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मुख्यमंत्री से शिकायत करने की बात पर मंत्री केएल अग्रवाल पर बरसा आईएएस अधिकारी

भोपाल [हरीश]। विधानसभा परिसर में सामान्य प्रशासन मंत्री केएल अग्रवाल और उनके विभाग के कार्मिक सचिव अश्विनी राय के बीच सोमवार को बैठक के दौरान जमकर झड़प हो गई। अपनी उपेक्षा से व्यथित मंत्री ने जब नौकरशाहों को लेकर अपनी भड़ास उतारते हुए मुख्यमंत्री से शिकायत करने की बात कही थी, तो राय उन पर भड़क पडे़। कहा कि सीएम के नाम पर ना धमकाएं। वे अभी उनके साथ सीएम के पास चलने को तैयार हैं।

दरअसल विस के बजट सत्र के दौरान पूछे गए सवालों की ब्रीफिंग के लिए मंत्री ने अफसरों की 19 फरवरी को बैठक बुलाई थी।

सूत्रों के मुताबिक बैठक के दौरान मंत्री के मन की टीस अचानक बाहर निकली। उन्होंने कार्मिक सचिव से कहा कि आपने मुझे कभी अपना मंत्री माना ही नहीं। मैने जिन अफसरों के तबादले की नोटशीट आपको भेजी उस पर कार्रवाई करने की बजाए उनको [अफसरों] आप धमकाते हैं। यह सुनते ही आईएएस राय भ़़डक उठे। टेबल ठोककर तेज आवाज में बोलते हुए उन्होंने कहा कि मुझे इन आरोपों पर घोर आपत्ति है। रही बात तबादले और पदस्थापनाओं की तो यह मैं तय नहीं करता मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तय करते हैं।'

दिलचस्प कहानी है विवाद की

सूत्रों के मुताबिक विवाद की शुरूआत की कहानी भी दिलचस्प है। विधानसभा प्रश्नों की तैयारी के लिए जो बैठक बुलाई गई थी उसमें 20 फरवरी को प्रश्नकाल में समाहित दो सवालों पर चर्चा होना थी?

बैठक में जीएडी प्रमुख सचिव राजेश चतुर्वेदी ने कहा कि जो दो प्रश्न लगे हैं उनमें से एक सामान्य प्रशासन का तथा दूसरा विभाग की कार्मिक शाखा का है। इस पर सचिव कार्मिक अश्विनी राय ने कहा कि वैसे तो दोनों ही जीएडी के हैं, कार्मिक भी तो उसी का अंग है। इतना सुनते ही राज्यमंत्री लाल पीले हो गए उन्होंने कहा कि पहले तो आपने कभी भी अपने आप को जीएडी में माना नहीं फिर आज क्यों।

राज्यमंत्री ने कहा कि कार्मिक सचिव बनने के बाद आप एक बार भी मुझे [काल ऑन] मिलने नहीं आए। आप अपने आप को समझते क्या हैं, मैं अब अपनी और उपेक्षा सहन नहीं कर सकता। मैं मुख्यमंत्री को बताऊंगा कि आप जनप्रतिनिधियों के साथ किस तरह का व्यवहार करते हैं।

इस पर राय ने कहा कि मंत्रीजी मुझे मुख्यमंत्री के नाम की धमकी देने की जरूरत नहीं है। चलिए मैं भी आपके साथ चलता हूं। आखिर उन्हें भी तो पता चले कि आप विभागीय परामर्शदात्री की बैठक में विधायकों से किस तरह तबादले और पोस्टिंग के मामले उठवाते हैं। उन्होंने क हा कि उन्हें सब पता है कि इन तबादलों के पीछे क्या चलता है।

बात बढ़ते देख बैठक में मौजूद सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव आरके चतुर्वेदी ने मामले को शांत करने का भरसक प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। अग्रवाल ने मौके की नजाकत को देखते हुए मामले को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने कहा ' हमारा क्या है हम तो राजनेता हैं। आज सीट पर हैं कल नहीं। कल जब सत्ता में नहीं रहेंगे तो आपसे सर कहकर ही काम कराना होगा।' लेकिन राय इस पर भी नहीं माने उन्होंने मंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सही बात है पहले गाली दो फिर सर कहो।' राज्यमंत्री और आईएएस अफसरों की तू-तू मैं-मैं देखकर जीएडी प्रमुख सचिव, उप सचिव स्तर के अधिकारी और राज्यमंत्री के स्टाफ के लोग स्तब्ध थे।

मीडिया के लिए नहीं

केएल अग्रवाल, राज्य मंत्री, सामान्य प्रशासन विभाग मप्र शासन भोपाल ने बताया कि हमारे बीच कक्ष में जो बात हुई थी वह मीडिया के लिए नहीं है। जो भी बात होगी उचित फोरम पर बात करके उसका निपटारा कर लेंगे।

अफसरों से पीड़ित मंत्रियों की लंबी है फेहरिस्त

प्रदेश में हर दूसरा मंत्री अपने विभागीय अफसर से पीड़ित हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री अफसरों को अधिक तवज्जो देते हैं यही कारण कि वे मंत्री को भाव नहीं देते। इनमें प्रमुख रूप से पर्यावरण एवं जलसंसाधन मंत्री जयंत मलैया का नाम सबसे ऊपर है। इनके दोनों प्रमुख सचिव राधेश्याम जुलानिया और इकबाल सिंह बैंस मुख्यमंत्री के करीबी माने जाते हैं।

इसी प्रकार वन मंत्री सरताज सिंह शुरुआत से परेशान रहे हैं। उनके कार्यकाल में अब तक जितने प्रमुख सचिव रहे हैं वे उनकी बात ही नहीं सुनते। वर्तमान में बीपी सिंह प्रमुख सचिव वन हैं।

गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने तो अब नोटशीट पर अपनी टीप लिखना ही बंद कर दिया है कारण कि उनके द्वारा जितनी बार भी नकारात्मक टीप लिखी गई उसे अफसर मुख्यमंत्री समन्वय में जाकर सकारात्मक करा लाते हैं। नरोत्तम मिश्रा, करण सिंह वर्मा, नागेन्द्र सिंह, राजेन्द्र शुक्ला और गोपाल भार्गव भी अपने विभागीय अफसरों से खासे परेशान हैं।


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