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म.प्र. के मुख्यमंत्री श्री शिवराज के जमावड़े में है अनेकों पद़माकर त्रिपाठी जैसे भ्रष्ट सिंघम ,दहशतगर्द सरकारी गुण्डे ।


  म.प्र. के मुख्यमंत्री श्री शिवराज के जमावड़े में है अनेकों पद़माकर त्रिपाठी जैसे  भ्रष्ट सिंघम ,दहशतगर्द सरकारी गुण्डे ।


   म.प्र. के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान नाना प्रकार के मानवीय गुणों की खान है। लोगों को अपने मधुर व्यवहार से संम्मोहित करने की हर कला विद्यमान है। चाहे वरिष्ठों के सम्मान का माहैल हो या सामाजिक दायित्व पर परिचर्चा हो या कोई आम सभा सभी से अपने पक्ष में लोंगों से खूव करतल ध्वनि कराना आता है। वह अलग बात है कि सरकारी अमला भी ताली बजाता है उनके द्वारा किये गये रोबोट का प्रदर्शन देखकर । यह बात देश का हर आम आदमी जानता है कि मंच पर बोलना और मनमाफिक जनकल्याण की योजना को लागू कराना दोनों में जर्मी आसमां का अन्तर है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान मंच पर जिस मुद्दे को भी लेकर बात करते है,प्रदेश में काम उसके विपरीत होता है। काम वही होता है जिसमें भ्रष्टाचार की ज्यादा संभावनाऐं होती है। देश में जब श्री अटल विहारी बाजपेयी प्रधान मंत्री थे तब देश में पहली वार विदेशी व्यापार को बढ़वा देने के लिए विनिवेश मंत्रालय का गठन किया गया श्री अरूण शौरी को मँत्री बना कर विठाया गया क्योकि वे एक चर्चित मीडिया परिवार के सदस्य एवं विदेशी व्यापार जगत के विद़वान थे । चंूकि व्यापार में सब चलता है सो रातों रात हजारों विदेशी कंपनियों के साथ अनुबन्ध करके भारत बजारों में घुसा लिया। आज वही भाजपा उसका विरोध कर रही है। तत्कालीन समय में श्री शिवराज सिंह चौहान विदिशा लोक सभा क्षेत्र से संसद थे। आज विदेशी कंपनियों के सामानों से भारत के बाजार भरे पढ़े है देशी छोटी कंपनियां /फर्म देश में त्राहिमाम त्राहिमाम कर रही है। म.प्र.में भी कई मल्टीनेशनल कंपनियॉ थोक का लासेंस लेकर रिटेल में बिजनेस कर रही है। देश और राज्यों में सत्ता का हस्तांतरण हुआ। देश में भाजपानीत से कांग्रेसनीत और म.प्र. में कांग्रेस से भाजपा संगठनात्मक सत्ता का हस्तांतरण हो गया । प्रदेश में सत्ता का हस्तांतरण के समय प्रदेश पर लगभग 27 हजार करोड़ का कर्जा था जो अब बढ़ कर करीब 90 हजार करोड़ से उपर तक पहुॅच गया है। कांग्रेस शासन में लोग बेतन के लिए परेशान थे तो अब मंहगाई भरे खर्चो टैक्सों की देनदारियों से परेशन है। आम जनता भाषणों से बहुत खुश होती है परन्तु काम कराने के दलालों से परेशान है । पहले तो सरकारी काम दलालों को लेदे के ही हो जाते थे अब तो सरकारी दफ्तरों में भी काम के बदले सरकारी फीस बसूली जाती है चाहे जाति प्रमाण हो ,निवास प्रमाण हो या भूमि खसरे की नकल ,जमीन की सर्च के बदले भारी भरकर रकम चुकाने के बाद भी वह किसी न्यायालय के लिए सबूत नही बन सकती अर्थात सरकारी बसूली महत्व है परन्तु जारी दस्तावेज के असली प्रमाण की गारण्टी नही। और विना दलाल के फार्म भी नही मिलता । अर्थात पूरी सरकार साहूकार का कारोबार कर रही है । किसी भी विभाग के मंत्री से जनता का कोई भी नुमाइन्दा काम/राहत की आस लेकर आता है तो जबाव मिलता है कि हम मजबूर है क्योकि कोई भी फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय की अनुमति के नही चलेगी विभाग का आला अधिकारी मंत्री को कोई तबज्जो नही देता ।

 


मुख्यमंत्री कार्यालय हो या निवास हर कही भ्रष्टाचारी सिंघम मौजूद है।इन्ही से चलती है सरकार । आज कल प्रदेश में पंूजी निवेश एवं प्रदेश में उद्योग लगवाने के लिए मुख्यमंत्री प्रचार प्रसार एक फिल्मी सितारे की तरहकर रहे है। देश विदेश में खूब मेहनत कर रहे,मीटिंग कर रहे है,खूब पसीना बहा रहे है परन्तु परिणाम राजकोष के करोड़ों फूॅकने के बाद भी नही मिल रहे है । हॉ इससे सफेदपोश भ्रष्टाचारी ,अधिकारी और प्रदेश में कई  डिफाल्टर धन्नासेठ व्यापारी एवं उद्योगपति खूब मस्ती छान रहे है। और अब अपने पुराने पापों को छिपाकर पुन: निवेश के नाम पर अपनी अपनी गोटी जमाने में लगे है। किसी भी योजना पर कार्य के संचालन के लिए मुख्यत: तीन विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। 1. सामान्य प्रशासन,2.सूचना प्रकाशन 3.ग्रह । सामान्य प्रशासन अनुशासित तरीके से कर्मचारियो,अधिकारियों की हर विभाग में आवश्क तानुसार नियुक्ति की अनुमति देता है। सूचना प्रकाशन विभाग, विभागवार होने वाली हर गति विधि  से जनता एवं सरकार के बीच सूचनाऐं देकर पारदर्शिता रखने की जिम्मेदारी निभाता है। वही गृह विभाग की हर आम और खास की निष्पक्ष रूप से सुरक्षा प्रदान कराने की जिम्मेदरी है। परन्तु दुर्भाग्य है इस प्रदेश की जनता का  कि यहॉ कोई की कार्य विभाग की नीति के अनुसार नही बल्कि मुख्यमंत्री के सिंघमों के आदेश और निणर्य से होता है। यहॉ विभागवार हर भ्रष्ट अधिकारी मुख्यमंत्री का खास है सामान्य प्रशासन की नीतियॉ यहॉ आकर शून्य हो जाती है। सैकड़ों अधिकारी विलीलेंस में पंजीबद्ध आरोपी यहॉ मुख्यमंत्री के सिंघम रूपी उदाहरण मिल जायेंगें। म.प्र. का सूचना प्रकाशन विभाग के पास वैसे तो हर विभाग की पारदर्शिता का प्रचार प्रसार करने की जिम्मेदारी है परन्तु अपने यहॉ पारदर्शिता के कोई मायने नही रखते यहॉ सिर्फ उद्योग के रूप में पहचाने जाने वाले मीडिया के कर्णधारों के साथ खबरों का व्यापार होता है । करोड़ो की डीलिंग सिर्फ सत्यता को छिपाने के लिए की जाती है। विभाग के महत्वपूर्ण कार्य के संचालन का कार्य भी उसे ही सौपा जाता है जिसे भ्रष्टाचार करने में महारथ हासिल हो,किसी आपराधिक जॉच ऐजेन्सी में पंजीबद्ध हो और व्यापार विहीन पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों को डराने धमकाने गुमराह करने के कार्य में दक्ष हो। और जनता के बीच खबरें वही प्रसारित कराये जिससे लोग सिर्फ कार्यकर्ता की तरह ताली बजायें। और गूह विभाग की कहानी किसी भी थाने में साक्षात देखी जा सकती जहॉ पुलिस कर्मी खुद मुख्य मंत्री निवास के सिंघमों के फोन और आला भ्रष्ट अधिकारियों के मौखिक आदेशों से दहशत में कार्य कार्य कर रहे है। प्रदेश की जनता भारी भरकम टैक्स देने के बाद भी सड़क पर नही चल सकती प्रदेश की सडक ों में गड्डे है या गड्डों में सड़क, तय करना मुश्किल है। जो अच्छी सड़के है उन्हें सरकार ने साहूकार रूपी ठेकेदारों के हाथो सौप दी है। उन्हें लगान दो तो सड़क पर चलोगे ज्यादा बोलोगे तो पिटोगे यहॉ विधायक भी पिटते है। गरीब इलाज कराना है तो किसी सिंघम से संपर्क करो भेंटपूजा चढ़ओं फिर काम होगा । सिंघम की तारीफ मुफ्त में करनी पड़ेगी नही तो अगली वार इन्ट्री बन्द। यहॉ एक कहावत चरितार्थ है। हम सब भ्रष्टन के सब भ्रष्ट हमारे। हर सिंघम का नारा है । शिवराज हमारा है धन हमारा खाता तुम्हारा है। हम हीरो वो जीरों है।


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