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सी. एम. ओ. कार्यालय देवास में भ्रष्टाचार की झलक --------- रुपए 10 लाख के बिस्कुट भ्रष्टाचार में हजम भ्रष्टाचार का तांडव रुपए 3 से 5 करोड़ हर वर्ष डकारे

देवास। म.प्र. स्वास्थ्य विभाग में मंत्रालय और संचालक कार्यालय से लेकर नीचे प्राथमिक स्वास्थ्य केंन्द्रों जो दूर दराज के गांवों में भी स्थित होते हैं। हर कदम लूट भ्रष्टाचार का तांडव मचा रहता है, वर्तमान आयुक्त स्वास्थ्य जो अभी प्रभार में है। एस.आर. मोहंती से लेकर महाभ्रष्ट डॉ. अशोक शर्मा जो खरीदी में ही अरबों रुपए की डकैती डालकर कुछ टुकड़ा मंत्री अनूप मिश्रा और मुख्यमंत्री को देकर लोकायुक्त और आयकर के छापे के बाद भी मैदान में डटा हुआ हैं। आयकर और लोकायुक्त भी है। तो सत्ताधीशों के इशारे पर नाचने वाले मोहरे ही हैं न भले ही आयकर केन्द्र सरकार का हो, जब भ्रष्टाचार ऊपर ही चारों तरफ छाया हुआ हो तो नीचे वालों से कैसे ईमानदारी की उमीद की जा सकती है फिर जहां तक डॉक्टरों का सवाल हो तो भी सरकारी तो फिर भी अंदाज लगाया जा सकता है। सूचना के अधिकार में प्राप्त की जानकारी जो देवास जिले की मात्र मुख्य स्वास्थ्य व चिकित्सा अधिकारी की है वैसे 10 से 12 विभाग और भी होते हैं जिनकी केश बुक, आवंटन इन सबसे अलग होता हैं, जिसमें आर सी.एच. मलेरिया, टीबी नङ्क्षर्सग प्रशिक्षण, कुछ रोग, आईडीएसपी एड्स वेक्सीनेशन, जैसे और भी कई महत्वपूर्ण विभाग हैं जहां केवल कागजों पर ही कार्य होता है और 50 से 80 प्रतिशत आवंटित धनका सीधा हजम कर लिया जाता है। इन सबका प्रभारी भी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ही होता है। यहां हम पाठकों की सुविधा के लिए जो दस्तावेज हमें प्राप्त हुए उसमें 07-08 का आवंटन और खर्च और 08-09 का आवंटन और खर्च का विश्लेषण प्रस्तुत किया जा रहा है। वेतनभत्तों पर टिप्पणी अर्थहीन है मजदूरी के नाम पर 07-08 रुपए 815,0001 में से खर्च रूपए 539844 रुपए हुआ इसका 25 प्रतिशत अर्थात रुपए 134 हजार और 08-09 में लगभग रुपए 44.415 में रुपए 7,08686/- में से करीब में से 30त्न रुपए 2 लाख के फर्जी भुगतान हुए और 08-09 में रुपए 10,39 हजार में से रुपए 3 लाख के फर्जी भुगतान हुए 22.001 के टीओ 22-009 ओईमें 07-08 में खर्च रुपए 30.26 हजार में रुपए 15 लाख के फर्जी में भुगतान हुए। 08-09 में रुपए 43.88 हजार में से रुपए 20 लाख में फर्जी भुगतान किए गए, 34-002 में औषधि में रुपए 1 करोड़ 54 लाख में से 40 प्रतिशत अर्थात रुपए 60 लाख और 08-09 में रुपए 45 लाख में रुपए 20 लाख सीधे डकारे गए। ग्रामीण और गरीबों को इन हरामखोर डॉक्टरों ने दोनों तरफ से लूटा, एक तरफ प्रशासन का आवंटित धन तो दूसरी मेडिकल स्टोरों से दवाई लिखकर कमीशन बटोरा। अस्पताल सामग्री में 07-08 में रुपए 36 लाख 26 हजार सामग्री प्रदाय के व्हाउचर लगाए गए रुपए 18 लाख सीधा और 08-09 में रुपए 27, 67 हजार रुपए 12 से 15 लाख सीधे डकारे गए। जिसकी पुष्टि प्रा.स्वा. के. से लेकर जिला अस्पताल में देखी जा सकती है। भोजन के नाम पर 07-08 में रुपए 10 लाख में से रुपए 9 लाख के बिस्कुट की खरीदी दिखाई गई बिस्कुट की खरीदी दिखाई गई बिस्कुट आए रुपए 2 लाख के बाकी रुपए बाकी रुपए 7 लाख सीधे हजम किए। डॉ. शरद पंडित व पश्चात वर्ती प्रभारी सी.एम.ओं ने रुपए 2 लाख के बिस्कुट में इतने घटिया थे कि कुत्तों को परोसे गए, अर्थात वो माल भी रुपए 50 हजार का नही था। स्टायफुड रुपए 14 लाख 21 हजार में 10 में से 20 प्रतिशत कमीशन 07-08 अन्य खर्चो रुपए 5 लाख में से 496 हजार में 80 प्रतिशत हजम इसलिए 08-09 में कोई आंवटन नही। मशीनरी के खरीदी और रखरखाव के नाम रुपए 15 लाख आवंटित खर्च 1495 हजार 30 प्रतिशत रुपए 450 हजार हजम बढ़ी की भत्तों के व्हाउचर लगाकर पुराना माल पुरानी कीमतों पर कमीशन के बदले खरीदा गया। प्रचार के लाभ आवंटित में 07-08 में पूरा खर्च किया गया 90 प्रतिशत रुपए 4.50 हजम बाकी के पोस्टर छपवाना, दीवाल पुतवाने में दिखाकर हजम 08-09 में कोई बजट नही। प्रशिक्षण के नाम 07-08 में रुपए 1 लाख स्वीकृत 90 प्रतिशत हजम 10000 में प्रशिक्षणर्थीयों थोड़ा बहुत नास्ता वगैरह दिया गया, सारे फर्जी व्हाउचर, नर्मदा घाटी पुनर्वास में रुपए 3 लाख 34 हजार खर्च 90 प्रतिशत पैसा हजम कागजों पर खर्च 08-09 में पूरा पैसा लौटाया गया। निर्माण कार्यो में रुपए 11.5 लाख मेंं काम हुआ रुपए 6 लाख से भी कम का बाकी हजम। राज्य बीमारी 07-08 में 10 लाख आवंटित और खर्च 40 प्रतिशत झूठे वाउचरों से और 08-09 में रुपए 25 लाख में से रुपए 10 लाख डकारे गए। दीनदयाल योजना में रुपए 27 लाख में 07-08 में से रुपए 21 लाख में से 35-40 प्रतिशत-08-09 में 10 लाख में से रुपए 3 लाख 51,000 रुपए 20 लाख में 8 लाख डकारे गए। यदि इनके वाउचरों की बारीकी से जांच की जाए तो घोटालें और भ्रष्टाचार में धन डकारने की राशि अनुमान से ज्यादा हो सकती है। लोकायुक्त आर्थिक अपराध अन्वेषण यदि तरीके से जांच करें तो सीएमओं से लेकर अंतिम छोर पर बैठा हर डॉक्टर और वहां पर बैठा हर डॉक्टर और वहां बैठे कम्पांउडर और बाबू तक लपेटे में आ सकते हैं। इस प्रकार कुल रुपए 882 लाख में से रुपए 3 करोड़ और 08-09 में रुपए 10 करोड़ में से लगभग 5 करोड़ की राशि सी.एम.ओ. से लेकर प्रा. स्वा. केंन्द्र पर बैठे डॉक्टरों और अधिकारियों ने डकारी बेशक हर कर्मचारी यथायोग्य भेंटपूजा प्राप्त हुई, इसीलिए सूचना के अधिकार में हरामखोर पचासों चक्कर कटवाने के बाद 24 पन्ने की जानकारी दे पाए।


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