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देर से जलती है दिमाग की बत्ती



सेंस ऑफ ह्यूमर के मामले में भले ही महिलाओं और पुरूषों को बराबर माना जाता हो, लेकिन एक अध्ययन ने साबित किया है कि इस मामले में महिलाएं पुरूषों के मुकाबले थोड़ी पीछे हैं क्याआपने भी महसूस किया है कि चुटकुले सुनने या कार्टून देखने के बाद महिलाओं को हंसी थोड़ी देर से आती है? आप भले ही ऎसा नहीं मानते हों, लेकिन यह नतीजा एक वैज्ञानिक अध्ययन का है। कैलिफोर्निया स्थित स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के इस अध्ययन में पाया गया कि किसी चुटकुले, व्यंग्य या कार्टून को समझने के लिए महिलाएं पुरूषों की तुलना में अपने दिमाग का ज्यादा इस्तेमाल करती हैं। वे हास्य पर देरी से प्रतिक्रिया करती हैं, लेकिन एक बार पंचलाइन को समझने पर वे उसका जमकर लुत्फ उठाती हैं। अध्ययन का उद्देश्य इस बात का पता लगाना था कि हमारा हास्य बोध कैसे काम करता है। "डेली मेल" में प्रकाशित खबर के मुताबिक अध्ययन में पाया गया कि महिलाएं अधिक स्पष्ट हास्य को तवज्जो देती हैं और उसे समझने के लिए पुरूषों के मुकाबले कहीं अधिक मेहनत करती हैं। मुख्य अध्ययनकर्ता एवं विश्वविद्यालय के इंटरडिसीप्लीनरी ब्रेन साइंसेज रिसर्च सेंटर के प्रो. एलन रेइस ने बताया कि हमारा अध्ययन यह पता लगाने में कामयाब रहा कि पुरूषों और महिलाओं का हास्य बोध कैसे प्रतिक्रिया करता है। इस अध्ययन के तहत महिलाओं को कार्टून दिखाकर उनकी प्रतिक्रिया ली गई। अध्ययन में शामिल महिलाओं ने मजेदार चुटकुलों पर प्रतिक्रिया जाहिर करने में कुछ ज्यादा वक्त लिया, लेकिन पंचलाइनों का कहीं अधिक लुत्फ उठाया। हालांकि, पुरूषों और महिलाओं के बीच समय का यह अंतर बहुत कम था। रेइस ने बताया कि अध्ययन से इस बात का भी संकेत मिला कि महिलाओं को इस बात की कम उम्मीद थी कि वे चुटकुले को मजेदार पाएंगी, लेकिन शामिल होने के बाद उन्होंने इनका बहुत लुत्फ उठाया। यूं हुआ अध्ययन इस अध्ययन में फंक्शनल मैगनेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एफएमआरआई) तकनीक से दस महिलाओं और पुरूषों के दिमाग पर हास्य के असर को मापा गया। कॉमेडी सीन देखने या जोक सुनने पर महिलाओं के दिमाग का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स रीजन ज्यादा सक्रिय पाया गया। यह हिस्सा भाषा समझने और उसमें छिपे भाव का विश्लेषण करने में मददगार है।


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