Bookmark and Share डिजिटल भुगतान से वैश्यावृत्ति के व्यापार में कमी के आंकड़ों से बौखलाये ,मोदी के दूत रविशंकर प्रसाद                मंत्री है या भ्रष्टाचारियों के दलाल                 मोदी के राज में पत्रकारों की आवाज की जा रही बंद, फिर भी चाटुकार बजा रहे बीन                एस्सार समूह ने केंद्रीय मंत्रियों और अंबानी बंधुओं के फोन टैप कराए                1500 करोड़ का घोटाला, राजभवन ने नहीं की कार्यवाही                फर्जी डाक्टरों का सरगना डॉ.अभिमन्यु सिंह                मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं भ्रष्टाचारियों के सरगना कहिए !                पद़माकर त्रिपाठी को डॉ. नही सफेद एप्रिन का गिद्ध कहिए !                    
मंत्री विजय शाह के फार्म हाउस की खातिर बनी २८ लाख की सड़क


मंत्री के फार्म हाउस की खातिर बनी २८ लाख की सड़क



इंदौर। कनाड़िया रोड पर बसे छिंटकाना गांव पर प्रदेश के आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह को खूब लाड आ रहा है। मात्र १६ परिवार और १२५ आबादी वाले इस गांव में उन्होंने अपने विभाग की तरफ से २८ लाख रु. की लागत से सीमेंट कांक्रीट की २४ फीट चौड़ी सड़क बनवा दी। वे आगे और दुलार लुटाने वाले हैं। १७ लाख रु. से पानी की टंकी व १० लाख रु. से सामुदायिक भवन बनाने के लिए उन्होंने प्रस्ताव बुलवा लिए हैं। ये काम नियम विरुद्ध हैं, लेकिन मंत्रीजी उक्त गांव में फॉर्म हाउस बना रहे हैं, शायद इसलिए सरकार ने सब च्एडजस्टज् कर लिया है। बताया जा रहा है शाह ने हाल ही में वहां करीब १५ एकड़ जमीन और खरीदी है। उनके एक करीबी का कहना है कि शाह वहां टाउनशिप बनाने वाले हैं।

शाह ने पत्नी भावना (खंडवा महापौर)के नाम पर कुछ समय पहले छिंटकाना गांव में पौने तीन एकड़ जमीन खरीदी थी। अब वे वहां फॉर्म हाउस और कुछ गोदाम बना रहे हैं। इसके लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से हाथोहाथ फाइल स्वीकृति भी हो गई। टंकी का उपयोग वे अपनी खेती और टाउनशिप के लिए करेंगे। सड़क गांव के मुहाने तक ही है, जहां उनके खेत की सीमा खत्म होती है। मंत्री के दांव-पेंच से अनजान ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक पक्की सड़क आने की खुशी है। हम चाहते हैं कि गांव के अंदर भी सड़कें पक्की हो जाएं। सरकार सड़क संकरी कर देती तो गांव के अंदर भी पक्की सड़कें बन जाती।

हैंडपंप की जरूरत वाले गांव के लिए टंकी का प्रस्ताव

नियमों के अनुसार पांच हजार की आबादी वाले गांव में टंकी बनाई जाती है। गांव छोटे होते हैं तो हैंडपंप का उपयोग किया जाता है। छिंटकाना गांव में तीन हैंडपंप हैं और आबादी करीब १२५ है। ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री बी.के. अहिरवार मानते हैं कि इस गांव में फिलहाल पानी की टंकी की जरूरत नहीं है। आदिम जाति कल्याण विभाग ने बजट मांगा था, जो हमने बनाकर दे दिया।

गांव में १५ फीट से ज्यादा चौड़ी सड़क नहीं बनती

ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गांव में १५ फीट से ज्यादा चौड़ी सड़क नहीं बनाई जा सकती है लेकिन छिंटकाना गांव में यह चौड़ाई २४ फीट है। गांव में सामुदायिक भवन पांच लाख रु. से बनाया जाता है, लेकिन वहां के लिए १० लाख रु. का प्रस्ताव भेजा गया है। १० लाख की लागत वाला सामुदायिक भवन अमूमन पांच हजार से ज्यादा आबादी वाले गांव के लिए होता है, जिसकी मंजूरी राज्य शासन देता है।

ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री एस.आर. विश्वकर्मा ने कहा आदिम जाति कल्याण विभाग का प्रस्ताव पास होकर आया था। उस आधार पर हमने सड़क बनाई। सामुदायिक भवन का प्रस्ताव भी विभाग ने मांगा, जिसका बजट बनाकर हमने दे दिया है।

मंत्री बोले- गांव वालों की मांग पर बनवाई सड़क (विजय शाह से सीधी बात)

आप गांव में फॉर्म हाउस बनवा रहे हैं, इसलिए ग्रामीणों के नाम पर सड़क बनवाई? - नहीं ऐसा नहीं है। गांव वालों की ही मांग थी।

खुद को फायदा हो, इसलिए नियमों को ताक में रखते हुए सड़क की चौड़ाई बढ़ा दी? टंकी व सामुदायिक भवन के लायक भी यहां की आबादी नहीं है? - मुझे मालूम नहीं कि सड़क की चौड़ाई क्या है? गांव वालों ने मांग की थी इसलिए बनवाई।

जिन गांवों में खास जरूरत है, वे भी मांग करते हैं लेकिन आप ध्यान नहीं देते? - जो गांव मांग करेंगे, सड़क बनवा देंगे।

आपने १५ एकड़ जमीन और खरीदी है। सुना है आप टाउनशिप बनवाने वाले हैं? - वह जमीन मेरी नहीं है।

क्या पौने तीन एकड़ की जमीन आपने संपत्ति में घोषित की है? - मैंने घर बनाने के लिए जमीन ली है। इसे संपत्ति में घोषित भी करता हूं।


Email (With coma separated ) :
You can Advertisment here
संपर्क करें      मेम्बेर्स      आपके सुझाव      हमारे बारे मे     अन्य प्रकाशन
Copyright © 2009-14 Swarajya News, Bhopal. Service and Private Policy