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बाबा रामदेव ने आंदोलनों को सफल बनाने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया।

नई दिल्ली ! बाबा रामदेव दिल्ली के रामलीला मैदान आये और अपने दोनों आंदोलनों को सफल बनाने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया। इधर बाबा रामदेव कालेधन पर सरकार को चुनौती दे रहे थे तो उधर सरकार खुफिया तरीके से उनके आय व्यय पर नजर बनाये हुई थी। अब इन्ही खुफिया रपटों में बताया गया है कि बाबा रामदेव ने अपने आंदोलनों को सफल बनाने के लिए ८ करोड़ रुपया खर्च किया। ये पैसे आंदोलन से लोगों को जोड़ने के नाम पर जुटाये गये। आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रति सदस्य ५१ रूपये से लेकर ११ लाख रूपये तक की फीस वसूली की गई।

बाबा रामदेव के ऊपर पहले ही यह आरोप है कि वे आंदोलन के नाम पर अपने कंपनियों के उत्पाद को बेचने के लिए ग्रामीण इलाकों में विपणन केन्द्र खोल रहे हैं। इस बार रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में ऐसे कार्यकर्ता मौजूद थे जिनके कंधों पर स्वदेशी केन्द्र का झोला लटक रहा था। इन कार्यकर्ताओं ने जो जैकेट पहन रखा था उस पर भारत की आर्थिक समृद्धि के अभियान का संदेश साफ तौर पर पढ़ा जा सकता था। यह स्वदेशी केन्द्र असल में बाबा रामदेव की देशभर में खुल रही दुकाने हैं। खुफिया एजंसियों, आर्थिक गुप्तचर व्यूरो का आंकलन है कि इस दौरान बाबा रामदेव ने ६०० जिलों की ४००० तहसीलों तक अपने स्वदेशी केन्द्र और भारत स्वाभिमान की शाखाओं का विस्तार कर लिया है।

आंदोलन के नाम पर छह सौ जिलों में स्वाभिमान ट्रस्ट के तहत जिन लोगों को जोड़ा गया उनसे ५१ रूपये से लेकर ११ लाख रूपये तक वसूल किये गये। कारपोरेट मेम्बर बनने के लिए ११ लाख रूपये फीस ली गई, संस्थापक सदस्य बनने के लिए ५ लाख, संरक्षक सदस्य बनने के लिए ढाई लाख, आजीवन सदस्य बनने के लिए एक लाख, विशिष्ट सदस्य बनने के लिए ११ सौ और समर्थन देने के नाम पर ५१ रूपये वसूल किये गये। अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि बाबा ने आंदोलन के नाम पर कमाई कितनी की है लेकिन खर्च का अनुमान सामने आ गया है कि उन्होंने करीब आठ करोड़ रूपये खर्च किये हैं। रामदेव के आंदोलनों में जिस तरह से पानी की तरह पैसा बहाया जाता था, उसे देखकर यह बहुत ज्यादा नहीं लगता है।

इसके साथ ही राजस्व विभाग ने योगगुरू बाबा रामदेव से जुड़े ट्रस्टों का अंतिम कर आकलन का काम शुरू कर दिया है। हाल ही में सेवा और आयकर अधिकारियों ने कथित कर अपवंचचन मामले में इन ट्रस्टों की विशेष जांच की थी। वित्त मंत्रालय के आयकर और सेवा कर विभागों ने हाल ही में इन ट्रस्टों को नोटिस जारी किया था जिनका रामदेव विरोध कर रहे हैं। केंद्रीय आर्थिक गुप्तचर ब्यूरो और केंद्रीय उत्पाद खुफिया महानिदेशालय (डीजीसीईआई) रामदेव संचालित ट्रस्टों की आय और सेवा कर देनदारियों की गणना कर रहे हैं।

सूत्रों ने कहा, च्च्प्रथम दृष्ट्या लगता है कि ट्रस्टों द्वारा योग शिविर में शिरकत करने के लिए कूपन की बिक्री और रामेदव द्वारा संचालित पतंजलि योग पीठ द्वारा उत्पादों की बिक्री जैसे वाणिज्यिक गतिविधियों को अंजाम दिया गया है। विभाग उनका आकलन कर रहा है।ज्ज् अधिकारियों ने कहा कि आयोजकों से जुड़े सूचना और रामदेव के ट्रस्टों द्वारा पूरे देश में संचालित विभिन्न कार्यक्रमों में इस्तेमाल किए गए धन के स्रोत के बारे में जानकारी हासिल की जा रही है। जब रामदेव के प्रवक्ता एसके तिजारवाला से संपर्क किया गया तो उन्होंने दावा किया कि ये ट्रस्ट कर दायरे से बाहर हैं, क्योंकि ये धर्मार्थ गतिविधियों से जुड़े हैं न कि वाणिज्यिक कामों से। तिजारावाला का कहना है कि, च्च्हम सभी एजेंसियों को जांच में सहयोग करेंगे। हमारे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। योग शिविरों को सेवा कर के भुगतान से बाहर रखा गया है क्योंकि इनके जरिये लोगों का चिकित्सा राहत दिलाया जाता है।ज्ज्

देश में कालेधन के खिलाफ आंदोलन चला रहे रामदेव एक संगठन के मुखिया हैं जो अनेक ट्रस्टों का संचालन करता है। ये ट्रस्ट भारत और विदेशों में आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण और बिक्री करते हैं। इसके साथ ही रामदेव ने देशभर में स्वेदशी केन्द्र खोला है जिसमें उनकी फैक्ट्रियों में बने माल बेचे जाते हैं। सेवा कर विभाग पहले ही योग शिविर में भाग लेने के लिए कूपन जारी करने के एवज में पतंजलि योग पीठ को नोटिस जारी कर चुका है। विदेशी विनिमय नियमों के उल्लंघन को लेकर प्रवर्तन निदेशालय भी रामदेव के ट्रस्टों पर नजर रखे हुए है।


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