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शिवराज सिंह चौहान,सुषमा स्वराज की राजनीति क्षीण करने में सक्रिय!

 शिवराज सिंह चौहान,सुषमा स्वराज की राजनीति क्षीण करने में सक्रिय!
                                                             (पं.एस.के.भारद्वाज स्वराज्य न्यूज)
भोपाल । पूरे भारत देश में आम चुनाव का माहौल है । हर छोटे,बड़े ,क्षेत्रीय राजनीतिक दल में अपना-अपना प्रधान मंत्री पद का दावेदार है। राष्ट्रीय स्तर के दल इंडियन नेशनल कांग्रेस में राहुल गांधी अघोषित प्रधानमंत्री पद के दावेदार है,तो भारतीय जनता पार्टी में श्री नरेन्द्र मोदी घोषित प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी है। पूरे देश में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की तर्ज पर संचालित  मीडिया घरानों की सूची में  प्रचार प्रसार के लिए श्री नरेन्द्र मोदी,श्री राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के संयेाजक श्री अरविन्द केजरीवाल तथा श्री मोदी और श्री राहुल गांधी के लिए विघ्र संतोषी,विरोधी शूल धारित देश के हीरो बने हुए है। आज कल टी.व्ही.चैनलों पर प्रसारित हो रहे समाचार और  बड़े समाचार पत्रों को देखने पर यही कुछ देखने को मिलता है। यदि देश मे ंप्रसारित होने वाले लघु और मझोले समाचार पत्रों को छोड़ दें ,तो  पूरे देश में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की तर्ज पर संचालित  मीडिया घरानों की सूची में  प्रचार प्रसार के लिए श्री नरेन्द्र मोदी,श्री राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के संयेाजक श्री अरविन्द केजरीवाल ही नजर आयेंगें। इनका समाज की मूल समस्या या आम जनता की जरूरतों से मानों कोई सरोकार नहीं है। ये वो ही प्रसारित करते है जो भाजपा, कांग्रेस या समतुल्य धनबली राजनेता इन्हें आदेश करते है अथवा सत्ताधारी दल अपने अधीन सरकारी तंत्र के खजाने सेे धन मुहैया कराता है।आज पेड मीडिया की बदौलत श्री नरेन्द्र मोदी देश के भाग्य विधाता  है और देश के राज कुमार श्री राहुल गॉधी है वहीं श्री अरविन्द केजरीवाल समाजसेवी कार्यकर्ता बन गये है। शेष भारत की 130 करोड़ की आवादी में न कोई योग्यता रखता है ,और न कोई अभी मौजूदा अस्तित्व में है। और जो क्षेत्रीय दल है वे इन बड़े दलों के पिछलग्गू के सिवाय कुछ नहीं है। अब देश में श्री नरेन्द्र मोदी ही देश के भाग्य विधाता है तो भारतीय जनता पार्टी का हर कार्यकर्ता और पदाधिकारी नजदीक जाने का प्रयास भी करेगा।  इस भगवामयी लहर में उच्च शिखर के दल के पदाधिकारी भी सिंहासन के लिए अपनी अपनी गोटिया बिठाने के लिए लामबन्द होने लग गये है। ऐसा ही कुछ देश की हाई प्रोफाईल लोक सभासीट विदिशा में भी हो रहा है।मध्यप्रदेश की  विदिशा और उ.प्र. की लखनऊ ने देश के नेत्रत्व के लिए अपने नेता का चुनाव कर उच्च सदन में भेजा है। आज भी  देश के उच्च सदन के सबसे बडे प्रतिपक्ष के पद का प्रतिनिधित्व करने वाली श्रीमती सुषमा स्वराज विद्यमान है। यह क्षेत्र मध्य भारत का महत्वपूर्ण संसदीय क्षेत्र है। म.प्र. में वर्तमान में मुख्यमंत्री और राजनीति के चाणक्य पूर्व मुख्यमंत्री श्री सुन्दरलाल पटवा के परम शिष्य श्री शिवराज सिंह चौहान यहां से पांच बार लोक सभा सदस्य रहे है। और अब भी उन्हीें के इशारों पर क्षेत्र में पार्टी का कार्य संचालित होता है। गत लोकसभा चुनाव के समय तक शिवराज सिंह के सामने पार्टी के प्रभावशाली दो प्रतिद्वंद्वी सदस्य हुआ करते थे। जिन पर शिवराज सिंह चौहान अपने दम पर नियंन्त्रण नहीं कर सकते थे। जिनमें एक भाई राघव जी और दूसरी श्रीमती सुषमा स्वराज । शिवराज सिंह चौहान श्री सुन्दरलाल पटवा के परम शिष्य है इतिहास साक्षी है कि इनके सामने कोई भी प्रतिद्वंद्वी ज्याद समय तक टिक नहीं सकता। चाहे वह कितना ही प्रबल शक्तिमान क्यो न हो। वे नहीं चाहते कि उनके क्षेत्र में कोई प्रभावशाली व्यक्ति पनपेे।  अगर ऐसा होता रहा तो न लंबे समय तक राजनीति चल पायेगी न अपना कार्यकर्ताओं में वजूद रहेगा। प्रतिद्वंदी रहने से कार्यकर्ताओं का धु्रवीकरण होता है, जिसके कारण भविष्य में मनवांछित राजनीति में पारिवारिक लाभ मिलना असंभव  है। श्री सुन्दर लाल पटवा की चाणक्यनीति के वारे में सब जानते है। ऐतिहासिक उदाहरण साक्ष्य है कि जिन्होंने अपने कार्यकाल में अपने प्रतिद्वंद्वी रहे श्री वीरेन्द्र कुमार सकलेचा जैसे धुरन्दर नेता को ठिकाने लगाने के लिए विरोधी दल के कट्टर विरोधी श्री अर्जुन सिंह से हाथ मिलाकर लोकायुक्त का सहारा लेकर उनकी राजनीति नेस्तनाबूत कर दी थी। आज का समय भी लगभग ऐसा ही चल रहा है आज उनका शिष्य अपने प्रतिद्वंद्वीयों को दर किनार करने के लिए राजनीतिक गोंटिया बिछा रहा है। एक प्रतिद्वंदी दर किनार हो गया एक आने वाले चुनाव में सिमट जायेगा। पूरे विदिशा लोक सभा क्षेत्र में अपने प्रतिद्वंद्वी के विरूद्ध यह सुनियेजित तरीके से प्रचार कराया जा रहा है कि श्रीमती सुषमा स्वराज का दिल्ली में वजूद समाप्त हो रहा है। ये श्री मोदी का हर प्लेटफार्म पर विरोध करती है। अगर जनता इन्हें चुनाव में जिता कर लोकसभा में भेज भी देगी तो भी इन्हें श्री मोदी जी या राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजनाथ जी मंत्री नहीं बनाने वाले है। सुषमा जी श्री लालकृष्ण आडवानी की बी टीम बतायी जा रही है । उनकी टीम के अरूण जेटली पंजाब से पहली बार चुनाव मैदान में है।  वैकैया नायडू भी चुनाव लड़ रहे है। इन्हें मंत्रिमंडल में स्थान मिलेगा चूकि इन्होंने मोदी जी के सामने समर्पण कर दिया है। म.प्र. के कोटे से अधिकतम चार मंत्री बनायेे जायेंगे। जिनमें मोदी जी के नजदीकी सामान्य वर्ग से श्री प्रभात झा,अनुसूचित जाति समाज से श्री सत्यनारायण जटिया,आदिवासी समाज से श्री फग्गन सिंह कुलस्ते और मालवा से वैश्य समाज की श्रीमती सुमित्रा महाजन है। इसमें क्षेत्र और सामाजिक जातिगत संतुलन भी बन जायेगा। सुषमा जी का नाम मोदी जी की विरोधी लोगों की सूची में है। इस कारण चुनाव जीतने के बाद भी एक प्रतिनिधि से ज्यादा कुछ नहीं रहने वाली है। चुनाव के समय सुनियोजित प्रचार यह भी कराया जा रहा है कि सुषमा जी ने पूरे कार्यकाल में कभी भी 24 घण्टे विदिशा में नहीं गुजारे है। इनका विदिशा संसदीय क्षेत्र में कोई स्थायी कार्यालय भी नहीं है।  ये आती है ,दो चार दस घण्टे क्षेत्र में दौरा करती है और भोपाल में रात्रिविश्राम करके मंत्रियों से मिलती है और दिल्ली चली जाती है। इस कारण कार्यकर्ता के लिए भी अछूती है। उनसे कोई आम आदमी या भाजपा का साधारण कार्यकर्ता मुलाकात नहीं कर सकता है। किसानों की ओले पाले की समस्या के समय भी ऐसा ही व्यवहार रहता है। अर्थात इनका क्षेत्र की जनता और क्षेत्र की समस्या से कोई सरोकार नहीं है। जबकि श्री शिवराज सिंह चौहान दिनरात जनता के बीच बने रहते है। और भाभी श्रीमती साधना सिंह तन-मन-धन से कार्यकर्ताओं का विदिशा में रहकर सहयोग करती है और उनका मनोबल भी बढ़ाती रहती है। केन्द्रीय स्तर पर भी कोई लाभ क्षेत्र की जनता को नहीं दिला पायी। एक मेमो ट्रेन भी मिली तो वह भी सुविधाविहीन और पैसेन्जर गाड़ी को बन्द कराने के बाद । इसके विपरीत गंजबासौदा से कांग्रेस विधायक श्री निशंक जैन का भी गुणगान भाजपा के कार्यकर्ताओं द्वारा कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि उन्होंने चन्द दिनों में एक विधायक की हैसियत रखते हुए भी पांच रेल गाडिय़ों के स्टापेज करा दिये है। इनका स्वागत क्षेत्र की जनता ने जोर शोर से किया था। अर्थात पूरे क्षेत्र में वही प्रचार प्रसार हो रहा है जो श्री शिवराज सिंह चौहान और उनके समर्थक चाहते है। हालॉकि इसके लिए एक रणनीती चल रही है। इस रणनीति से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यदि सुषमा जी चुनाव मामूली वोटों से जीतती है तो सिर्फ सदस्य बना कर दर किनार कर उनके अस्तित्व को सुश्री उमाभारती की तरह जीर्ण क्षीण कर  दिया जायेगा और यदि चुनाव हारती है तो श्री शिवराज सिंह चौहान श्री नरेन्द्र मोदी के प्रथम पंक्ति के चहेतों में शामिल हो जायेंगें। अगर भविष्य में प्रदेश में मुख्यमंत्री बने रहे तो ,आगामीे चुनाव में साधना सिंह  प्रबल दावेदार बनकर उभर कर आयेगी। और यदि केन्द्र में मोदी की टीम में जगह मिली तो विदिशा सीट  निर्विवाद स्वयं के लिए वॉकओवर करने के लिए सुरक्षित हो जायेगी। अभी श्रीमती साधना सिंह को संवैधानिक अनुभव के लिए विदिशा से विधानसभा उपचुनाव में प्रत्याशी बनाये जाने की संभावना प्रबल है। सुषमा जी का नाम उन प्रकरणों में भी उभार कर सामने लाया जा रहा है ,जिसमें प्रदेश के बाहर के लोगों ने विदिशा संसदीय क्षेत्र की सरकारी जमीन की रजिस्ट्रियॉ करायी और बैको से मोटी रकम लेकर गायब हो गये । वहीं रायसेन जिले के किसान भी अपनी जमीनों पर बिना ऋण लिये ही ऋण का बोझा ढोने अथवा आत्महत्या करने को विवश है । यहां भी किसानों के साथ किये गये फर्जीवाड़े में सुषमा जी ने कोई भी साथ नहीं दिया है। यहॉ पर चिन्हित और प्रायोजित मीडियाकर्मी सिर्फ श्री शिवराज सिंह चौहान के क्षेत्र के दौरे की गुणगान गाथा ही प्रकाशित कराते है। अब देखना यह है कि इस भाजपा के आंतरिक ध्रुवीकरण में श्री शिवराज सिंह चौहान राजनीतिक चौसर पर अपनी कौन सी अगली चाल चलने वाले है।


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