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घर- घर पल रहा राष्ट्रीय पक्षी मोर!

घर- घर पल रहा राष्ट्रीय पक्षी मोर!

सिवनी [अखिलेश दुबे ] देश के राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण के लिए भले ही देश व्यापी प्रयास हो रहे हों पर सिवनी जिले के एक गांव में यह पक्षी, मुर्गे-मुर्गियों के साथ दाना चुगता दिख जाता है। गांव में खुलेआम राष्ट्रीय पक्षी मोर घरों-घर घूम रहा है, पर वन विभाग को इसकी सुध लेने की फुर्सत नजर नहीं आ रही है। लखनादौन तहसील के ग्राम जोबा में यह नजारा आम ही हो चुका है।
तहसील मुख्यालय से नरसिंहपुर की ओर १८ किमी दूर फोरलेन से सटे ग्राम जोबा में देश का राष्ट्रीय पक्षी मोर घरों तथा सड़कों पर विचरण करते यूं ही नजर आ जायेंगे। यह नजारा आपको चौंकाने वाला लगेगा कि विलुप्त प्रजाति जो आज के परिवेश में नष्ट होने की कगार पर है, तथा देश और राज्य की सरकारें जिनके संरक्षण पर लाखों रूपए फूंक रही हैं।
जी हां, यह वही पक्षी है जिसे देश का राष्ट्रीय पक्षी होने का गौरव प्राप्त है। वह अपने प्राकृतिक परिवेश को छोड़कर आबादी वाले क्षेत्र के घरों तथा सड़कों पर मुर्गियों के साथ विचरण करते तथा ग्रामीण माहौल में मुर्गियों के तरह रह कर पल बढ रहे हैं। सुनने में यह अजूबा ही लगता है, पर है यह सौ फीसदी सत्य।
बताया जाता है कि जोबा गांव के आसपास जंगल लगा हुआ है,जहां से ग्रामीण लकड़ी बंटोरने जाते हैं, और साथ ही मोर के अण्डों को उठाकर ले आते हैं। बताते हैं कि इन अंडांे को मुर्गियों के अण्डों के साथ रख दिया जाता है, जिसे मुर्गी अपना अण्डा समझकर उसे फोड़ती है और उन अण्डों से मोर के बच्चे निकलने के बाद मुर्गियों के बच्चों के साथ पल बढ़ रहे है, घूम रहे हैं, खा पी रहे हैं।
इस गांव में मोर पालने का क्रम पिछले ४-५ सालों से चला आ रहा है। फोरलेन से सटे गांव से अनेक प्रशासनिक अधिकारी आये गये। अभी विगत विधानसभा चुनाव के पूर्व स्वयं प्रदेश के निजाम शिवराज सिंह चौहान भी इस गांव के करीब आदेगांव पंचायत में आए थे। शिवराज सिंह चौहान के आगमन के बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों की फौज की नजर, इन नजारों पर न पड़ पाना आश्चर्यजनक ही माना जा रहा है।
वही लखनादौन नगर की सामाजिक संस्था निश्छल वेलफेयर सोसायटी के सदस्यों को जब जानकारी मिली तो उनके द्वारा इस बात को गंभीरता से लेकर गांव वालों को राष्ट्रीय पक्षी के महत्व का समझाया जा रहा है। उन्हें यह काम करने से रोका जा रहा है। संस्था की अध्यक्ष श्रीमती अर्चना तिवारी ने चर्चा के दौरान बताया कि गांव की अशिक्षित गरीब लोग अज्ञानता एवं उत्सुकता के चलते यह कार्य कर रहे हैं। उन्हंे जरा भी इस बात का अंदेशा नहीं है कि यह कार्य एक बडे़ अपराध की श्रेणी में आता है।
वनाधिकारियों को भी जोबा गांव में मुर्गे मुर्गियों के साथ घूमते फिरते इन मोर को देखकर बच्चे आनंदित जरूर होते हैं, पर जिस पक्षी के संरक्षण के लिए देश प्रदेश की सरकारों द्वारा लाखों करोड़ों रूपए खर्च करने के बाद भी सिवनी जिले में इनके संरक्षण के लिए सिवनी में प्रशासनिक स्तर पर प्रयास न किया जाना आश्चर्यजनक ही माना जाएगा।


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