Bookmark and Share डिजिटल भुगतान से वैश्यावृत्ति के व्यापार में कमी के आंकड़ों से बौखलाये ,मोदी के दूत रविशंकर प्रसाद                मंत्री है या भ्रष्टाचारियों के दलाल                 मोदी के राज में पत्रकारों की आवाज की जा रही बंद, फिर भी चाटुकार बजा रहे बीन                एस्सार समूह ने केंद्रीय मंत्रियों और अंबानी बंधुओं के फोन टैप कराए                1500 करोड़ का घोटाला, राजभवन ने नहीं की कार्यवाही                फर्जी डाक्टरों का सरगना डॉ.अभिमन्यु सिंह                मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं भ्रष्टाचारियों के सरगना कहिए !                पद़माकर त्रिपाठी को डॉ. नही सफेद एप्रिन का गिद्ध कहिए !                    
होमगार्ड का यह दर्द,ड्यूटी करने को रिश्वत देनी पड़ती है।

होमगार्ड का यह दर्द,ड्यूटी करने को रिश्वत देनी पड़ती है।


आगरा: 'साहब! यह ऐसा महकमा है, जहां वेतन मिलने से पहले ड्यूटी करने को रिश्वत देनी पड़ती है।' नाम नहीं छापने की शर्त पर एक होमगार्ड का यह दर्द विभाग की कहानी बताने के लिए काफी है।

चौबीस साल पहले होमगार्ड को आठ रुपए प्रतिदिन भत्ता मिलता था। जो १५ फिर २० से २५ और ३० से चालीस रुपए तक पहुंचा। पांच साल पहले सौ रुपए करने के बाद दो साल यह १६० हो गया। जिले में होमगार्ड की ३२ कंपनी हैं, इनमें चार महिलाओं की हैं। होमगार्डो की दयनीय स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है ड्यूटी पूरी करने के दो से तीन महीने बाद भत्ता मिलता है। वर्दी भत्ता तीन साल में मिलना चाहिए। लेकिन यहां पांच साल से एक पैसा भी नहीं मिला है। महिला होमगार्डो की स्थिति और भी खराब है, थानों से लेकर कार्यालयों तक में उनसे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की तरह काम लिया जाता है। कैसे हुआ गठन

१९६२ में चीन युद्ध के दौरान देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक विशेष प्रशिक्षित बल की जरूरत महसूस होने के बाद होमगार्ड का गठन किया गया था। प्रशिक्षण के बाद उनको खाकी दी गई, तब से आज तक पुलिस विभाग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपने काम को अंजाम दे रहे हैं।

बिकते हैं थाने और विभाग

मलाई वाले विभागों की विभाग में बोली लगाई जाती है। ट्रैफिक में ड्यूटी लगाने को एक हजार, शहर के थानों में पांच सौ और देहात के थानों में तैनाती के लिए दो से तीन सौ देने पड़ते हैं। सबसे ज्यादा डिमांड ट्रैफिक में जाने की रहती है, वर्तमान में ३०० से अधिक होमगार्ड ट्रैफिक में हैं। इनमें भी बाइपास और हाईवे पर ड्यूटी लगवाने की होड़ रहती है, विशेषकर सिकंदरा तिराहा, खंदारी चौराहा, सुल्तानगंज पुलिया और वाटर व‌र्क्स चौराहे पर सबसे ज्यादा मांग रहती है।

पुलिस करती सौतेला व्यवहार

वर्दी का रंग एक होने के बावजूद होमगार्ड से पुलिस सौतेला व्यवहार करती है। पंद्रह दिन पहले रविता नाम की एक महिला होमगार्ड को सेंट जोंस चौराहे पर ऑटो वाले ने अभद्रता के बाद मारपीट कर दी। उसने मामले की शिकायत वहां मौजूद पुलिसकर्मियों से की लेकिन उन्होंने ऑटो चालक को पकड़ने की जगह उसे जाने दिया। वहीं थानों में भी उनसे हर तरह की बेगार ली जाती है, बेगार से इन्कार कर दें तो थाने वाले भी आमद के नाम टहला देते हैं।

बीस साल से नहीं मना स्थापना दिवस

छह दिसंबर १९९२ को हुए अयोध्या कांड के बाद से होमगार्ड स्थापना को धूमधाम से नहीं मना सके। इस दिन उनकी ड्यूटी लगा दी जाती है, इस बार लखनऊ में होने वाली परेड और समारोह को दो दशक बाद भव्य तरीके से मनाने की तैयारी चल रही है।


Email (With coma separated ) :
You can Advertisment here
संपर्क करें      मेम्बेर्स      आपके सुझाव      हमारे बारे मे     अन्य प्रकाशन
Copyright © 2009-14 Swarajya News, Bhopal. Service and Private Policy