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छिंदवाड़ा, नैनपुर ब्राडगेज पर मंदी का ग्रहण !

छिंदवाड़ा, नैनपुर ब्राडगेज पर मंदी का ग्रहण !


नई दिल्ली [लिमटी खरे] प्रसिद्ध ब्रितानी घुमंतू और पत्रकार रूडयार्ड किपलिंग की जंगल बुकच् के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हीरो मोगलीच् की कर्मभूमि एवं सनातन पंथी हिन्दु धर्म के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती की जन्मभूमि मध्य प्रदेश के सिवनी जिले को एक बार फिर छलने की तैयारी पूरी हो चुकी है। ब्राडगेज के नाम पर सालों से झुनझुना बजाने वाले जनसेवकों की अनदेखी से अब रेल्वे की मंदी की मार छिंदवाड़ा से बरास्ता सिवनी, नैनपुर नेरोगेज के अमान परिवर्तन पर पड़ने वाली है।

वित्त मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि जनसेवकों, नौकरशाहों की विलासिता से देश का खजाना खाली हो रहा है। वित्त मंत्रालय की बार बार की फिजूलखर्ची रोकने की चेतावनियां भी फिजूलखर्ची रोकने में नाकायमयाब ही साबित हो रही हैं। मजबूरी में अब वित्त मंत्रालय को विकास की योजनाओं को रोकने की कवायद करनी पड़ रही है।

उधर, रेल्वे बोर्ड के एक उच्चाधिकारी ने पहचान उजागर ना करने की शर्त पर कहा कि भारतीय रेल की उन परियोजनाओं को जिनकी घोषणा तो हो गई है पर उन पर काम आरंभ नहीं हुआ है, की समीक्षा कर उन नस्तियों को बंद करने का मशविरा वित्त मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम ने रेल मंत्री को दिया है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि पिछले साल एक अप्रेल को आरंभ हुए वित्तीय वर्ष तक भारतीय रेल की ३०४ परियोजनाएं लंबित पड़ी हुई हैं। इन परियोजनाओं को अगर आज की दर से अमली जामा पहनाया जाए तो इनमें लगभग सवा लाख करोड़ रूपयों की वित्तीय इमदाद आवश्यक होगी।

उल्लेखनीय होगा कि भारत के महालेखा परीक्षक (कैग) ने भी पिछले साल रेल्वे की परियोजनाओं में देरी के लिए भारतीय रेल को आड़े हाथों लिया था। कैग ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि चार दर्जन से ज्यादा नई रेल लाईन और लगभग दो दर्जन अमान परिवर्तन में सर्वेक्षण का काम ही दस साल से ज्यादा समय से लंबित पड़ा हुआ है। इन परियोजनाओं में अब तक लगभग दस हजार करोड़ रूपए खर्च हो चुके हैं, पर इन परियोजनाओं के पूरा होने पर से कुहासा अभी छट नहीं सका है।

मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में ब्रितानी हुकूमत के दरम्यान बिछाई गई नैरोगेज रेल की पातों को ब्राडगेज में तब्दील करवाने के लिए सालों साल जनता ने मांग की है, किन्तु विडम्बना यह है कि इस रेल लाईन के अमान परिवर्तन के लिए अब तक के किसी भी सांसद ने (सिवनी संसदीय क्षेत्र के) इस मामले को लोकसभा में नहीं उठाया है, जो आश्चर्य जनक ही माना जा रहा है।

यहां उल्लेखनीय होगा कि छत्तीसगढ़ के कैबनेट मंत्री और बिलासपुर के तत्कालीन सांसद पुन्नू लाल माहोले २५ अगस्त २००५ को (छत्तीसगढ़ के अस्तित्व में आने के उपरांत) लोकसभा में अतरांकित प्रश्न क्रमांक ४५०२ के माध्यम से रेल मंत्रालय से यह प्रश्न पूछा था कि बिलासपुर से मध्य प्रदेश के मण्डला और नैनपुर और नैनपुर से छिंदवाड़ा के बीच रेल लाईन का अमान परिवर्तन का कोई सर्वेक्षण किया गया है?

चार कंडिकाओं में विभक्त इस प्रश्न के जवाब में तत्कालीन रेल राज्य मंत्री आर.वेलु ने अपने लिखित उत्तर में कहा था कि बिलासपुर से मण्डला फोर्ड और मण्डला फोर्ड से नैनपुर खण्ड के रेलखण्ड के अमान परिवर्तन परिवर्तन के लिए वर्ष २००३ - २००४ में सर्वेक्षण करवाया गया था। इस परियोजना की लागत ऋणत्मक प्रतिफल के साथ उस वक्त ७३६.९६ करोड़ रूपए आंकी गई थी।

इसके अलावा नैनपुर से छिंदवाड़ा के बीच सिवनी होकर १३९.६ किलोमीटर के खण्ड की छोटी लाईन से बड़ी लाईन में परिवर्तन हेतु वर्ष २००३ - २००४ में कराए गए सर्वेक्षण में यह परियोजना भी ऋणात्मक प्रतिफल के साथ २२८.२२ करोड़ रूपए (उस समय की दरों के अनुसार) आंकी गई थी। अंत में तत्कालीन रेल राज्य मंत्री आर.वेलु ने उपयुक्त प्रस्तावों को अलाभकारी प्रवृत्ति, चालू परियोजनाओं के भारी थ्रो फारवर्ड एवं संसाधनों की अत्याधिक तंगी को देखते हुए अस्वीकार कर दिया गया था।

इसके उपरांत तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और ममता बनर्जी ने भी छिंदवाड़ा नैनपुर के अमान परिवर्तन की बात बजट में घुमाफिरा कर करके सिवनी के लोगों को भरमाने का जतन किया था। अब जबकि वित्त मंत्रालय ने रेल मंत्रालय को आनगोईंग परियोजनाओं जिनकी घोषणा के बाद काम आरंभ नहीं हुआ है को बंद करने का मशविरा दे दिया है तब छिंदवाड़ा से नैनपुर के रेलखण्ड के अमान परिवर्तन का काम खटाई में पड़ता दिख रहा है।

रेल्वे बोर्ड के सूत्रों ने साफ तौर पर सांसदों की अर्कमण्यता की ओर इशारा करते हुए कहा कि सिवनी के सांसदों के.डी.देशमुख और बसोरी सिंह मसराम द्वारा सिवनी में अमान परिवर्तन की बात रेल मंत्रालय को पुरजोर और वजनदार तरीके से नहीं रखने का ही नतीजा है कि इस परियोजना में अब तक सिर्फ आश्वासन और घोषणाएं ही हो सकी हैं, इसका काम आरंभ नहीं हो पाया है। अब जबकि वित्त मंत्रालय ने पुरानी परियोजनओं के लिए रेड सिग्नल दिखा दिया है तब छिंदवाड़ा से सिवनी होकर नैनपुर के अमान परिवर्तन के काम को अमली जामा पहनाए जाने में संशय ही प्रतीत हो रहा है।

यहां एक बात का उल्लेख करना लाजिमी है कि मध्य प्रदेश के सिवनी जिले को जगतगुरू शंकराचार्य की जन्म भूमि के बतौर देखा जाता है। इसके साथ ही साथ भेडिया बालक मोगली की कर्मभूमि भी है सिवनी। सिवनी के साथ षणयंत्र कर जनसेवकों ने यहां से होकर गुजरने वाली उत्तर दक्षिण की जीवन रेखा (स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क परियोजना के अंग उत्तर दक्षिण सड़क गलियारा) को रोकने के षणयंत्र का ताना बाना बुना जिससे यह सड़क वर्ष २००८ के उपरांत बड़े बड़े गड्ढ़ों में तब्दील हो गई है। अब अगर रेल्वे के नक्शे से भी सिवनी का नाम गायब हो जाएगा तो सिवनी जिला देश में एक एसे टापू में तब्दील हो जाएगा जहां सड़क या रेल मार्ग से जाना दुष्कर ही साबित होगा।


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