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ये कैसा पोरिवर्तन: हत्या का दोषी डॉक्टर बंगाल का चिकित्सा सलाहकार नियुक्त

ये कैसा पोरिवर्तन: हत्या का दोषी डॉक्टर बंगाल का चिकित्सा सलाहकार नियुक्त

कोलकाता/ बंगाल में पोरिवर्तन की कमान संभाल रही तृणमूल प्रमुख और सूबे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने फैसले को लेकर फिर से सवालों के घेरे में हैं। हाल ही में दीदी ने एक ऐसे व्यक्ति को राज्य का मुख्य चिकित्सा सलाहकार नियुक्त किया है जिनपर न केवल एक मरीज की हत्या का आरोप लगा था बल्कि जिन्हें इस कारण सर्वोच्च न्यायालय ने दोषी भी पाया है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं डा. सुकुमार मुखर्ज़ी की, जिन्हें दीदी ने राज्य के इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ एंड फॅमिली वेल्फैर का मुख्य चिकित्सा सलाहकार नियुक्त किया है, पर 1998 में एक मरीज अनुराधा साहा को गलत दवा देने का दोषी पाया गया, जिस कारण उक्त मरीज की मृत्यु हो गयी।
उच्चतम न्यायालय  ने अक्टूबर 2011 में एक फैसले में डा. सुकुमार मुखर्ज़ी समेत तीन डॉक्टर एवं उनके अस्पताल को चिकित्सकीय लापरवाही का दोषी पाते हुए 1.77 करोड़ का मुआवजा देने का जुरमाना लगाया जिसमे केवल डा सुकुमार मुखर्ज़ी पर ही 42 लाख का मुआवजा देने का जुरमाना ठोका गया था। इस फैसले के बाद मेडिकल कौंसिल ऑफ़ इंडिया ने तो डा. मुखर्ज़ी का नाम अपनी सूची से काट दिया पर वे अभी भी प्रक्टिस कर रहे है क्योंकि बंगाल की मेडिकल कौंसिल उन पर कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। स्पष्ट है की जिनपर दीदी का वरदहस्त हो उनपर कार्रवाई कैसे हो सकती है।
अभी अप्रैल 2012 में एक सार्वजनिक सभा में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने डा मुखर्ज़ी के कसीदे पड़ते हुए कहा कि जल्द ही उनके अनुभवों का लाभ प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मिलेगा। दो ही महीने बाद जुलाई में उन्हें उपरोक्त पद देते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने अपने आदेश में कहा है कि डा. मुखर्ज़ी चिकित्सा शिक्षा के स्तर की भी समीक्षा कर उस पर भी सुझाव देंगे।
मृतका अनुराधा साहा के पति डा. कुनाल साहा ने इस कदम को अनैतिक और घोटाला बताते हुए सवाल किया है कि एक दोषी डाक्टर को कैसे चिकित्सकीय दिशानिर्देश और शिक्षा स्तर की जिम्मेदारी दी जा सकती है? डा. कुनाल साहा अमरीका में रहते है और अपनी पत्नी के निधन के बाद उन्होंने मरीजों के अधिकारों के लिए एक संगठन  "क्कद्गशश्चद्यद्ग द्घशह्म् क्चद्गह्लह्लद्गह्म् ञ्जह्म्द्गड्डह्लद्वद्गठ्ठह्ल " का गठन किया है। उन्होंने राज्य सरकार के इस निर्णय के खिलाफ कोलकाता उच्च न्यायालय में एक  क्कढ्ढरु दायर करते हुए इस नियुक्ति को माननीय उच्चतम न्यायालय  की अवमानना कहा है। उन्होंने कहा है की इस कदम से जनता की निगाहों में उच्चतम न्यायालय की छवि धूमिल होगी।













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