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जुड़वां गर्भ पाल रही महिला की नसबंदी के बाद मौत




मध्य प्रदेश के बालाघाट ज़िले के सरकारी अस्पताल में पिछली नौ फरवरी को नसबंदी के दौरान हुई रेखा आनंद वासनिक नाम की महिला की मौत ने राज्य के परिवार नियोजन अभियान पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है.

रेखा की मौत के बद हुए पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि उसकी कोख में १२ सप्ताह के जुड़वां बच्चों का गर्भ पल रहा था.




मध्य प्रदेश की सरकार नें वर्ष २०१२ को परिवार नियोजन वर्ष के रूप में मनाने का फैसला लिया है जिसके तहत राज्य की आबादी के १० प्रतिशत लोगों की नसबंदी का लक्ष्य रखा गया है.

इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पूरे सरकारी महकमे को लगाया गया है जिसमे आंगनवाडी सहायिकाओं से से लेकर शिक्षाकर्मियों भी शामिल हैं. साथ ही सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं.
जबरन

ऐसे आरोप लग रहे हैं कि लक्ष्य को पूरा करने के लिए, सरकारी कर्मचारी कुवारों, विधवाओं और वृद्ध लोगों की नसबंदी भी करवा दे रहे हैं. कहीं-कहीं पर तो विलुप्त हो रही जनजातियों के सदस्यों की नसबंदी के मामले भी सामने आ रहे हैं.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के खुलासे के के बाद बालघाट जिला मुख्यालय में जनाक्रोश उमड़ पड़ा और शनिवार को स्थानीय लोगों ने कलेक्टर के कार्यालय का घेराव कर 'दोषी' डाक्टरों और सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी की मांग की.

ज़िला प्रशासन नें मामले की जांच का आदेश दिए हैं.

मृत महिला के पति आनंद वासनिक का कहना है कि यह मामला डाक्टरों की लापरवाही का है.

उनका कहना है, "बिना जांच किये ही एक गर्भती महिला का आपरेशन करना एक अपराध है. उनका कहना है कि इसमें संलिप्त सभी लोगों को गिरफ्तार कर उनपर कानूनी कारवाही की जानी चाहिए."
आक्रोश

नागिरकों में आक्रोश की शुरूआत रेखा की मौत के बाद ही हो गई थी लेकिन चिकित्सका अधिकारियों ने मामले को रफा दफ़ा करने की कोशिश में यह कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत की कारणों का पता चल पायेगा.

मगर अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद साफ हो गया की मृतक महिला नसबंदी के समय गर्भवती थी और उसके पेट में जुड़वा बच्चे थे.

शनिवार को जिला कांग्रेस कमिटी के नेताओं नें बालाघाट के पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपाकर दोषियों के खिलाफ सख्त कारवाई करने के साथ-साथ मृतक महिला के बच्चों को मुआवजा देने की मांग की है.

बालाघाट जिला कांग्रेस समीति के प्रवक्ता अनूप सिंह बैंस का आरोप है कि नसबंदी के लक्ष्य को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा ब्लाक मेडिकल अफसर, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाया जा रहा है. इस दबाव का खामियाजा रेखा वासनिक जैसी महिलाओं को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है.

मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने रेखा के परिजनों को मुआवजा देने की बात कही है.


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