ और चावल 6.50 रुपये प्रति किलो के स्थान पर 4.50 रुपये किलो प्रदाय किया जा रहा था। वर्ष 2013 तक योजना से बीपीएल के 75 लाख परिवार लाभान्वित हो रहे थे।जून, 2013 से योजना में बीपीएल के साथ अंत्योदय परिवार (अति गरीब परिवार) को भी शामिल किया गया। अब योजना में गेहूँ एक रुपये और चावल दो रुपये किलो दिया जाने लगा। योजना में एपीएल परिवार को आयोडीनयुक्त नमक एक रुपये किलो प्रदाय किया गया।जनवरी, 2014 से योजना में एक रुपये किलो चावल, एक रुपये किलो गेहूँ देना प्रारंभ किया गया।     मार्च, 2014 से पूरे प्रदेश में एक रुपये किलो की दर पर आयोडीनयुक्त नमक का प्रदाय प्रारंभ किया गया। योजना में पूर्व में 89 आदिवासी विकासखण्ड में ही एक रुपये की दर पर आयोडीनयुक्त नमक दिया जाता था। अधिनियम के अंतर्गत पात्र परिवारों को भारत सरकार द्वारा गेहूँ 2 रुपये प्रति किलो एवं चावल 3 रुपये प्रति किलो की दर पर दिये जाने का प्रावधान है। इसके विपरीत प्रदेश में मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना में सभी पात्र परिवार को गेहूँ एवं चावल एक रुपये किलो की दर पर उपलब्ध करवाया जा रहा है। मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना में अंत्योदय अन्न योजना एवं प्राथमिकता श्रेणी के परिवार को शामिल किया गया है। प्रदेश में अंत्योदय अन्न योजना के परिवारों को 35 किलोग्राम प्रति परिवार एवं प्राथमिकता परिवारों को 5 किलोग्राम प्रति सदस्य प्रतिमाह के मान से खाद्यान्न का वितरण किया जा रहा है।    प्रदेश में मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना में रियायती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध करवाने की पात्रता से वंचित परिवारों को योजना के दायरे में लाने के लिये जून, 2014 में प्रदेशव्यापी खाद्य सुरक्षा पर्व भी मनाया गया। पर्व के दौरान योजना से छूटे परिवारों के नाम जोडऩे के लिये घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया गया। सुरक्षा पर्व के पहले 75 लाख परिवार को एक रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर गेहूँ एवं चावल उपलब्ध करवाया जा रहा था। पर्व के बाद इनकी संख्या अब बढ़कर 110 लाख 38 हजार परिवार तक पहुँच गई है। प्रक्रिया निरन्तर जारी है  मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर प्राथमिकता श्रेणी के परिवार में 24 श्रेणी को शामिल किया गया है। इनमें से कुछ श्रेणियाँ ऐसी हैं, जिनकी पंचायत मुख्यमंत्री निवास पर लग चुकी है। इनमें केश-शिल्पी, घरेलू कामकाजी महिलाएँ, फेरीवाले, साइकिल रिक्शा-चालक, मछुआ सहकारी समिति के सदस्य आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं। प्राथमिकता परिवार की श्रेणी में अनुसूचित-जाति एवं जनजाति के परिवारों को भी शामिल किया गया है। खाद्य सुरक्षा पर्व के दौरान घर-घर जाकर अनुसूचित-जाति एवं जनजाति के परिवारों से घोषणा-पत्र भरवाये गये। जिनमें प्रदेश के कई मंत्री,विधायक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के परिवार लाभान्वित होने की भी प्रबल संभावना है।      मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना में एक रुपये किलो की दर पर गेहूँ-चावल के अलावा प्रतिमाह एक रुपये की दर पर एक किलो आयोडीनयुक्त नमक, चार लीटर केरोसिन एवं एक किलोग्राम शक्कर भी प्रदाय की जाती है। मगर गरीबों की पहुॅच से दूर होते जा रही आम जरूरत की वस्तुए आलू,प्याज,दाल,तेल,मसाले,टमाटर आदि पर कमरतोड़ महंगाई से राहत के लिए कोई योजना नहीं है। इसकी पात्रता के लिए राशन कार्ड सहित अन्य जरूरी दस्तावेज बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों में रिश्वत के बिना काम भी कोई नहीें होता है। रिश्वत और सरकारी फीस भी किसी दूसरे राज्य के मुकाबले कई गुना अधिक चुकानी पड़ती है। यही कारण है कि प्रदेश के आम नागरिक की क्रय शक्ति घट रही है और चन्द लोग उद्योगपति,मल्टीनेशनल कंपनियों के भागीदार ,बड़े व्यापारी खूब फल-फूल रहे है। जिसका परिणम है कि प्रदेश की लगभग सवा सात करोड़ की आबादी में मात्र सवा दो करोड़ लोग ही सामान्य क्रय शक्ति की क्षमता वाले है शेष सरकार की मेहरवानी से मिलने वाले खाद्यान्न पर निर्भर हो कर जी रहे है।


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