Bookmark and Share 1500 करोड़ का घोटाला, राजभवन ने नहीं की कार्यवाही                फर्जी डाक्टरों का सरगना डॉ.अभिमन्यु सिंह                पद़माकर त्रिपाठी को डॉ. नही सफेद एप्रिन का गिद्ध कहिए !                    
मजदूरी पर रखना और निकाल देना की नीति, नियम विरुद्ध है

-सुप्रीम कोर्ट ने पीएसयू से कहा
नई दिल्ली । सार्वजनिक क्षेत्र की एक वंâपनी के कर्मचारी को नियमविरुद्ध नौकरी से निकाल दिये जाने के 32 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने वंâपनी को आदेश दिया है कि वह उसके बकाया वेतन का 60 प्रतिशत उसके कानूनी वारिसों को भुगतान करे।

बाल्मेर लॉरी इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड (बीएलआईएल) द्वारा पार्थसारणी सेन रॉय को दिये गये नियुक्ति पत्र के वाकयांश हायर एंड फायर मजदूरी पर रखना और निकाल देना) को गैर कानूनी निरुपित करते हुए जस्टिस बी.एस.एस चौहान और जस्टिस वी.गोपाल गौडा की बैंच ने यह आदेश दिया है। कि कर्मचारियों के वैध वारिस दारों को सभी कानून लाभ जैस ग्रेच्युटी, प्राविडेंट पंâड व पेंशन आदि प्राप्त करने का हक हासिल है। आदेश में कहा गया है कि यदि तीन माह के अंदर भुगतान नहीं किया गया तो 9प्रतिशत की दर स ब्याज भी देय होगा। गौरतलब है कि रॉय को 27 फरवरी 1981को 6 साल की सेवा के बाद नौकरी से निकाल दिया गया था। मुकदमे के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। नौकरी से निकाले गये कुछ अन्य कर्मचारियों को भी कोर्ट के इस निर्णय का लाभ मिलेगा। इस मामले में एक कानूनी पेंच यह था कि सार्वजनिक क्षेत्र की वंâपनी बीएलआईएन संविधान के आर्टिकल 12 के प्रावधानों के तहत शासनाधीन के दायरे में आती है या नहीं यदि वंâपनी स्टेट की श्रेणी में नहीं आती है तो उसके खिलाप याचिका दायर नहीं की जा सकती। वंâपनी के गठन, उद्देश्य, कार्यशैली, प्रबंधन एवं नियंत्रण तथा प्राप्त होने वाली वित्तीय सहायता जैसे पहलुओं पर गौर करने के पश्चात सुप्रीम कोर्ट कलकत्ता हाईकोर्ट के इस निर्णय से सहमत हुआ है कि वंâपनी स्टेट की श्रेणी में आती है और उसके खिलाफ याचिका दायर की जा सकती है।


Email (With coma separated ) :
You can Advertisment here
संपर्क करें      मेम्बेर्स      आपके सुझाव      हमारे बारे मे     अन्य प्रकाशन
Copyright © 2009-14 Swarajya News, Bhopal. Service and Private Policy