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सुब्रह्मण्यम स्वामी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

एक समाचार पत्र में प्रकाशित जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी के आलेख में भारतीय मुस्लिमों को मताधिकार से वंचित रखने का सुझाव देने समेत कई अपमानजनक बातें कहने के लिए दिल्ली पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है.

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए (सम्प्रदायों के बीच वैमनष्यता फैलाने) के तहत एक प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की है.स्वामी का आलेख इस वर्ष जुलाई में एक अंग्रेज़ी समाचारपत्र में प्रकाशित हुआ था.दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के प्रमुख अशोक चांद ने इस मामले की जानकारी देते हुए कहा, "हमने सम्बंधित धारा के तहत एक मामला दर्ज किया है. हम मामले की जांच कर रहें हैं."

 

'घृणित'

इससे पहले राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने भी स्वामी के आलेख की आलोचना की थी.

आयोग के अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्लाह ने स्वामी के आलेख को 'घृणित' तथा 'दुश्मनी और नफ़रत' फैलाने वाला क़रार दिया था.

 

लेकिन सुब्रह्मण्यम स्वामी ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि टेलीकॉम घोटाले पर अदालत में याचिका दायर करने की वजह से सरकार उन्हें निशाना बना रही है.

उनका कहना था, ''क्राइम ब्रांच ने गृहमंत्री पी चिदंबरम के कहने पर ये मामला दर्ज किया है ताकि 2-जी के मामले में मुझे कोर्ट जाने से रोका जा सके.लेकिन ऐसा होगा नहीं. मैंने जो कुछ कहा है वो संविधान के दायरे में कहा है और इसके लिए मेरे ख़िलाफ़ मामला दर्ज नहीं किया जा सकता.''

स्वामी ने कहा कि पुलिस ने जो केस दर्ज किया है वे उसके ख़िलाफ़ कोर्ट जाएंगे.

उल्लेखनीय है कि लंदन के हार्वर्ड विश्विविद्यालय में शिक्षित अर्थशास्त्री सुब्रह्मण्यम स्वामी ने 'डीएनए' में 17 जुलाई को प्रकाशित अपने आलेख 'हाउ टू वाइप आउट इस्लामिक टेरर' में भारतीय हिंदुओं को भी सुझाव दिया था कि वे आतंकवादी गतिविधियों का सामूहिक तौर पर जवाब दें.

 

 

'संविधान के दायरे में कहा'

"क्राइम ब्रांच ने गृहमंत्री पी चिदंबरम के कहने पर ये मामला दर्ज किया है ताकि 2-जी के मामले में मुझे कोर्ट जाने से रोका जा सके.लेकिन ऐसा होगा नहीं. मैंने जो कुछ कहा है वो संविधान के दायरे में कहा है और इसके लिए मेरे ख़िलाफ़ मामला दर्ज नहीं किया जा सकता."

सुब्रह्मण्यम स्वामी

 


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