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शेर सामने नहीं आते पर शेरनी से डर गए शिवराज शिवराज की दंभोक्ति.

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भोपाल। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान पिछले दिनों परिवार समेत होशंगाबाद-सोहागपुर के म$ढई पहुंचे थे। जहां मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक आनंद के साथ वन्य प्राणियों को देखा। शिवराज को जंगल में मोर, हिरन समेत अन्य कई प्रकार के वन्य प्राणी दिखे लेकिन उन्हें उस पूरेे जंगल में शेर दिखाई नहीं दिया। इस पर मुख्यमंत्री ने चुटकी लेते हुए कहा था कि उनके सामने शेर नहीं आया करते। मुख्यमंत्री की इस चुटली बात के कई मायने निकाले गए। एक तरह से मुख्यमंत्री ने यह कह कर उन्हें चुनौती देने वाले कद्दावर मंत्रियों को एक तरह से संकेत दिये कि वे निष्कंटक राज करेंगे, उनके सामने कोई शेर नहीं आता। लेकिन भाजपा के मौजूदा राजनीतिक हालात पर नजर डाले तो लगता है मुख्यमंत्री के सामने उमाभारती नाम की एक शेरनी आने वाली है। उमा भारती की भाजपा में वापसी की अटकलें अब संभावनाओं में बदल गई है। उमा कभी भी भाजपा के बैनर तले हिन्दुत्व के मुद्दे को हवा दे सकती हैं। हालांकि फिलहाल यह खुलासा नहीं हुआ है कि संगठन उन्हें प्रदेश में रखना चाहेगा या केन्द्र में। लेकिन अपनी कुर्सी और रूतबे में कमी होने का अहसास होते ही शिवराज ने दिल्ली दौ$ड लगाई और इस शेरनी को रोकने के लिए गोटियां बिठाई। दिल्ली के नेताओं को समझाया कि भैया बना-बनाया खेल बिग$ड जाएगा अगर यह शेरनी संगठन में फिर से आ गई तो। पार्टी सूत्र बताते हैं कि शिवराजसिंह चौहान ने दिल्ली पहुंचकर सीधे पार्टी हाईकमान नितिन गडकरी, लालकृष्ण आडवाणी समेत सुषमा स्वराज और अरूण जेटली, उमा भारती के कट्टर विरोधी वेंकैया नायडू से भी मिले और प्रदेश में उमा के आने के बाद बनने वाले राजनीतिक परिदृश्य का खाका खिंंचा। यही नहीं मुख्यमंत्री ने अपने खास पार्टी के राष्ट्र्ीय महासचिव नरेन्द्र तोमर के माफर्त भी यह कहलवा दिया कि उमा की वापसी का कोई प्रस्ताव नहीं आया है। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय नेतृत्व के सामने कहा कि पार्टी के इस फैसले से मप्र में खासी परेशानी ख$डी हो सकती है। सूत्रों का तो यह तक कहना है कि उमा भारती की वापसी की संभावनाओं के मजबूत होते ही कभी उनके समर्थकों में शुमार रहे विधायकों को एक बार फिर उमा भारती के शासनकाल की याद सताने लगी है और उन्होंने अंदरूनी तौर पर शिव के राज की मुखालफत का मन बना लिया है। यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा और उमा की वापसी होती है तो निश्चित ही आने वाले छह माह में प्रदेश भाजपा की अंदरूनी राजनीति खासकर मुखिया बदले जाने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। वैसे कहा यह भी जा रहा है कि उमा भारती ने स्वयं शिवराज मंत्रिमंडल में शामिल अपने समर्थक मंत्रियों को टेलीफोन कर कुशलक्षेम पूछकर उन्हें पुराने दिन याद दिला दिये हैं।


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