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मुख्यमंत्री श्री चौहान ने किया सी.एम. हेल्पलाइन 181 का लोकार्पण,मध्यप्रदेश सरकार की निजी कंपनी और ठेकेदारों के हित में एक और नई ऐतिहासिक पहल

            मुख्यमंत्री श्री चौहान ने किया सी.एम. हेल्पलाइन 181 का लोकार्पण                         जनता से छिपाया असली कमाई और कमीशन का राज    

 प्रदेश सरकार की निजी कंपनी और ठेकेदारों के हित में  एक और नई ऐतिहासिक पहल


भोपाल (पं.एस.के. भारद्वाज- 9806106368) मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने उद्घाटन के अवसर पर कहा है कि मध्यप्रदेश में सभी सुखी हों, निरोगी हों, सबका कल्याण हों, कोई दु:खी ना रहे, यही शासन व्यवस्था का ध्येय है। इसी की पूर्ति के लिये प्रदेश में सी.एम. हेल्पलाइन 181 प्रारंभ की गई है। जबकि सत्यता यह है कि एक कंपनी विशेष के लाभ के लिए लागू की  गई कमीशन और स्वहित पर आधारित इस योजना का शुभारम्भ अवसर था।श्री चौहान ने प्रदेश की सुशासन व्यवस्था को अधिक चुस्त-दुरूस्त और जनहित में सक्रिय करने की ऐतिहासिक पहल करार देते हुए सी-21 नामक शॉपिंग मॉल भोपाल में सी.एम. हेल्पलाइन का लोकार्पण किया। उनके बताये अनुसार देश में अपने तरह की अनूठी इस हेल्पलाइन से प्रदेश के विभिन्न विभाग के पाँच हजार अधिकारी-कर्मचारियों को जोड़ा गया है। ये अधिकारी इस हेल्पलाइन से प्राप्त समस्याओं का निराकरण करेंगे। हेल्पलाइन के नि:शुल्क टोल नम्बर 181 से जन-कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी प्राप्त की जा सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी प्रदेशवासी को अपनी समस्या के लिये भटकना नहीं पड़े, यह हेल्पलाइन जनहेतु-जनसेतु के रूप में कार्य करेगी। समस्या का पूर्ण निराकरण होने पर आवेदक की संतुष्टि के पश्चात ही यहाँ दर्ज किया गया प्रकरण बंद किया जायेगा। जबकि प्राप्त सूत्रों और शासकीय रिकार्ड के अनुसार सभी सरकारी अधिकारियों कर्मचारियों की अद्यतन जानकारी राज्य स्तर पर सामान्य प्रशासन विभाग ,संभाग स्तर पर आयुक्त कार्यालय एवं जिला स्तर पर जिला कलेक्टर के पास रहती है यही नहीं विभाग वार भी यही व्यवस्था भी लागू है और पदासीन शासकीय सेवक कुशलता पूर्वक कार्य भी कर रहे है। मंत्रालय से लेकर ब्लाक लेबल तक सरकार के रिकार्ड अनुसार हर सरकारी और सरकार के सहयोग में शामिल संगठन के सभी कार्यालय क म्प्यूटर प्रणाली से जुड़ चुके है और सुचारू रूप से कार्य कर भी कर रहे है।इस कार्य प्रणाली की प्रशंसा में भारत सरकार ने अवार्ड भी दिया है। सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और क्रियान्वयन के लिए सरकार का भारी भरकम संपर्क विभाग  का संचालनालय और उसके अधीन संचालित संस्था म.प्र.माध्यम सरकारी कुल बजट का करीब 10 प्रतिशत धन खर्च करते है जिसका जिम्मा स्वयं मुख्यमंत्री के सचिव श्री राकेश श्रीवास्तव के पास है। इसके अतिरिक्त पूरे प्रदेश में विभागवार लाखों कर्मचारियों का अमला है। इससे स्पष्ट है कि या तो सरकार द्वारा प्रबन्धन व्यवस्थाऐं जो रिकार्ड में हैं झूठी है,सरकार के कर्मचारी अधिकारी निकम्मे है,अयोग्य है, हराम ही पगार ले रहे है अथवा  सभी कुछ कागजी है,धोखा है। इस लिए यह कार्य मजबूरी में सरकार को निजी हाथों में सौपना पड़ा है। या कमीशन खाने के लिए नई दुकान खोली है। जनता के सामनेे स्पष्ट करना चाहिए।श्री चौहान ने कहा कि प्रत्येक शासन व्यवस्था का कर्तव्य है कि विकास करे, जन कल्याणकारी योजनाएँ बनायें और उनकी सबको जानकारी देकर बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। मध्यप्रदेश में इन तीनों पर लगातार ध्यान देने का ही परिणाम है कि कभी बीमारू कहा जाने वाले इस राज्य ने देश में ही नहीं विश्व में सर्वाधिक 24.99 प्रतिशत कृषि विकास दर और देश में सबसे अधिक 11.02 प्रतिशत विकास दर हासिल की है। सभी वर्गों के कल्याण की योजनाएँ बनी हैं। सबकी समस्याओं के समय पर निराकरण, योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिये परख, समाधान ऑन लाइन तथा लोक सेवा गारंटी अधिनियम जैसी व्यवस्थाएँ लागू की गयीं। उन्होंने कहा कि आज युग बदल रहा है। आमजन क्यों भटके। यह हेल्पलाइन शुरू की गयी है जिसमें कोई भी अपने मोबाइल टेलीफोन द्वारा जहाँ है वहीं से 181 डायल कर अपनी बात शासन तक पहुँचा सकेगा। श्री चौहान ने अधिकारियों से कहा कि इस हेल्पलाइन को चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए अपनी दक्षता तथा कर्मठता का परिचय दें। जबकि सत्यता ये है कि जिस निजी क्षेत्र के व्यवसायिक स्थान पर खड़े होकर मुख्यमंत्री जो भाषण दे रहे थे वह कोई न सरकारी मंच था न सरकार के अधिकारियों का कार्य स्थल और नही कोई सरकारी के नियन्त्रण वाले विभाग का आयोजन था बल्कि सरकार के मुखिया के नाम से भविष्य में मोटी कमाई करने वाली कंपनी का स्थान था जो येन केन प्रकेरण सरकारी खजाने से जनता के हित नाम की घुट्टी पिला-पिला कर  कानूनी चाशनी लगाकर करोड़ो रूपये प्रतिमाह की लूट करेगी जिसका संरक्षण स्वयं मुख्यमंत्री और उनके कमीशनखोर भ्रष्ट अधिकारी करेंगें। अगर हमारी शंका गलत है तो फिर यह भी स्पष्ट हो जाता है सरकार की विकास दर बतायी जा रही वह सरकार की नही बल्कि प्रदेश में स्थापित निजी क्षेत्र की बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निजी आंकड़ो पर आधारित है। जो  ऑडिट के दायरे में भी नहीं है। जिनका रिकार्ड कंपनियों के वेतन भोगी नौकर चार्टेडेट एकाउन्टेंट मालिकों कीे मंशानुसार कंपनी की अच्छी प्रोफाईल बना कर देते है। उनकी नेगेटिब प्रोफाईल होती ही नही है । भले ही कंपनी का क ैसा भी स्तर अथवा कार्य चरित्र हो।लोक सेवा प्रबंधन मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार सबसे पीछे और गरीब जरूरतमंद तक पहुँचे तभी प्रजातंत्र की सार्थकता है। सी.एम. हेल्पलाईन देश में पहली बार लोक सेवा की गारंटी देने वाले राज्य का सुशासन की दिशा में एक सशक्त प्रयास है। उन्होंने कहा कि जनता से सीधे जुडऩे की देश में यह पहली अभिनव पहल है। शासन की योजनाओं का लाभ आवेदक, घर से फोन कर प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि इस सेवा के क्रियान्वयन में कोई कमी नहीं रहने दी जायेगी। भविष्य में आवश्यकतानुसार सुधार भी किये जायेंगे। कार्य की मॉनीटरिंग के लिये वे स्वयं भी सप्ताह में एक दिन हेल्प लाइन की समीक्षा करेंगे। इस विभाग के नये नवेले मंत्री जी से जब इस योजना के विषय में चर्चा की गई तो इस पूरी जानकारी से अनभिज्ञता जताते नजर आये परन्तु चर्चा में मुख्यमंत्री जी की मंशा के सच्चे अनुयायी दिखे। स्पष्ट है कि नये नवेले मंत्री है उन्हें सरकारी कामकाज और अधिकारियों की मन:स्थिति समझने में अभी बहुत समय लगेगा।मुख्यमंत्री के खास लोगों में से एक सचिव श्री हरिरंजन राव ने बताया कि छह माह के प्रयोग और प्रशिक्षण के उपरांत यह सेवा तैयार की गई हैं। टोल-फ्री नम्बर पर प्रतिदिन पाँच से लेकर 10 हजार कॉल रिसीव कर संबंधित अधिकारी को मामले निराकरण के लिये भेजे जायेंगे। यही नहीं, निराकरण की स्थिति से भी आवेदकों को अवगत करवाया जायेगा। हेल्पलाइन में 120 कॉल एक साथ रिसीव करने की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास फेसलेस गव्हर्नमेन्ट का उत्कृष्ट नमूना है। उन्होंने बताया कि परीक्षण अवधि में ही इस हेल्प लाइन में 12 लाख फोन रिसीव हुए हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों की संतुष्टि के सर्वोच्च मानदण्ड स्थापित करने की कोशिश होगी। परन्तु ये नहीं बता पाये कि शिकायतकर्ता के मोबाईल पर प्रति उत्तर में शिकायत क्रमांक क्यों नहीं भेजा जाता है सिर्फ यही संदेश क्यों दिया जाता है कि सी.एम.हेल्प लाईन में संपर्क करने के  लिए धन्यवाद । सरकार और कंपनी में आपस में क्या अनुबंध है कौन कौन हिस्सेदार है। इस योजना के शुरू होने से सरकार के खजाने पर प्रतिमाह करोंड़ो रूपये का भर बढ़ेगा और परिणाम की उम्मीद करना मन को कष्ट देने के अलावा कुछ नहीं होगा। क्योंकि सरक ार ने व्यास्था कर रखी है कि किसी निजी कंपनी का कोई ऑडिट नहीं होता है ,जनता के प्रति कोई जबावदारी भी नहीं है और तो और सूचना का अधिकार के तहत भी ये जानकारी देने में अपने आप को संविधान और कानून से ऊपर मानती है। इसके उदाहरण के लिए कोई भी संस्थान/संस्था/विभाग/निगम जो मुख्यमंत्री के अधीन है अथवा उनकी अध्यक्षता में संचालित हो अथवा उनके रूचि वाले विभाग वहॉ सभी जगह मुख्यमंत्री ने सरकारी खजाने के लूट के लिए कानून और नियमों का बलात्कार करके धनपशुओं को अधिकार दे रखे है कार्यक्रम के प्रमोशन आर्शीवाद देने के लिए मुख्य सचिव श्री अंटोनी डि सा, विधायक द्वय श्री रामेश्वर शर्मा तथा श्री अनिल जी और विभिन्न विभाग के प्रमुख सचिव, सचिव और विभागाध्यक्ष स्तर के बहुत बड़ी संख्या में उपस्थित थे। साभार स्वराज्य न्यूज(www.swarajyanews.com)                                                                              


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