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नए सिरे से खींची जाएगी गरीबी रेखा

गरीबों की पहचान के तरीके पर चौतरफा घिरी सरकार ने सोमवार को कहा कि सरकारी कार्यक्रम का लाभ कितने गरीबों को दिया जाए, इस पर योजना आयोग अब उनकी संख्या पर पाबंदी नहीं लगाएगा।केंद्र ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में आयोग ने जो हलफनामा दाखिल कर गरीबी का मानक तय किया था वह सरकारी कार्यक्रमों का लाभ देने का आधार नहीं बनाया जाएगा। आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया और ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि केंद्र के कार्यक्रमों और योजनाओं का लाभ कितने ग्रामीण परिवारों को मिले, यह तय करने के लिए सरकार सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना आंकड़ों को आधार बनाएगी। अहलूवालिया ने सुप्रीम कोर्ट में दायर उस हलफनामे को भी वापस लेने से इनकार किया जिसमें योजना आयोग ने प्रति व्यक्ति गरीबी रेखा ग्रामीण क्षेत्र के लिए 26 रुपये और शहरों के लिए 32 रुपये रोजाना तय करने की बात कही है।


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