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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं भ्रष्टाचारियों के सरगना कहिए !

 भोपाल। पं एस.के.भारद्वाज । वर्ष 2003 में कांग्रेस के कुप्रशासन के विरूद्ध साध्वी उमा भारती ने एक मुहिम चलाकर उसका सूपड़ा साफ करके प्रदेश की जनता को एक नई उम्मीद बंाधी थी। इस उम्मीद को भाजपा के कुछ खास रणनीतिकारों ने जनता की मंशा के विरूद्ध साध्वी का पहले प्रदेश निकारा  फिर पार्टीनिकारा करा दिया । और उस रणनीतिकार मंडली ने चापलूस और भ्रष्ट मानसिकता के भाजपा नेता श्री शिवराज सिंह चौहान को प्रदेश का मुखिया बनवा दिया। मुखिया बनने के बाद प्रदेश में इन्होंने अपने सभी प्रतिद्वंद्वी और विरोधी वे चाहे अपने दल के हों या विरोधी दल के सभी की राजनितिक शक्ति क्षीर्ण कर दी है। समूचे प्रदेश में एक भी गलत नीतियों का विरोध करने वाला प्रभावशाली नेता नहीं बचा है। जनता की मजबूरी है कि वह भाजपा को छोडऩा नहीं चाहती और  कांग्रेस के प्रशासनिक भय से अभी तक मानसिक रूप से मुक्त नहीें हो पाई है। केन्द्रीय नेत्रत्व को प्रदेश की कड़वी सच्चाई से कोई लेना देना नहीं है। उन्हें तो दिल्ली में ही बैठकर राजनीति करना है और राज्यों से अपने-अपने निजी हितसंबन्ध साधके रखना है। नजीजतन प्रदेश की हालात यह हो गई है कि श्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के लोक सेवक नहीं बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए अतिलाभकारी और प्रदेश की जनता के कामों के लिए सरकारी दलाल बन गये है। वो एक ऐसा दलाल जो काम तो पैसा लेकर कराता है परन्तु काम या गुणवत्ता की उसकी कोई जवाबदारी नहीं होती है। इनकी राजनीति सिर्फ पेडमीडिया और भाजपा के ऐंजेन्डे पर ही चमक रहीं है। इनकी व्यक्तिगत पहचान या तो राजनीतिकचापलूस,झूठ बोलकर लोगों को उल्लू बनाने वाले या चन्द सालों में सड़क छाप से करोड़पति बनने वालों में होती है। मीडियामैनेज करने का अड्डा जिसके शिवराज सिंह चौहान स्वयं चेयरमैेन है वह विशुद्ध रूप से भ्रष्टाचार का अड्डा ही नही कुछ खास अय्यासों का टर्निगं पोइँट के रूप में पहचाने जाने वाला मध्यप्रदेश माध्यम है। यहॉ बैठ कर सभी प्रकार की प्रबन्ध संचालक और संचालक के सानिध्य में कूटरचनाऐं तैयार होती है। इसके लिए मध्यप्रदेश के सभी कार्पोरेशन और कुछ विभाग धन मुहैया कराते है। यह संस्थान न कोई सरकारी है न कंपनी और न ही इसका कोई जनता के कामों से और जरूरतों से कोई सीधा सरोकार है। इस संस्थान का महत्व केवल इस लिए है कि इसके चेयरमैन मुख्यमंत्री है और पेडमीडिया घरानों को मैनेज यहीं पर बिठा कर किया जाता है। इसके प्रबंध संचालक अधिकारी कम भ्रष्टाचारी चापलूस मीडिया के दलाल ज्यादा पहचाने जाते है। पूरे प्रदेश में डाक्टरों,शिक्षकों,पुलिस कर्मियों,जेल कर्मियों,कृषि विभाग की भर्ती आदि के अनेंको विभागवार भर्ती घोटाले जो उजागर हो रहे है इससें प्रदेश के प्रष्ठिावान अधिकारियों,कर्मचारियों को फर्जीडिग्रीधारी लोकसेवक के रूप में शंका रूवरूप पूरा देश देख रहा है। लोग व्यंग भी करते है कि प्रदेश का नाम मुन्नाभाईयों के नाम पर नामकरण कर देना चाहिए। समूचे भारत देश में मध्यप्रदेश की छवि धूमिल करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। म.प्र.देश का पहला राज्य है जहॉ चिकित्सकीय कार्य को जनसेवाकार्य  नहीं व्यवसाय/उद्योग की श्रेणी में कानून बनाकर किया गया है। यह सिर्फ  अपनी खुदगर्जी के लिए मल्टीनेशनल कंपनियों को लाभ पहुॅचाने की नीयत से किया गया कार्य है। कांग्रेस के नेता और कॉमन वेल्थ गेम के पूर्व चेयरमैन श्रीसुरेश कलमाडी के पूर्व सचिव बिहार राज्य के मूल निवासी श्री प्रवीणकृष्ण प्रमुख सचिव स्वास्थ्य विभाग ,और झारखण्ड के मूल निवासी श्री अजय तिर्की प्रमुख सचिव मेडीकल सर्विस जो अस्पतालों का औचक निरीक्षण क ा जो नाटक कर रहे है वास्तव वह एक साजिश है। सूत्र बताते है  कि प्रदेश के शासकीय चिकित्सकों,फील्ड में कार्यरत कर्मचारियों को मीडिया में खबरे दिखा कर उन्हें  काम में निकम्मा बता कर कहीं काम में ,कहीं व्यवस्था में कमीं बताकर उसे धीरे से सभी सरकारी चिकित्सकीय संस्थानों को किसी निजी बहुराष्ट्रीय कंपनी को सौपे जाने की तैयारी का हिस्सा है। हांलांकि रिलाइंस ग्रुप के अंबानी बंधु पूर्व में ही अपना प्रस्ताव दे चुके है। इसी प्रकार जो लोकायुक्त संगठन,आर्थिक अपराध अनुसंध|न विंग आदि जो दिन रात छापा मार कार्यवाही कर रही है वह भी एक दिखावा है यह छापे भी चुनिन्दा वर्ग विशेष पर पड़ते है। किसी प्रभावशाी पर नहीं अगर गलती से छापा पड़ भी जाय तो मुख्यमंत्री जी उसे मानवीय आधार पर छोड़  देते है। और लोकायुक्त संगठन,आर्थिक अपराध अनुसंध!न विंग के अधिकारियों कर्मचारियों के मनोबल को कमजोर कर उनके  काम,मेहनत के दम पर भ्रष्टाचारियों से निरन्तर बसूली का सिलसिला बनाये रखने के लिए न्यायालय का भय दिखा कर सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग किया जा रहा है। पक्ष और विपक्ष के राजनेता सभी जानते है कि इन्हीं शिवराज सिंह चौहान ने जोर शोर से प्रचार करके विशेष न्यायालय का गठन कराया था,जो 15 फरवरी 2012 से अस्तित्व में आ चुका है। इसके तहत छ:महीने में  जॉच ऐजेन्सी न्यायालय में चालान पेश करने की समय सीमा है तथा छ:माह मे अधिकतम एक वर्ष में प्रकरण का न्यायालय से निपटारा हो जायेगा,परन्तु भ्रटाचार के प्रकरणों के चालान वषों से शिवराज सिंह चौहान की विशेष मेहरवानी से वर्षो से लंबित पड़े है। इनक ी निजी स्थापना में भ्रष्टाचार के अधिकांश दागी और अय्याश किस्म के अधिकारी है पदस्थ है। कृषि विभाग में खरीदी हो या अनुदान या केन्द्रीय सहायता से किसानों को राहत संचालनालय में अमर सिंह परमार और बी.एल.त्यागी जैसे महाभ्रष्ट बैठे जिम्मेदार अधिकारी किसी धनपशु लुटेरे से कम नहीं है। आखिर इसके पीछे सिर्फ शिवराज सिंह चौहान की भ्रष्टारारियों को संरक्षण देना ही एक नीति का हिस्सा है।  उनसे अपने निजी हितसाधना और इन सभी का सरगना बनने केलिए ही प्रदेश के बलात्कारियों भ्रष्टारियों को अपने नजदीक जमा कर रखना ही नियति बन गयी है।किसी भी विधिक और वैधानिक कार्यवाही से इन्हें बचाये रखने के लिए कार्मिक विभाग/सामान्य प्रशासन विभाग अपने पास ही रखा है। अब हम तो यही कहेंगे कि इनकी इन्हीं भावनाओं और इनकें कामों को देख कर जनता इन्हें भविष्य में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं भ्रष्टाचारियों के सरगना कहिए । साभार स्वराज्य न्यूज


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