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पूर्व डीजीपी के बंगले में गूंजेगा बच्चों का ककहरा

पूर्व डीजीपी के बंगले में गूंजेगा बच्चों का ककहरा

पटना, 3 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नारायण मिश्रा का बंगला न्यायालय के आदेश पर जिला प्रशासन द्वारा जब्त किए जाने के बाद अब यहां बच्चों का ककहरा गूंजेगा। पटना के रूपसपुर इलाके के इस बंगले में सरकार ने अब विद्यालय खोलने की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
भ्रष्टाचार और आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद न्यायालय के आदेश के उपरांत पूर्व डीजीपी की सम्पत्ति जब्त कर ली गई। गुरुवार को देर रात तक चली इस कार्रवाई के बाद उनके नेपाली नगर स्थित दो भूखंडों (10 हजार वर्गफीट) की जमीन तथा रूपसपुर के मकान को सील कर दिया गया।
पटना के अपर जिलाधिकारी (एडीएम) सुरेश शर्मा ने बताया कि तीनों अचल सम्पत्तियों का मूल्य करीब 39 लाख रुपये आंका गया है। उन्होंने बताया कि बैकों के खातों और अन्य स्थानों पर अर्जित की गई सम्पत्ति भी जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
एक अधिकारी के मुताबिक पूर्व डीजीपी के जिस बंगले को जिला प्रशासन ने जब्त किया है उसमें दानापुर के एक भवनहीन प्राथमिक विद्यालय को लाने की कवायद प्रारम्भ हो गई है।
उल्लेखनीय है कि पटना उच्च न्यायालय ने 24 जुलाई को अपने फैसले में मिश्रा द्वारा भ्रष्टाचार से अर्जित की गई करीब 1.40 करोड़ रुपये की सम्पत्ति जब्त करने के विशेष अदालत के निर्णय पर मुहर लगा दी थी।
गौरतलब है कि निगरानी विभाग की विशेष अदालत ने फरवरी महीने में बिहार विशेष न्यायालय अधिनियम के तहत मिश्रा और उनके परिवार की 1.40 करोड़ रुपये की सम्पत्ति जब्त करने का आदेश दिया था। विशेष निगरानी यूनिट की टीम ने फरवरी 2007 में पूर्व डीजीपी और उनकी पत्नी के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के मामले की एक प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मिश्रा ने 1984 से फरवरी 2007 के बीच 1.40 करोड़ रुपये की चल अचल सम्पत्ति अर्जित की थी।
बिहार विशेष न्यायालय अधिनियम 2010 के तहत राज्य सरकार इसके पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी एस़ एस़ वर्मा, कोषागार पदाधिकारी गिरीश कुमार और योगेंद्र प्रसाद की सम्पत्ति जब्त कर चुकी है। इनमें से दो मकानों में विद्यालय खोले जा चुके हैं।


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