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मध्य प्रदेश में निष्पक्ष चुनाव!जनता की नजर में पूर्णत: संदेहास्पद ।

                  मध्य प्रदेश में निष्पक्ष चुनाव!जनता की नजर में पूर्णत:  संदेहास्पद ।
         (सत्तासीन सरकार ने आर.परशुराम की मंडली के साथ जमा दी सांठ-गांठ की चौसर )
भोपाल (पं.एस.के.भारद्वाज)म.प्र.में चुनाव व्यवस्था को लेकर जिस प्रकार प्रचारित किया जा रहा है वह केवल चुनिन्दा प्रायोजित मीडिया हाउस और बड़े शहरों एवं जिला स्तर तक के शहरों तक प्रचार का एक परम्परागत कार्य है । जिस प्रकार के निष्पक्ष चुनाव और प्रत्येक वोटर को जागरूक करने के लिए जोर शोर से शहरों में प्रचार प्रसार कराया जाता है,वह एक तरह से सत्तासीन सरकार का ही अपने शुभ लाभ में क्रियान्वयन कराने का तयशुदा योजनाबद्ध एक कार्यक्रम है। कहने को तो निर्वाचन आयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक प्रभावशाली निष्पक्ष संस्था है।  अगर कुछ स्थान और श्री टी.एन.शेषन के  कार्यकाल को अपवाद स्वरूप छोड़ दें तो कभी भी चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही है। राज्य निर्वाचन कार्यालय और जिला निर्वाचन अधिकारी में वे ही लोग नियुक्त किये जाते है जो सत्तासीन सरकार के खास मुॅह लगे होते है। जिलों में पदस्थ जिला कलेक्टर तो एक तरह से सत्तासीन सरकार का गुलाम होता है। तो उसके अधीन चुनाव और निर्वाचन में नियम प्रक्रिया का पारर्दिशा के साथ पालन करने की कल्पना करना भी बेईमानी होगी । अधिकांश जिलों में  प्रमोटी आई.ए.एस.और आई.पी.एस.पदस्थ है। कई जिलों में तो पुलिस अधीक्षक आई.पी.एस. न होकर राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी बैठा रखे है। इसी प्रकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपने चुनाव में अपने प्रतिनिधि को चुनने के लिए निरक्षर ,दूर अंचल ,छोटे मझोले टोले,वनग्रामों के निवासी नागरिकों को उनके अधिकार एवं भय लोभ मुक्त रहकर अपने अधिकार का उपयोग करने के लिए आयोग के प्रचार कार्यक्रम पूर्णत: फेल रहे है साथ ही पक्षपात पूर्ण और आज क्षेत्रीय विधायकों के प्रभाव में है। म.प्र. में गत माह 26-27 अक्टूवर को  नवंबर 2013 में होने जा रहे विधान सभा चुनाव व्यवस्था की समीक्षा करने लिए भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री वी.एस. संपत आये थे । उन्होंने निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए प्रदेश में अधिकारियों की जो गाईड लाईन मीडिया के सामने रखी वह खबर छापने के लिए बहुत अच्छी थी परन्तु आंखो के सामने मौजूद व्यवस्था देखकर कोई नहीं कह सकता कि चुनाव प्रचार प्रसार,भय मुक्त वातावरण और धनबल,बाहुबल का उपयोग नहीं होगा। निष्पक्ष चुनाव के लिए जिस प्रकार अधिकारी और कर्मचारियों की पदस्थापना भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त राज्य निर्वाचन कार्यालय की सहमती से की जा रही है वह पूर्णत: संदेहास्पद है। जिसमें चाहे वरिष्ठ अधिकारी श्री आर.परशुराम हो,जिनके कार्य काल में भ्रष्टाचारियो संरक्षण देने के लिए ,सूचना का अधिकार कानून का खूब बलात्कार कराया,लोकायुक्त की 2008 से वाद एक रिपोर्ट तक बाहर नहीं आने दी,महालेखा परीक्षक(सी.ए.जी.) म.प्र.की रिपोर्ट को 2010 से दबाये बैठे रहे और राज्य आर्थिक अपराध के मामलों के थानों में सभी जांच कार्यवाही पूर्ण होकर 15-15 साल से धूल खा रहे  प्रकरणों को न्यायालय पहुंचने से रोकने में पूरी ताकत झोंकते रहे। म.प्र. में फरबरी 2012 से भ्रटाचार के निराकरणों के एक साल में फैसला देने के लिए नियुक्त विशेष न्यायालयों में चालान पेश होने से रोकने के लिए भ्रष्टाचारियों से सौदेबाजी कराते रहे परन्तु अपने पद पर रहने तक न्यायालय में कोई चालान पेश नहीं होने दिये। ऐसे आचरण वाले अधिकारी की तारीफ सिर्फ कोई भ्रष्ट लोक सेवक ही कर सकता है। और उसका प्रमोशन तथा मान सम्मान बरकरार रखने के लिए अपने शुभ लाभ के साथ हर संभव प्रयास करता है यही प्रयास मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहाननीत सरकार की भ्रष्ट मंडली ने किया है।  इसी प्रकार श्री मनोज श्रीवास्तव (प्रमुख सचिव मु.मं.कुछखास व्यवहार के लिए विख्यात)के शिष्य भोपाल के निवासी एवं श्री कलेक्टर निशांत बरबडे हो या मुख्यमंत्री और हरसूद विधायक के खास और खण्डवा कलेक्टर श्री नीरज दुवे जैसे दर्जनों दागी अधिकारी है जो संपूर्ण प्रदेश में पदस्थ है।
यह कहना कोई अतिशियोक्ति नहीं होगी कि निर्वाचन की हर एक प्रक्रिया प्रचार-प्रसार नियम प्रक्रियाओं का पालन,कानून व्यवस्था,और निष्पक्ष समय सीमा में निणर्य लेना या ना लेना सब कुछ मुख्यमंत्री निवास और भाजपा कार्यालय से ही वर्तमान व्यवस्थानुसार संचालित होता रहेगा। अर्थात परिणाम वे ही आयेगें जैसे भाजपानीत सत्तासीन सरकार चाहेगी । गतवर्ष 2008 का निर्वाचन और परिणाम इसका साक्षात् प्रमाण है।  भाजपा का नारा है हम चुनाव में नहीं जा रहे है हम युद्ध मैंदान जा रहे है इसका आशय है कि जनता अपने प्रतिनिधि का अपने मन से  चुनाव नही करेगी बल्कि से जो चाहेंगें जनता से वह ही करायेंगें । उसके लिए तन,मन,धन,एवं गन से लैस होकर प्रयत्न करेंगें। युद्ध में जीत के लिए कोई नीति या नियम नहीं होता सिर्फ एक ही लक्ष्य होता है अपनी जीत। उसमें भले ही कहीं किसी भी स्तर तक जाना पड़े। इसकी पूरी राजनीतिक चौसर बिछकर तैयार हो गयी है सिर्फ समय आने पर शकुनी रूपी मामा पांसा फेंकेगें और धृतराष्टों की संतानें सत्तासीन हो जायेंगीं इस युद्धरूपी चुनाव में पितामह भीष्म जैसे लोग पुन: अपनी परिवार की वधु का चीर हरण अपनी नग्र ऑखों से देंखेगे। इस वार नारा था कि नारा था कि हम स्वर्णिम मध्य प्रदेश बनायेंगे अब उसमें जुड़ कर हो गया है -                                 हम भ्रष्ट स्वर्णिम मध्य प्रदेश बनायेंगें                 
                                   शिवराज मामा नहीं लंकेश कहलायेंगे


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