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यूपी के ३३वें और सबसे युवा सीएम की कुछ खास बातें





लखनऊ। पहली बार यूपी की बागडोर एक युवा मुख्यमंत्री के हाथों में है। इस युवा नेता ने उत्तर प्रदेश में १६वीं विधानसभा के लिए हुए चुनावों में समाजवादी पार्टी को एक नई सोच के साथ जीत दिलाने में अहम योगदान दिया। समाजवादी पाटी के युवा नेता, पार्टी प्रदेश अध्यक्ष और अब यूपी के सबसे युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इन चुनावों में एक छुपेरुस्तम की तरह अपनी पार्टी को सत्ता का दावेदार बना दिया।

अखिलेश यादव यूपी की राजनीति में धूमकेतु की तरह उभरे हैं जिसकी चमक के आगे सभी नेताओं की चमक फीकी पड़ गयी है7 १ जुलाई १९७३ को उत्तर प्रदेश के इटावा में जन्में ३८ साल के अखिलेश यादव अपने विनम्र स्वभाव के लिए पहचाने जाते हैं। इस युवा नेता ने यूपी के इतिहास में एक ऐसा अध्याय जोड़ दिया है जिसे कभी भुला नहीं जा सकेगा। शायद यही वजह है कि इस युवा चहरे को यूपी की सत्ता का नेतृत्व करने का मौका मिला है। जिसके पास सपने हैं, विश्वास है और उन सपनो को पूरा करने का जज्बा है।

शैक्षिक योग्यता

हमेशा सफेद कुर्ता, काली जैकेट और लाल टोपी पहनने के शौकीन अखिलेश यूं तो पुराने समाजवादी नेताओं की याद दिलाते हैं, लेकिन उनकी सोच बिलकुल आधुनिक है। धौलपुर के सैनिक स्कूल से अपनी पढ़ाई की शुरुआत करने वाले अखिलेश ने मैसूर के जे.सी.इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त करने के बाद सिडनी से पर्यावरण इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है7 दोस्तों से धाराप्रवाह अंग्रेजी में बात करने वाले अखिलेश जब भी लोगों को संबोधित करने मंच पर जाते हैं तो हिंदी में ही बोलना पसंद करते हैं7

फुटबॉल और क्रिकेट से भी है बेहद लगाव

भले ही अखिलेश राजनीति के खेल में उतर आए हों लेकिन आज भी उन्हें मैनचेस्टर यूनाइटेड, आर्सेनल और लियोनेल मेसी और वेन रूनी के खेल के बारे में चर्चा करना बेहद पसंद है। खाली समय में अक्सर वह अपने साथियों के साथ फुटबॉल और क्रिकेट खेलते नजर आते हैं।

आज के राजनीतिक परिदृश्य में सपा को शानदार जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले अखिलेश का कॉलेज के दिनों में राजनीति में दूर-दूर तक कोई रुझान नहीं था। उन्होंने कभी छात्रसंघ के चुनाव तक में रूचि नहीं दिखाई।

सिर्फ इतना ही नहीं मृदुभाषी अखिलेश ने कभी भी अपने दोस्तों को इस बात की भनक तक नहीं लगने दी कि वह सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के बेटे हैं। उन्होंने अपने शैक्षिक जीवन में पूरी तरह से एक सामान्य विद्यार्थी की ज़िन्दगी जी।

अखिलेश ने बदला सपा का चेहरा

शर्मीले अखिलेश ने १२ साल पहले २६ साल की उम्र में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। इसके बाद अखिलेश वर्ष २००० में कन्नौज से उपचुनाव जीतकर पहली बार लोकसभा पहुंचे। उन्होंने साल २००४ और २००९ में भी कन्नौज की सीट बरकरार रखी, लेकिन तीन साल पहले उन्हें तगड़ा झटका लगा जब उनकी पत्नी डिंपल यादव को लोकसभा उपचुनाव में सपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए राज बब्बर के हाथों फिरोजाबाद में शिकस्त का सामना करना पड़ा।

अखिलेश को पत्नी की हार का सिरा कहीं ना कहीं २००७ में यूपी की सत्ता से पार्टी की बदनाम विदाई से भी जुड़ा नज़र आया और उन्होंने सपा का चेहरा बदलने की कवायद शुरू कर दी। यहीं से उन्होंने शुरू किया लोगों के दिलों में जगह बनाने का प्रयास।

नई सोच और नज़रिए वाले अखिलेश ने शिवपाल सिंह और पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां की इच्छा के ख़िलाफ़ बाहुबली डीपी यादव को टिकट देने से इंकार कर और वरिष्ठ नेता मोहन सिंह द्वारा सवाल उठाए जाने पर उन्हें प्रवक्ता के पद से हटा कर जाहिर कर दिया था कि अब समाजवादी पार्टी वे गलतियां दोबारा नहीं दोहराएगी जिनकी वजह से उसे २००७ में मुंह की खानी पड़ी थी।

इससे पहले उन्होंने कल्याण सिंह के साथ पार्टी का गठजोड़ ख़त्म किया और मुसलामानों को दोबारा पार्टी से जोड़ा। सिर्फ इतना ही नहीं सपा युवाओं की पार्टी के रूप में उभरी। अखिलेश ने जनता से सीधा संवाद स्थापित किया।

अखिलेश ने इस बार के चुनाव प्रचार में जमीनी स्तर के कई सवाल उठाए। जहां एक तरफ जाति और मजहब की बातें होती रहीं वहीं अखिलेश ने युवाओं के रोजगार और विकास की बातों को अपना मुख्य मुद्दा बनाया।

सपा को दी आधुनिक सोच

सपा को पुरानी विचारधारा से बाहर निकलकर एक आधुनिक सोच वाली पार्टी में शामिल करने का श्रेय किसी को जाता है तो वह हैं अखिलेश यादव। इस बार के यूपी विधानसभा चुनाव में अखिलेश ने अपनी ऐसी चमक बिखेरी की चारों तरफ कोई नज़र आया तो वो बस अखिलेश ही थे।

अखिलेश ने कभी भी सपने के बीच हकीकत को भूलने की गलती नहीं की। उन्होंने अपने सपनों में रंग भरा लेकिन हकीकत को ध्यान में रखते हुए। उन्होंने ऊंची आवाज़ में कोई दावा नहीं किया लेकिन प्रदेश की जनता ने उनके हर दावे पर यकीन किया।

अपने अब तक के सफ़र में जीत पर जीत हासिल करते आए यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश के विश्वास को देखकर लगता है कि यूपी की जनता ने जिस उम्मीद की साईकिल पर बैठे युवा चेहरे को कुर्सी तक पहुंचाया है वह उनकी उम्मीदों को जरुर पूरा करेगा7


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