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शेहला हत्याकांड : ‘डी’ से मेरे हैं गहरे संबंध



इंदौर। शेहला मसूद हत्याकांड की आरोपी जाहिदा परवेज ने मंगलवार को अदालत में कहा- इतने समय से मैं बोल नहीं रही थी किंतु अब मुझे बोलना पड़ा कि ‘डी’ से मेरी इंटीमेसी (गहरा संबंध) है। च्डीज् का आशय ध्रुवनारायण सिंह लगाया जा रहा है। उसने यह भी कहा- हम बेगुनाह हैं, गुनाह करने वाला कोई और है। इस कथन के बाद इंदौर विशेष न्यायालय में चर्चा रही कि क्या इस कांड का कोई चौथा आरोपी या मास्टर माइंड है और अगर है तो वह है कौन? अदालत ने जाहिदा, उसकी करीबी दोस्त सबा फारुखी व शाकिब डेंजर के पॉलिग्राफ टेस्ट की स्वीकृति देते हुए तीनों को १३ मार्च तक सीबीआई को सौंप दिया। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. शुभ्रा सिंह की अदालत में मंगलवार को सुबह ११.१५ बजे सीबीआई के अफसर सुरक्षा व्यवस्था के बीच तीनों को लेकर पहुंचे। सीबीआई के वकील ने अदालत को पत्र सौंपते हुए आग्रह किया कि आरोपियों से कई और अहम पूछताछ एवं पॉलिग्राफ टेस्ट किया जाना है। अदालत ने तीनों से बारी-बारी से सवाल किया कि रिमांड के दौरान उनकी कोई शिकायत और पॉलिग्राफ टेस्ट के बारे में क्या कहना है। जाहिदा ने अदालत से कहा -डी से मेरी इंटीमेसी (गहरा संबंध) हैं। मुझे लगता है सब लोग (इशारा सीबीआई की तरफ था) मुझे फंसा रहे हैं। इसीलिए कल (सोमवार को) सब कुछ बता दिया। मैं बेगुनाह हूं। गुनहगार तो कोई और है। सबा का कहना था- इन्होंने (जाहिदा) जो कहा वही मेरा कथन है। शाकिब पहले इंकार के बाद पॉलिग्राफ टेस्ट के लिए राजी हो गया। अदालत ने तीनों के १३ मार्च तक रिमांड व पॉलिग्राफ टेस्ट की अनुमति देते हुए हिदायत दी कि विशेषज्ञ चिकित्सकों के समक्ष ही टेस्ट कराएं।  इरफान को ९ को पेश करेंमंगलवार को जारी आदेश में अदालत ने सीबीआई को दिया गया वह आदेश फिर दोहराया कि इरफान को ९ मार्च को अदालत में हाजिर करें। इरफान कानपुर जेल में बंद है और उसे पूछताछ के लिए सीबीआई को सौंपने के लिए सीबीआई अदालत ३ मार्च को ही प्रोडक्शन वारंट जारी कर चुकी है। इसी बीच जाहिदा व सबा की ओर से भोपाल से आए वकील अफसर हुसैन ने पैरवी के लिए वकील पत्र पेश किया किंतु बहस नहीं की। वे अगली बार बहस करेंगे। बाद में उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए सवाल किया कि सीबीआई कह रही है कि गुनाह कबूल लिया है तो फिर रिमांड क्यों ले रही है। पॉलिग्राफ टेस्टइस टेस्ट का उपयोग सामान्यत: सच उगलवाने में होता है। टेस्ट के दौरान संदिग्ध व्यक्तिसे सिलसिलेवार प्रश्न किए जाते हैं और उसके द्वारा दिए गए उत्तरों पर नजर रखी जाती है। साथ ही उसकी मनोवैज्ञानिक गतिविधियां जानने के लिए ब्लड प्रेशर, नाड़ी आदि विभिन्न शारीरिक परीक्षणों का मापन किया जाता है। इस टेस्ट को संदिग्ध आरोपी या अपराधी की सहमति के बिना नहीं किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट इस परीक्षण के परिणाम को साक्ष्य नहीं मानती।


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