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शिवराज जी जनता को गुमराह मत करो।

Pt.SK Bhardwaj शिवराज सिंह चौहान जनता को गुमराह कर रहे है जनता से न संवाद करने जाते है न आर्शीवाद मांगने जाते हैं । जनता को अपने ब्रान्डों का प्रचार करने जाते है,संवाद दोनों ओर से होता है एक तरफा नहीं और आशीर्वाद मांगने के लिए दाता के सामने झुकना पड़ता है,दाता की अपेक्षाऐं मालुम करनी पड़ती है ना कि डेढ़ करोड़ के रथ पर चढ़कर ,दूर से हाथ हिलाने से और ना छलकपट से ना हिन्दुओ के पिटवाने से ना पत्रकारों का माफिआओं के द्वारा मुंह बन्द कराने से । शिवराज जी जनता के बीच अपने राजनीतिक कमान्डरों की कंपनी के साथ स्वयं ही बोलते है जनता को सिर्फ अपने भाषण सुनाते है। ये संवाद वाला निष्पक्ष लोकतंत्र नहीं है ,बल्कि गुमराह करने वाला ब्रान्ड प्रचार तंत्र चला रहे है। ऐसा कार्य केवल मल्टीनेशनल कंपनियां की करती है। राजनीति कंपनी नीति से नही चलती। और ना ही उद्योग पतियों के दलाल बनने से ।
 म.प्र.में आ-आ कर भाजपा के शीर्ष नेता पानी पी-पी कर मंहगाई के नाम पा कांग्रेस को कोस कर जनता को बेवकूफ समझ रहे है। जबकि सच यह है कि महंगाई की देन में काग्रेस और भाजपा समान रूप से शरीक है । उदाहरण के तौर पर देखें शिवराज जी के उद्योगपति मित्र अनिल अंबानी के रिलायन्स ग्रुप के पास हरी ताजा सब्जी फल आदि बिक्री करने का लायेंसेस है इनके पास करीब 2000 गोदाम है प्रत्येक गोदाम में रखी औसतन 5 टन प्याज मानलें तो इनके पास 10000 (दस हजार) टन प्याज स्टोर है। इसके अलावा ईचौपाल,बेस्टप्राइज जैसी सैकड़ों कंपनियां स्टॉक करके बैठ गयी है । ऐसी ही अनेकों दैनिक खाद्य सामिग्री है जो इन कंपनियों ने स्टोर कर रखी है । भारत के किसानों ने देश के लिए भरपूर अन्न उगाया है परन्तु देश के शिवराज सिंह चौहान जैसे नेता कंपनियों की ब्रान्डिंग करेगे तो मंहगाई को कौन रोकेगा।इनका तरीका भी बहुत निराला है पहले विरोध करते है बाद में उसी की ब्रांडिंग करके फलने फूलने का लाइसेंस दे देते है। और जनता को बेवकूफ समझकर भाषण देते है कि मंहगाई विपक्षी पार्टी की देन है। ये जनता को क्यो नहीं बताते कि महंगाई और भ्रष्टाचार हमारी साझी राजनीतिक दलाली की देन है। इन मल्टीनेशनल कंपनियों को भारत में व्यापार करने का लायसेंस केन्द्र सरकार ने दिया है तो उन्हें अपने राज्य में फलने फुलने का अधिकार कमीशन खाने के लिए राज्य सरकार ने । मानते है जनता सीधी है मगर अनजान नहीं है।


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