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शिवराज जी गरीब और किसान को अब और उल्लू मत बनाओ

                 शिवराज जी गरीब और किसान को अब और उल्लू मत बनाओ
        कानून से भले बच जाओं, मजदूर,और मजबूर की हाय से कोई नहीं भी नहीं बचा सकता

 मध्य प्रदेश कुछ वर्ष पूर्व आर्थिक दयनीय हालात वाला राज्य कहलाता था इस राज्य को दूसरे राज्य बेचारगी की नजर से देखते थे। समय बदला परिस्थितियॉ बदली और सत्ता परिर्वतन हुआ और दस साल पूर्व भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत हासिल कर इस प्रदेश को भरपूर बिजनी प्रदाय करने वाला और बढ़ती हुई आम आदमी की क्रय शक्ति वाला बना दिया है। खेती को फायदे का धन्धा बना दिया है। यह सब सरकार द्वारा परोसे जाने वाले टी.वी चैनलों और समाचार पत्र पत्रिकाओं के प्रदर्शन विज्ञापनों में खूब नजर आता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि प्रदेश के लोगो की आय बढ़ी है और खेती लाभ का धन्धा बन गया है। इसके पीछे की वास्तविक तस्वीर की बहुत ही कड़वी सच्चाई है। प्रदेश में आम आदमी की क्रय शक्ति नहीं बल्कि राजनीतिक लोगों और भ्रष्ट अधिकारियों के परिवारों और नजदीकियों के साथ व्यवसाय करने वाले या भ्रष्टाचार की गन्दी  नाली में तन मन से डूबे हुए लोगों की क्रय शक्ति बहुत बढ़ी है । प्रदेश में आम आदमी की क्रय शक्ति घट रही है। प्रदेश में पिछले 10 वर्षो की तुलना में तीन गुना गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालो की संख्या में इजाफा हुआ है। यह आंकड़े स्वयं म.प्र. सरकार के है।  तो दूसरी ओर सरकार के स्वयं के संसाधन कम हुए है। बहुत बड़ी मात्रा में सरकारी संपत्त्यिॉ निजी हाथों में जा चुकी है। चाहे आवसीय क्षेत्र हो, जंगल की जमीन हो या कृषि भूमि सहित सड़क बिजली पानी जैसी मुख्य आय देने वाली संपत्तियॉ और संसाधन निजी ,बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथों में सौंपी जा चुकी है। इसके बावजूद पिछले दस वर्षो में प्रदेश पर कर्ज लगभग 25 हजार करोड़ से बढ़कर एक लाख करोड़ से ज्यादा का हो गया है।  अर्थात प्रति व्यक्ति कर्ज भी चार गुना बढ ग़या है। शिवराज सरकार का शायद की कोई महीना होगा जिस महीने में  किसी न किसी कंपनी,संस्था या व्यक्ति के लिए जमीन देने का निर्णय न लिया हो,अर्थात लगता है कि सरकार की पूरी योजना है कि 10-20 साल में सरकार की सभी संपत्तियॉ और सरकार के आय के सभी स्त्रोत्र निजी हाथों में सौप कर सरकार केवल उनसें कमीशन बसूल कर अपना खर्चा चलाए। जो काम आज सरकार कर रही है वह काम भविष्य में निजी कंपनियॉ ही करेगी। हालांकि इसका अहसास जनता को होने लगा है। स्कूल कालेज की फीस हो,बिजली का बिल जमा करना हो या कोई सरकार फीस जमा करनी हो सबका ठेका सरकार ने टाटा कंसलटेंसी एण्ड सर्विस को दे रखा है। प्रदेश की सड़के अलग- अलग कंपनियों के हाथों सौप दी है। खाद,बीज,बिजली,पानी,लकड़ी कोयला खदान का सभी काम कंपनियॉ ही कर रहीं है कहीं सरकार नहीं बची है। यहां तक कि सुरक्षा, सफाई तक का काम अधिकांशत: निजी हाथों में चला गया है। लोगों के कोई भी काम अब जिला मुख्यालय,तहसील या ब्लॉक में काम सरकारी हिसाब से नहीं बल्कि निजी संस्थाऐ कर रही है। और खास बात ये है कि उन संस्थाओं के अध्यक्ष कलेक्टर बने हुए है। और तहसीलदार ,जिला पंचायत या जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी उसके कार्यकारी सदस्य  है। आज कहीं भी काम कराने की शुल्क निर्धारित है चाहे साहब से किसी कागज का सत्यापन ही क्यों ना कराना हो। पूरे मध्य प्रदेश में कंपनी कल्चर स्थापित हो गया है। इस कंपनी कल्चर से एकत्रित धन राशि अधिकारियों ,उनके नजदीकी कर्मचारीगण और मंत्रियों राजनीतिक दलों के निजी कल्याण पर व्यय किये जाते है। तो जनता समझ ले कि  अच्छे दिन मध्य प्रदेश में कब से आ गये है। लोगों की कृय शक्ति कैसे बढ गयी। प्रदेश के किसानों के कल्याण की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जनता को यह कभी नहीं बताते कि कृषि संचालनालय में बैठे अमर सिंह परमार,बी.एल.त्यागी जैसे धन पशु कैसे सरकारी धन और योजनाओं के लुटेरे बन गये। योजनाऐं इनकी फाईलों में रहती है धन राशि इनके निजी गुप्त ठिकानों और इनके परिवार के उद्योग व्यापार में। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान करोड़ों रूपये खर्च करके बड़े-बड़े तंबू और टेंट माईक लगा-लगा कर पिछले दस सालों से गरीबों के मसीहा बनने का ड्रामा कर रहे है। फिर ये क्यो नहीे बताते कि श्रमिको के कल्याण के नाम पर बनाये गये श्रम कल्याण मण्डल में किसका कल्याण हो रहा है। कई बाबू स्तर के कर्मचारी जो कल तक नंगे नबाव हुआ करते थे वे अचानक करोड़ों के बंगले और बड़ी-बड़ी गाडिय़ों के मालिक कैसे बन  गये। प्रदेश के हजारों औद्योगिक,व्यावसाकि संस्थानों में मजदूरों को न्यूनतम वेतन  भी नहीं मिलता,हजारों बड़े-बड़े होटलों में मजदूरों का शोषण हो रहा है। उन्हें न्यूनतम वेतन और सुविधाऐं तो दूर,उनके काम करने का रिकार्ड तक नहीं मिलता है।संस्थानों में लाखों मजदूर काम करते है रिकार्ड 25-50 का ही मिलता है। मजदूरों का कल्याण करने का नाटक करने वाला विभाग के अधिकारी औद्योगिक,व्यावसाकि संस्थानों में संचालकों के तलबे चाट-चाट कर इतने निकम्मे हो गये है कि उन्हें सरकार से ज्यादा प्यारेे संस्थानों में बैठे संचालकगण लगते है।  आपके अधीन विभाग की विजीलेंस ने कार्यवाही  करने की भी कोशिश की फिर ऐसा क्या हुआ कि आपको उन पर दया आ गयी। और छोड़ दिया साथ ही विभाग में प्रमोशन भी कर दिया। शिवराज जी की सरकारी लुटेरों पर कृपा अपरम्पार है। आप वाकई में इस कलयुग के सरकारी गुण्डों के भगवान है। बेवस और लाचार तो इस प्रदेश का किसान और मजदूर है। जिनके नाम पर सरकार चल रही है,भ्रष्टाचारी और सरकारी लुटेरों की फ ौज पल रही है। जिसे जरूरत है मदद की वह जनता तड़प-तड़प कर मर रही है।


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