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शिवराज जी प्रदेश की जनता को बतायें माफिया की परिभाषा आपकी नजर में क्या है! लक्ष्मीकांन्त शर्मा का सच कबूलें तो जनता का अशीर्वाद अवश्य मिलेगा।

   भोपाल (एस.के. भारद्वाज)पूरे भारत में मध्य प्रदेश में हो रहे शिक्षा शिक्षा क्षेत्र के फर्जीवाड़े की चर्चा हो रही है रोजाना नये-नये खुलासे हो रहे है मेहनत करने वाले छात्र परेशान है । भरोसे में लाखों रूपये खर्च करके अभिभावक परेशान है । पुलिस ने कुछ चुनिन्दा लोगों को गिरफ्तार करके जांच प्रारम्भ करदी है।  देखने और सुनने में तो लगता है कि सरकार बडी ईमानदारी से काम कर रही है,परन्तु सोचना गलत होगा । मध्य प्रदेश का शायद ही कोई विश्वविद्यालय ऐसा होगा जिसका काम नियमानुसार होगा अपवाद स्वरूप एकाध को छोड दें तो अधिकांश की कार्यप्रणाली उच्च काेिट की राजनीतिक महत्वाकांक्षा और दलाली पर टिकी है। स्वाभविक है ऐसे संस्थानों में नौकरी करने वाले प्रमुख जिम्म्ेदारी वाले भारसाधक कर्मचारी उच्च स्तरीय सत्तासीन राजनेताओं के संपर्क में रहते है। चूंकि वर्तमान परिवेश में नौकरी करनी है तो मंत्री जी का अशीर्वाद जरूरी है। और मंत्री जी कोई भगवान तो है नही तो फूल पत्ती सूॅघकर काम चला लेंगें और खुश हो जायेंगें। स्वाभाविक है उन्हें राजनीति दल , मुख्यमंत्री का मासिक वचन ,चुनावी व्यय और समय-समय पर जनता के बीच जाने के लिए आभामंडलीय रथ की आवश्यकता होती है। इन आवश्यकता रूपी प्रतिस्पर्धा में जो भी कर्मचारी पास हो जायेगा । उसे ही पद रूपी योग्यता का प्रमाण पत्र मिलेगा । हालांकि ऐसा नहीं है कि म.प्र. में ही इसका प्रचलन है बल्कि दूसरे राज्यों में भी उदाहरण है । हरियाणा राज्य के तो एक पूर्व मुख्यमंत्री अपने पुत्र एवं दल बल के साथ जेल की हवा खा रहे रहे है। म.प्र. में थोड़ा सा अन्तर है उन राज्यों में भाजपा विपक्ष में रह कर मजबूती से तर्कसंगत विरोध करती है और भाजपा द्वारा शासित राज्यों में एक जुट होकर भ्रष्टाचार करने में तन मन धन और गन के साथ जुट जाती है। जमीन पर जनता को कैसे समझाना है कैसे गुमराह करना है इसके लिए इनके पास विशेष प्रशिक्षण प्राप्त बहुत बड़ा संख्याबल है ।  इसी का कारण है कि वर्षो से चलता आ रहा शिक्षा जगत का फर्जीवाड़ा अनेकों बार उजागर होने वाबजूद उस पर अंकुश नहीं लगा,बल्कि और उसमें साल-दर साल विस्तार हुआ है। इस भ्रष्ट व्यवस्था का लाभ उन कार्यकर्ताओं को मिला जिनकी आस्था जनसेवा में नहीं जल्द से जल्द धनवान बनने में थी। जिनकी आस्था जन सेवा थी वे आज भी ऐसे ही है । अनेकों भाजपा के कार्यकर्ता ऐसे मिल जायेंगे जो भाजपा शासन के पूर्व फुटपाथ पर बैठकर चने खाते थे अपने वरिष्ठों का बैठकर इन्तजार करते थे कि चूंकि उनके आने के वाद पार्टी का संदेश मिलता था और चाय नास्ता भी मिल जाता था। कई ऐसे कार्यकर्ता है जो किसी प्रेस के दफ्तर में अपना समाचार छपवाने के लिए दूसरे के वाहन का सहारा लेते थे । और अपने वरिष्ठ नेता के साथ फोटो के साथ खबर छपवाने के लिए प्रेस के दफ्तर में गिड़गिडाते थे। लेकिन आज म.प्र. की शिवराजनीत भाजपा सरकार ने तस्वीर बदल दी है। पार्टी के दलालरूपी महत्वाकांक्षी भाजपा के कार्यकर्ताओं को विश्वविद्यालयों में लगा दिया है। कई कार्यकर्ता पत्रकार बनकर मंत्रालय और संचालनालयों में दलाल बनकर वे आज भ्रष्टाचार में ईमानदारी निभाते हुए कार्य कर रहे है । जिसके कारण कल का फुटपाथी कार्यकर्ता पैदल नही स्कार्पियों और सफारी में चलता है। आज वह कोई साधारण मकान में नहीं किसी पॅाश एरिया की कॉलोनी में निवास करता है। मंत्री महोदय आज सिरोंज के सरस्वती शिशु मंदिर में मास्टर जी नहीं। और ना ही कोई कमजोर नेता जो पहले  की तरह फर्जावाड़ा पकड़कर मुकद्दमा दर्ज कर ले।  आज वे अघोषित एक तकनीकी विश्वविद्वालय के मालिक है। अघोषित रूप से सैकड़ों एकड़ भूमि सहित एक राजनीतिक रियासत के राजा है। आज वे सिंरोंज के कोई पहलेे वाले आम आदमी नहीं है उनके नाम से पूरा क्षेत्र भय क े कारण चहुॅओर जय घोष करता है। क्या मजाल कि कोई उनकी मर्जी के खिलाफ निकाले । क्षेत्र में चाहे हिन्दुत्व वाले पशुधन व्यापार हो,अवैध कारोवार या हो भ्रष्टाचार अथवा किसी गरीब के साथ अत्याचार चाहे किसी नावालिग के साथ ज्यादती ही क्यो न हुई हो कोई भी आवाज नहीं निकाल सकता । इनके वारे में चर्चा है कि इनके ऊपर राघौगढ़ किले निवासियों की कृपा है जिसके कारण इन्हें रामायण के पात्र बाली जैसी दोहरी शक्ति प्राप्त है। वे जाने जाते है शिक्षा जगत और खनन कारोवार के भ्रष्टाचारी जगत के पितामह ,वे जाने जाते है । बड़े मीडिया हाउस मालिकों को खरीदकर पटाने के लिए,वे जाने जाते है सही खबर चलाने वाले पत्रकारों को ठिकाने लगाने के लिए। इनके पास वह हर शक्ति है जो ऐक राजसी सामंत के पास होती है। अगर नहीं है तो इनके पास परिवार का सुख ना परिवार में चारित्रिक संपन्नता । ऐसे ही अनेकों कारण है जो शिवराजनीत भाजपा  में शिक्षा माफिया पनप रहा है बल्कि यह कहना भी कोई अतिश्योक्ति नहीं होगा कि सरकार माफिया पाल ही नहीं रही बल्कि सरकार में बैठे लोग स्वयं एक माफिया की तरह काम कर रहे है।


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